अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प / IANS/X/@WhiteHouse
ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका की मंशाओं पर बढ़ती अंतरराष्ट्रीय चिंता के बीच रिपोर्ट्स में कहा गया है कि संयुक्त राज्य अमेरिका फिलहाल ग्रीनलैंड पर सैन्य कार्रवाई नहीं करेगा। जर्मनी ने इस तरह के किसी भी संभावित हमले की आशंका को कमतर बताया है, जबकि नाटो ने आर्कटिक क्षेत्र की सुरक्षा को लेकर अमेरिका के साथ “अगले कदमों” पर काम करने की बात कही है।
इस बीच चीन ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के उस तर्क पर कड़ा एतराज जताया है, जिसमें उन्होंने रूस और चीन की मौजूदगी को ग्रीनलैंड और आर्कटिक में अमेरिका की दखलअंदाजी का आधार बताया। मॉस्को स्थित RT.com के अनुसार, चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि अमेरिका आर्कटिक में अपने विस्तार को सही ठहराने के लिए चीन और रूस का नाम ले रहा है।
फाइनेंशियल टाइम्स के मुताबिक, एक वरिष्ठ नॉर्डिक राजनयिक ने खुफिया जानकारियों के हवाले से कहा कि यह दावा “पूरी तरह गलत” है कि आर्कटिक क्षेत्र में चीन या रूस की सक्रिय सैन्य मौजूदगी है। उन्होंने कहा, “न वहां जहाज हैं और न ही पनडुब्बियां।”
जर्मनी के सरकारी प्रसारक डॉयचे वेले (DW) ने नाटो प्रमुख मार्क रुटे के हवाले से बताया कि सभी सहयोगी देश आर्कटिक और उसकी सुरक्षा के महत्व पर सहमत हैं, खासकर तब जब नए समुद्री मार्ग खुल रहे हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि नाटो देश मिलकर आर्कटिक सुरक्षा के लिए आगे की रणनीति पर काम कर रहे हैं।
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एक अन्य रिपोर्ट में DW ने बताया कि जर्मनी के विदेश मंत्री जोहान वेडेफुल ने अमेरिका द्वारा ग्रीनलैंड पर सैन्य कार्रवाई की आशंकाओं को “बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया” बताया। उन्होंने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से मुलाकात के बाद कहा कि ऐसा मानने का “कोई ठोस कारण नहीं” है कि अमेरिका इस विकल्प पर गंभीरता से विचार कर रहा है। उन्होंने यह भी दोहराया कि आर्कटिक की सुरक्षा को लेकर नाटो देशों के साझा हित हैं।
न्यूजवीक की एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी अधिकारियों का तर्क है कि ग्रीनलैंड पर नियंत्रण अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा और नाटो की रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने के लिए जरूरी है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि अमेरिका की दिलचस्पी केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि पश्चिमी गोलार्ध में प्रभाव बढ़ाने और प्राकृतिक संसाधनों तक पहुंच से भी जुड़ी है।
रिपोर्ट के मुताबिक, आर्कटिक क्षेत्र अब केवल तटीय देशों तक सीमित मुद्दा नहीं रहा। चीन ने खुद को “नियर-आर्कटिक स्टेट” घोषित किया है, जबकि रूस — जो इस क्षेत्र में सबसे प्रभावशाली शक्ति है — लगातार अपने निवेश और मौजूदगी को बढ़ा रहा है। चीन की पोलर सिल्क रूट पहल को भी इसी संदर्भ में देखा जा रहा है, जो बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) का हिस्सा है।
न्यूजवीक ने बेल्जियम के रक्षा मंत्री थियो फ्रैंकेन के हवाले से कहा कि नाटो देशों को आर्कटिक में एक नया संयुक्त अभियान शुरू करना चाहिए, ताकि क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर अमेरिकी चिंताओं का समाधान हो सके।
हालांकि, रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि ग्रीनलैंड के लोग भले ही भविष्य में डेनमार्क से अलग होने के पक्ष में हों, लेकिन जनमत सर्वेक्षणों के अनुसार अधिकांश ग्रीनलैंडवासी अमेरिका का हिस्सा बनने के पक्ष में नहीं हैं।
ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेन्स फ्रेडरिक नीलसन पहले ही राष्ट्रपति ट्रम्प के देश के विलय संबंधी बयानों को खारिज कर चुके हैं। उन्होंने साफ कहा है, “संयुक्त राज्य अमेरिका ग्रीनलैंड को नहीं ले सकता।” उन्होंने जोर देकर कहा कि ग्रीनलैंड एक स्वशासित क्षेत्र है और उसका भविष्य उसके लोगों के हाथ में है।
विशेषज्ञों के अनुसार, ग्रीनलैंड के पास प्रचुर प्राकृतिक संसाधन हैं, जिनमें जीवाश्म ईंधन और महत्वपूर्ण कच्चे पदार्थ शामिल हैं। इसके अलावा, उत्तरी अटलांटिक में इसकी रणनीतिक स्थिति इसे और भी अहम बनाती है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका के सैनिक पहले से ही ग्रीनलैंड के उत्तर-पश्चिमी हिस्से में तैनात हैं, जहां स्थित सैन्य अड्डा अमेरिका की ओर आने वाली लंबी दूरी की मिसाइलों का पता लगाने में अहम भूमिका निभाता है।
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