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पढ़ने-पढ़ाने की जद्दोजहद

वैंस पहले भी अपने 'समर रीडिंग चैलेंज' के जरिए इस मुहिम को आगे बढ़ा चुकी हैं, जिसे पूरे देश से हजारों लोगों का जबरदस्त समर्थन मिला था। उनका संदेश साफ है। घर पर पढ़ना, भले ही थोड़ा-बहुत ही क्यों न हो, बच्चों के सीखने और बढ़ने के तरीके में एक बड़ा बदलाव ला सकता है।

 सेकेंड लेडी उषा वेंस एक संवाद सत्र में... सेकेंड लेडी उषा वेंस एक संवाद सत्र में... / IANS

सेकेंड लेडी उषा वैंस अपने नए पॉडकास्ट 'स्टोरीटाइम विद द सेकेंड लेडी' के साथ बच्चों की कहानियों की दुनिया में कदम रख रही हैं। इस पॉडकास्ट में वह क्लासिक किताबें पढ़ेंगी और लेखकों, खिलाड़ियों और संगीतकारों जैसे मेहमानों को भी ऐसा करने के लिए आमंत्रित करेंगी। इसके पीछे का विचार सिर्फ सोने से पहले कहानियां पढ़ने से कहीं ज्यादा बड़ा है। यह पॉडकास्ट संयुक्त राज्य अमेरिका में बढ़ रही एक समस्या से निपटने के उनके प्रयासों का हिस्सा है: बच्चों और बड़ों में पढ़ने के कौशल में आ रही गिरावट।

वैंस पहले भी अपने 'समर रीडिंग चैलेंज' के जरिए इस मुहिम को आगे बढ़ा चुकी हैं, जिसे पूरे देश से हजारों लोगों का जबरदस्त समर्थन मिला था। उनका संदेश साफ है। घर पर पढ़ना, भले ही थोड़ा-बहुत ही क्यों न हो, बच्चों के सीखने और बढ़ने के तरीके में एक बड़ा बदलाव ला सकता है।

यह भी पढ़ें: ताकि बच्चों को पढ़ने की आदत लगे, उषा वेंस ने शुरू किया नया रीडिंग पॉडकास्ट

इसकी जरूरत देश के चिंताजनक आंकड़ों से साफ होती है। पढ़ने के कौशल से जुड़े सबसे ताजा आंकड़े 2024 के हैं। नेशनल लिटरेसी इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका के 54 प्रतिशत वयस्क छठी कक्षा के स्तर से भी नीचे पढ़ते हैं। 2024 की 'नेशन रिपोर्ट कार्ड' से पता चला है कि आठवीं कक्षा के 33 प्रतिशत छात्र NAEP के 'बेसिक' स्तर पर भी नहीं पढ़ पा रहे हैं। यह अब तक का सबसे ज्यादा आंकड़ा है। इसका मतलब है कि कई छात्रों को किसी भी लेख में मौजूद आसान चीजों को समझने में भी दिक्कत होती है। जैसे कि घटनाओं का क्रम, किरदारों की विशेषताएं, या उसका मुख्य विचार।

इस गिरावट के कारण जटिल जरूर हैं, लेकिन साफ हैं। कई स्कूलों ने 'फोनिक्स-आधारित' (ध्वनि-आधारित) शिक्षण के बजाय ऐसी विधियों को अपना लिया है, जो शब्दों को उनके संदर्भ के आधार पर अंदाजे से पढ़ने को बढ़ावा देती हैं। इसकी वजह से कई छात्रों में आत्मविश्वास के साथ पढ़ने के लिए जरूरी बुनियादी कौशल की कमी रह गई है।

महामारी ने सीखने की प्रक्रिया में रुकावट डालकर स्थिति को और भी बदतर बना दिया। खासकर उन समुदायों के छात्रों के लिए जहां संसाधनों की कमी थी। इसके साथ ही, स्क्रीन (मोबाइल/कंप्यूटर) पर अधिक समय बिताने की वजह से किताबों के साथ बिताया जाने वाला समय कम हो गया है और ध्यान केंद्रित करने की क्षमता भी कमजोर पड़ गई है।

नतीजतन, कई बच्चों को शब्दावली, समझ और लंबे लेखों पर ध्यान केंद्रित करने की क्षमता में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि पढ़ने के लिए आजमाए हुए और शोध-आधारित तरीकों को फिर से अपनाने से इस गिरावट को रोका जा सकता है। लेकिन यह बदलाव घरों में भी आना जरूरी है। यहीं पर वैंस का पॉडकास्ट काम आता है। यह परिवारों को कहानियों को अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में वापस लाने और पढ़ने की संस्कृति को फिर से मजबूत करने का एक आसान और सुलभ तरीका देता है।

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