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पैसा भेजने पर कर : यानी आप्रवासियों के विरुद्ध युद्ध में एक और हमला

इस महीने की शुरुआत में अमेरिकी सामुदायिक मीडिया ब्रीफिंग में पैनलिस्टों ने उल्लेख किया कि यह कर अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।

 राष्ट्रपति ट्रम्प।  राष्ट्रपति ट्रम्प। / X image

राष्ट्रपति ट्रम्प का वन, बिग, ब्यूटीफुल एक्ट (OBBA) जिसे पिछले महीने सदन ने पारित किया था संयुक्त राज्य अमेरिका में रहने वाले व्यक्तियों द्वारा भेजे गए अंतरराष्ट्रीय धन-प्रेषण पर 3.5% उत्पाद शुल्क लगाने का प्रस्ताव है। इस प्रस्ताव में अमेरिकी नागरिकों को छूट दी गई है। धन प्रेषण आमतौर पर संयुक्त राज्य अमेरिका के बाहर के पक्षों को अमेरिकी वित्तीय संस्थानों के माध्यम से किए जाने वाले भुगतान होते हैं। 

इस महीने की शुरुआत में अमेरिकी सामुदायिक मीडिया ब्रीफिंग में पैनलिस्टों ने उल्लेख किया कि यह कर अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। इसके परिणामस्वरूप एक ओर उन आप्रवासियों की ओर से घरेलू खर्च में कमी आएगी जो घर वापस पैसा भेजते हैं। दूसरी ओर यह उपाय अधिक वित्तीय लेन-देन को भूमिगत कर सकता है और इसीलिए इससे जितना पैसा जुटाया जाता है, उससे अधिक खर्च हो सकता है।

आप्रवासियों की ओर से घरेलू खर्च में कमी
माइग्रेशन पॉलिसी इंस्टीट्यूट के वरिष्ठ नीति विश्लेषक एरियल रुइज सोटो ने कहा- यहां तक ​​कि अमेरिका में आर्थिक या राजनीतिक अनिश्चितता के समय में भी प्रवासी अपने परिवारों और समुदायों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता बनाए रखते हैं। वे इस परिवर्तनकारी जीवनरेखा को भेजना जारी रखते हैं। 

लैटिनो डोनर कोलैबोरेटिव की अध्यक्ष और सीईओ एना वाल्डेज ने कहा कि इसके परिणाम अमेरिका के भीतर ही प्रतिगामी होंगे। वाल्डेज ने बताया कि लैटिनो समुदाय की क्रय शक्ति 4 ट्रिलियन डॉलर से अधिक है और वह पहले से ही प्रतिक्रिया कर रहा है। हमने प्रेषण कर की घोषणा के बाद कई सर्वेक्षण किए। लोगों ने स्पष्ट किया: वे पैसे भेजना बंद नहीं करने जा रहे हैं। 'मेरी मां को हर महीने 1,000 डॉलर मिलेंगे, चाहे कुछ भी हो। वे अपने खर्चों में कटौती करेंगे। यानी कम बाहर जाना, कम खरीदारी, कम खपत।

भारतीय प्रवासी संयुक्त राज्य अमेरिका में सबसे बड़े प्रवासी समुदायों में से एक है। वर्ष 2023 तक, 2.9 मिलियन से अधिक भारतीय आप्रवासी अमेरिका में रहते हैं। माइग्रेशन पॉलिसी इंस्टीट्यूट के आंकड़ों के अनुसार संयुक्त अरब अमीरात के बाद संयुक्त राज्य अमेरिका वैश्विक स्तर पर भारतीयों के लिए दूसरा सबसे लोकप्रिय गंतव्य है।

नए बिल के तहत, प्रेषण कर, जिसे 'उत्पाद शुल्क' कहा जाता है केवल गैर-अमेरिकी नागरिकों पर लागू होगा। अमेरिकी नागरिकों को छूट दी गई है। प्रभावित लोगों में ग्रीन कार्ड धारक और रोजगार वीजा पर रहने वाले व्यक्ति शामिल हैं।

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