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एक ऐसा सपना, जिसकी कभी कल्पना भी नहीं की थी

आज भी वे शब्द मेरे कानों में गूंजते हैं - “मैडम आपका चयन आईबीओ (India-Based Officer) पद के लिए हो गया है और आपकी नियुक्ति लॉस एंजिलिस में की गई है।”

 सांकेतिक तस्वीर सांकेतिक तस्वीर / AI Generated

आज भी वे शब्द मेरे कानों में गूंजते हैं - “मैडम आपका चयन आईबीओ (India-Based Officer) पद के लिए हो गया है और आपकी नियुक्ति लॉस एंजिलिस में की गई है।” यह खबर मुझे भारतीय स्टेट बैंक (स्टेट बैंक ऑफ इंडिया) की उस शाखा के एक अधिकारी ने दी थी, जिसकी मैं उस समय शाखा प्रबंधक थी।
हालांकि इस खबर को सच मानने और पूरी तरह समझने में मुझे थोड़ा समय लगा। कई कठिन इंटरव्यू और मूल्यांकन प्रक्रियाओं से गुजरने के बाद मैंने हर तरह के परिणाम के लिए खुद को तैयार कर लिया था।
लेकिन इस बात के लिए नहीं कि मेरी पूरी जिंदगी बदलने वाली है। उस वर्ष पूरे भारत से केवल दो महिलाओं का इस विदेशी नियुक्ति के लिए चयन हुआ था।
यह पद बेहद प्रतिष्ठित था और हर अधिकारी का सपना माना जाता था। लेकिन यह केवल मेरे करियर में आगे बढ़ने का अवसर नहीं था। यह मेरे पूरे परिवार के जीवन को बदल देने वाला फैसला था।
मैं ऐसे सामाजिक परिवेश से आती हूं, जहां आमतौर पर परिवार का स्थानांतरण पति के करियर के अनुसार तय होता है। इसलिए हमें बहुत सोच-समझकर निर्णय लेना पड़ा।
मेरे पति का करियर...
बच्चों की पढ़ाई...
और हमारे पूरे परिवार का भविष्य...
इन सभी बातों पर गंभीर चर्चा हुई। कई भावनात्मक बातचीत के बाद हमने इस अवसर को स्वीकार करने का फैसला किया। 
बैंक की ओर से हमें लॉस एंजिलिस के पार्क ला ब्रेआ अपार्टमेंट्स में पूरी तरह सुसज्जित (फर्निश्ड) आवास उपलब्ध कराया गया। शुरुआती दिनों में मेरे सहकर्मियों और परिवार के सहयोग ने हमारी बहुत मदद की। 
उनकी आत्मीयता और सहयोग ने एक अनजान शहर को धीरे-धीरे हमारे अपने घर में बदल दिया।
लेकिन असली चुनौतियां तो उसके बाद शुरू हुईं। पेशेवर जीवन में मुझे अमेरिका के बैंकिंग नियमों, अनुपालन (कम्प्लायंस) प्रक्रियाओं और कार्य संस्कृति को बहुत जल्दी सीखना पड़ा।
वहीं व्यक्तिगत जीवन में...
ड्राइविंग लाइसेंस बनवाना...
स्वास्थ्य सेवाओं की व्यवस्था को समझना...
और यहां तक कि अमेरिका के विशाल फ्रीवे सिस्टम पर गाड़ी चलाना...
इन सभी चीजों के लिए धैर्य, साहस और लगातार सीखने की जरूरत थी। मेरे पति को भी नए देश में अपना करियर फिर से शुरू करना पड़ा।
बेहतर अवसरों की तलाश में उन्होंने कई बार नौकरी बदली और अलग-अलग शहरों में स्थानांतरण भी स्वीकार किए। इन बदलावों के साथ कई त्याग भी जुड़े। 
उन्हें हमारे बड़े बच्चे के कॉलेज ओरिएंटेशन जैसे ऐसे महत्वपूर्ण अवसर भी छोड़ने पड़े, जिन्हें हर माता-पिता अपने बच्चों के साथ बिताना चाहते हैं।
उनका धैर्य और परिवार के प्रति उनका अटूट सहयोग हमारी सफलता की सबसे बड़ी ताकत बना। हमारे बच्चों के सामने भी अपनी चुनौतियां थीं।
उन्हें नए स्कूलों, नई संस्कृति और बिल्कुल अलग शिक्षा प्रणाली के साथ खुद को ढालना पड़ा। दूसरे प्रवासी परिवारों की तरह हमने भी अनिश्चितता और अपने देश की याद जैसी भावनाओं का सामना किया। लेकिन समय के साथ यही चुनौतियां अवसरों में बदल गईं।
हमारे दोनों बच्चों का चयन यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया के विभिन्न परिसरों में हुआ और बाद में उन्होंने अपने-अपने क्षेत्रों में सफल करियर बनाया।
तब हमें महसूस हुआ कि एक परिवार के रूप में किए गए हमारे सभी त्याग सार्थक थे। हमारी इस यात्रा को सबसे खास अमेरिका और यहां के लोगों की आत्मीयता ने बनाया।
हमारे पड़ोसी...
सहकर्मी...
शिक्षक..
और समाज के अन्य लोगों ने... हमारा खुले दिल से स्वागत किया।
उन्होंने हर कदम पर हमारा उत्साह बढ़ाया, हमारा सम्मान किया और नए माहौल में खुद को ढालने में हमारी मदद की।
उनकी एक मुस्कान और एक साधारण-सा अभिवादन भी हमें अपनापन महसूस कराता था।
उनकी संवेदनशीलता ने हमारे इस विश्वास को और मजबूत किया कि अमेरिका ऐसा देश है, जहां नए लोगों को केवल अवसर ही नहीं दिए जाते, बल्कि उन्हें समाज का सम्मानित सदस्य भी माना जाता है।
हमसे पहले आए लाखों प्रवासियों की तरह हम भी अमेरिका उम्मीद, मेहनत और बेहतर भविष्य के सपने लेकर आए थे। और यहां आकर हमने एक ऐसे देश को देखा, जहां मेहनत का सम्मान होता है, नवाचार को प्रोत्साहन मिलता है और विविधता का उत्सव मनाया जाता है।
मैंने सीखा कि अमेरिकन ड्रीम किसी को उपहार में नहीं मिलता। उसे दृढ़ता, परिस्थितियों के अनुरूप खुद को बदलने की क्षमता और कड़ी मेहनत से हासिल करना पड़ता है। समय के साथ मेरा करियर कई वित्तीय संस्थानों तक पहुंचा।
इन अनुभवों ने मेरे पेशेवर और व्यक्तिगत जीवन दोनों को समृद्ध बनाया। बैंकिंग से सेवानिवृत्त होने के बाद मैंने अपनी कंसल्टिंग और रियल एस्टेट कंपनी शुरू की।
यहीं मुझे उद्यमियों की मदद करने में एक नया उद्देश्य मिला। जब मैंने पीछे मुड़कर देखा कि अमेरिका ने मेरे परिवार को क्या-क्या दिया—
पेशेवर विकास...
आर्थिक स्थिरता...
जीवनभर के मित्र...
और अपनापन...
तो मुझे महसूस हुआ कि इस कृतज्ञता को व्यक्त करने का सबसे अच्छा तरीका समाज की सेवा करना है।
आज मैं गर्व के साथ आर्टेसिया चैंबर ऑफ कॉमर्स, एबीसी एजुकेशन फाउंडेशन और महिलाओं को सशक्त बनाने वाले संगठन ‘साहस फॉर कॉज’ के निदेशक मंडल (बोर्ड) में कार्य कर रही हूं।
इसके अलावा मैं लॉन्ग बीच स्मॉल बिजनेस डेवलपमेंट सेंटर में बिजनेस एडवाइजर के रूप में भी काम करती हूं, जहां मैं नए उद्यमियों और छोटे व्यापारियों को निःशुल्क मार्गदर्शन प्रदान करती हूं।
दूसरों को सफल व्यवसाय खड़ा करने में मदद करना अब मेरे जीवन की सबसे संतोषजनक उपलब्धियों में से एक बन चुका है।
आज जब मैं पीछे मुड़कर देखती हूं, तो महसूस करती हूं कि लॉस एंजिलिस की वह नियुक्ति केवल मेरे करियर का एक पड़ाव नहीं थी।
उसने मेरे पेशेवर जीवन को नई दिशा दी...
मेरे परिवार का भविष्य बदला...
और मेरे भीतर समाज को कुछ लौटाने की आजीवन भावना पैदा की।
अमेरिका ने हमें हमारी कल्पना से भी बड़े सपने देखने का अवसर दिया।
लेकिन इससे भी बड़ी बात यह सिखाई कि सच्ची सफलता केवल अपनी उपलब्धियों से नहीं मापी जाती।
सच्ची सफलता इस बात से तय होती है कि हम अपनी उपलब्धियों का उपयोग दूसरों के लिए नए अवसर पैदा करने में कितना करते हैं।
आज जब मैं उद्यमियों का मार्गदर्शन करती हूं...
छात्रों की मदद करती हूं...
और अपने समुदाय की सेवा करती हूं...
तो मुझे लगता है कि मेरी पूरी यात्रा एक पूर्ण चक्र पूरा कर चुकी है।
मेरे लिए यही है अमेरिकी सपने का वास्तविक अर्थ।


लेखक एक बिज़नेस कंसल्टेंट और रियल्टर हैं, जो रेजिडेंशियल और कमर्शियल रियल एस्टेट में माहिर हैं।

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