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इंडिया फाउंडेशन के अध्यक्ष राम माधव ने कहा- भारत-अमेरिका के बीच मौजूदा दौर अस्थायी

भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय महासचिव राम माधव ने कहा कि जब डोनल्ड ट्रम्प दूसरी बार राष्ट्रपति बने, तो भारत में काफी उम्मीदें थीं। लेकिन उसके बाद से हुए घटनाक्रम अप्रत्याशित रहे हैं।

 ram madhav ram madhav / X/@rammadhav

भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका के रिश्ते इस समय एक कठिन दौर से गुजर रहे हैं। व्यापार बातचीत, शुल्क (टैरिफ) को लेकर मतभेद और कुछ अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर अलग-अलग सोच के कारण दोनों देशों के बीच तनाव बना है। हालांकि, भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता राम माधव ने साफ कहा कि यह स्थिति अस्थायी हो सकती है और भारत अमेरिका के साथ साझेदारी को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध है। 

यहां ओवरसीज फ्रेंड्स ऑफ भारतीय जनता पार्टी (ओएफबीजेपी) के एक कार्यक्रम में बोलते हुए, इंडिया फाउंडेशन के अध्यक्ष और भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय महासचिव राम माधव ने कहा कि जब डोनल्ड ट्रम्प दूसरी बार राष्ट्रपति बने, तो भारत में काफी उम्मीदें थीं। लेकिन उसके बाद से हुए घटनाक्रम अप्रत्याशित रहे हैं।

उन्होंने कहा कि यह अनुभव सिर्फ भारत का ही नहीं है, बल्कि दुनिया के कई देशों का ट्रंप के साथ ऐसा ही अनुभव रहा है। ट्रंप का काम करने का तरीका अलग है और वे हर मुद्दे को अपने अंदाज में देखते हैं।

शुल्क और व्यापार को लेकर राम माधव ने कहा कि भारत बातचीत के लिए हमेशा तैयार रहा है। उन्होंने कहा, "हमारा वाणिज्य मंत्रालय और यहां का वाणिज्य विभाग लगभग आठ-नौ महीनों से बातचीत कर रहा है।" उन्होंने कहा कि बातचीत "डील के बहुत करीब" थी। उन्होंने यह भी कहा कि जब व्यापार के मुद्दों को अंतरराष्ट्रीय राजनीति से जोड़ दिया जाता है, तो समस्या बढ़ जाती है। 

राम माधव ने दोहराया कि भारत और पाकिस्तान का मामला पूरी तरह द्विपक्षीय है और इसमें किसी तीसरे देश की कोई भूमिका नहीं हो सकती। उन्होंने कहा, "हमारी एक स्पष्ट नीति है कि यह केवल एक द्विपक्षीय मुद्दा होगा। इसमें किसी भी तीसरे देश की कोई भूमिका नहीं है।" यह बात भारत ने अमेरिका को भी स्पष्ट रूप से बता दी है और अनुरोध किया है कि व्यापार और भू-राजनीति को अलग-अलग रखा जाए।

उन्होंने यह भी संकेत दिया कि बड़े नीतिगत फैसले अनौपचारिक तरीकों से नहीं होते। व्यापार समझौते गंभीर विषय होते हैं और इनके लिए लंबी और गहन बातचीत जरूरी होती है। उन्होंने कहा, "भारत मामलों को बहुत गंभीरता से लेता है। नीतियां फोन कॉल पर तय नहीं हो सकतीं।"

मौजूदा मुश्किलों के बावजूद राम माधव ने कहा कि भारत की अमेरिका के रिश्तों को नुकसान पहुंचाने की कोई मंशा नहीं है। यह रिश्ता किसी व्यक्ति से नहीं, बल्कि दोनों देशों के दीर्घकालिक हितों से जुड़ा हुआ है। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को याद करते हुए कहा कि भारत-अमेरिका संबंधों की आधुनिक नींव उन्होंने ही रखी थी। वाजपेयी ने कहा था कि भारत और अमेरिका स्वाभाविक मित्र हैं और यह रिश्ता दशकों में बना है।

राम माधव ने भारतीय प्रवासी समुदाय की भी सराहना की और कहा कि अमेरिका में रहने वाले भारतीय इस रिश्ते को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाते रहे हैं। माधव ने कहा कि मौजूदा दौर को अस्थायी समझना चाहिए। ये समस्याएं नीतियों से नहीं, बल्कि व्यक्तित्व से जुड़ी हैं। भारत अमेरिका के साथ रिश्तों को दोबारा मजबूत करने और आगे बढ़ाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
 

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