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71% भारतीय-अमेरिकी ट्रम्प के कामकाज से असंतुष्ट, सर्वे में खुलासा

दिसंबर 2025 में हुए राष्ट्रीय स्तर के यूगव सर्वे की तुलना में भारतीय-अमेरिकी समुदाय ट्रम्प के प्रति कहीं अधिक आलोचनात्मक नजर आया।

 प्रतीकात्मक तस्वीर प्रतीकात्मक तस्वीर / Courtesy: AI-generated

अमेरिका में भारतीय मूल के लोगों के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की कार्यशैली को लेकर असंतोष बढ़ता दिख रहा है। वर्ष 2026 के ‘इंडियन अमेरिकन एटिट्यूड्स सर्वे’ (आईएएएस) के अनुसार 71 प्रतिशत भारतीय-अमेरिकी ट्रम्प के दूसरे कार्यकाल में उनके समग्र प्रदर्शन से असहमति जताते हैं, जबकि केवल 29 प्रतिशत ने समर्थन व्यक्त किया।

यह सर्वे Carnegie Endowment for International Peace ने ‘यूगव’ के साथ मिलकर किया, जिसमें एक हजार भारतीय-अमेरिकी वयस्कों की राय ली गई। दिसंबर 2025 में हुए राष्ट्रीय स्तर के यूगव सर्वे की तुलना में भारतीय-अमेरिकी समुदाय ट्रम्प के प्रति कहीं अधिक आलोचनात्मक नजर आया।

रिपोर्ट ट्रम्प के दूसरे कार्यकाल के एक वर्ष पूरे होने के मौके पर जारी की गई है। इसमें संकेत मिला है कि अमेरिका-भारत संबंधों में तनाव, घरेलू नीतिगत बदलाव और ऑनलाइन घृणास्पद टिप्पणियों की बढ़ती घटनाओं के बीच समुदाय अपनी राजनीतिक और सामाजिक स्थिति का पुनर्मूल्यांकन कर रहा है।

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क्या कहता है सर्वे
नीतिगत मुद्दों पर भी बड़ी संख्या में असहमति सामने आई। 64 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने ट्रम्प की आव्रजन नीति को लेकर असंतोष जताया, 68 प्रतिशत ने घरेलू अर्थव्यवस्था के प्रबंधन पर नाराजगी जाहिर की और 70 प्रतिशत ने अंतरराष्ट्रीय आर्थिक नीति—जिसमें व्यापार और शुल्क शामिल हैं—को लेकर अस्वीकृति व्यक्त की।

अमेरिका-भारत संबंधों को लेकर भी तस्वीर सकारात्मक नहीं रही। 55 प्रतिशत ने भारत के प्रति ट्रम्प के रुख को नापसंद किया, 20 प्रतिशत ने समर्थन किया, जबकि लगभग एक-चौथाई ने कोई राय नहीं दी।

भारतीय-अमेरिकियों का डेमोक्रेट से जुड़ाव
राजनीतिक पहचान के लिहाज से भारतीय-अमेरिकी अब भी बड़ी संख्या में डेमोक्रेटिक पार्टी के साथ जुड़े हैं, लेकिन 2020 के मुकाबले यह जुड़ाव कुछ कमजोर हुआ है। 46 प्रतिशत स्वयं को डेमोक्रेटिक समर्थक बताते हैं, 19 प्रतिशत रिपब्लिकन से जुड़ाव रखते हैं, जबकि 29 प्रतिशत स्वतंत्र रुख अपनाते हैं। वैचारिक रूप से 32 प्रतिशत खुद को मध्यमार्गी बताते हैं।

सर्वे में कौन से मुद्दे हावी
आर्थिक मुद्दे समुदाय की प्राथमिकता में सबसे ऊपर हैं। 21 प्रतिशत ने महंगाई और कीमतों को सबसे अहम मुद्दा बताया, जबकि 17 प्रतिशत ने रोजगार और अर्थव्यवस्था को प्राथमिकता दी। स्वास्थ्य सेवा और आव्रजन ही अन्य ऐसे मुद्दे हैं जो दो अंकों में दर्ज हुए।

भेदभाव का अनुभव भी व्यापक बना हुआ है। 27 प्रतिशत का मानना है कि भारतीय-अमेरिकियों को अमेरिका में “काफी” भेदभाव झेलना पड़ता है। लगभग आधे उत्तरदाताओं ने हाल के वर्षों में व्यक्तिगत रूप से भेदभाव का अनुभव होने की बात कही। 2025 की शुरुआत से हर चार में से एक व्यक्ति ने अपमानजनक टिप्पणी या गाली का सामना करने की सूचना दी।

सर्वे में पाया गया कि सोशल मीडिया पर नस्लीय टिप्पणियों का सामना आम है। करीब आधे लोगों ने नियमित रूप से भारत-विरोधी सामग्री देखने की बात कही। लगभग एक-तिहाई ने भेदभाव की चिंता के कारण ऑनलाइन राजनीतिक चर्चा से दूरी बनाई, जबकि कुछ ने यात्रा या सार्वजनिक अभिव्यक्ति में भी सावधानी बरती।

इसके बावजूद अधिकांश लोग अमेरिका छोड़ने की योजना नहीं बना रहे हैं। हालांकि 14 प्रतिशत ने विदेश में बसने पर विचार करने की बात कही, फिर भी बहुसंख्यक अमेरिका को रोजगार के अवसरों के लिए उपयुक्त मानते हैं।

प्रतीकात्मक राजनीतिक घटनाओं पर प्रतिक्रिया भी वैचारिक आधार पर बंटी दिखी। न्यूयॉर्क सिटी के मेयर जोहरान ममदानी के चुनाव को 68 प्रतिशत ने सकारात्मक रूप से लिया। वहीं उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की धर्म और विवाह संबंधी टिप्पणियों पर नकारात्मक प्रतिक्रिया दर्ज की गई।

यह अध्ययन 25 नवंबर 2025 से 6 जनवरी 2026 के बीच किया गया और इसकी त्रुटि सीमा ±3.6 प्रतिशत है। रिपोर्ट के निष्कर्ष बताते हैं कि ट्रम्प के दूसरे कार्यकाल के एक वर्ष बाद भारतीय-अमेरिकी समुदाय में भेदभाव और राजनीतिक माहौल को लेकर चिंता है, लेकिन साथ ही अमेरिका में अवसरों पर भरोसा भी कायम है।

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