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आप्रवासियों की सफलता, संघर्ष और अपने एकांत की कहानियां

मेडिटेशन कोच मयूर कटारिया का कहना है कि विदेश में करियर की सफलता अक्सर अकेलेपन, अपनी पहचान से जुड़ी मुश्किलों और इमोशनल बर्नआउट (मानसिक और भावनात्मक थकान) को छिपा देती है।

 मयूर कटारिया मयूर कटारिया / Nondual Midlife Reset: The Calm Strength Method

विदेश में रहने वाले कई भारतीयों के लिए, सफलता का मतलब अक्सर करियर में कामयाबी, आर्थिक स्थिरता और विदेश व देश में अपने परिवार की मदद करने की क्षमता से होता है। लेकिन भारत में जन्मे मेडिटेशन कोच और लेखक मयूर कटारिया के अनुसार, कामयाबी की इस छवि के पीछे कई लोग चुपचाप तनाव, अकेलेपन और मकसद खोने जैसी समस्याओं से जूझते हैं।

'न्यू इंडिया अब्रॉड' के साथ एक इंटरव्यू में, 'नॉनडुअल मिडलाइफ रीसेट: द काम स्ट्रेंथ मेथड' के फाउंडर कटारिया ने बताया कि उन्होंने खास तौर पर 40 साल से ज्यादा उम्र के भारतीय प्रवासी पुरुषों के लिए वन-ऑन-वन ​​कोचिंग प्रोग्राम क्यों शुरू किया। उन्होंने कहा कि प्रवासी समुदायों में अक्सर विदेश में बसने से जुड़ी भावनात्मक चुनौतियों को नजरअंदाज कर दिया जाता है।

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