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विशेष लेख: क्या संयुक्त राष्ट्र की सख्ती से तालिबान पर अंकुश लगेगा?

दिक्कत यह है कि तालिबान मुकम्मल तस्वीर देखना ही नहीं चाहता। इसके बजाय काबुल में शासन पर लगाए गए प्रतिबंधों के लिए वह अंतरराष्ट्रीय समुदाय पर ही दोषारोपण करता रहता है। हालांकि शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे कुछ क्षेत्रों में महिलाओं को काम की अनुमति तालिबान ने दी है।

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