प्रतीकात्मक तस्वीर /
जैसे ही दीपावली का पर्व नज़दीक आ रहा है, लोग अपने घरों को सजाते, साफ-सफाई करते और नवीनीकरण की शुभकामनाएं आमंत्रित करते हैं। लेकिन यह त्योहार सिर्फ दीपकों का नहीं है। यह अपने अंदर की रोशनी और कर्मिक छाया को पहचानने का समय भी है।
वेदिक ज्योतिष और कर्म की समझ
मुम्बई में जन्मीं और अब कैलिफ़ोर्निया में आधारित प्रीतिबाला ने तीन दशकों से अधिक समय तक वेदिक ज्योतिष और दर्शन का अध्ययन और अभ्यास किया है। उनका कहना है कि ज्योतिष केवल भविष्य बताने का साधन नहीं, बल्कि आत्मा का मानचित्र है। ग्रहों का स्थान और उनके प्रभाव हमें यह दिखाते हैं कि जीवन में कौन से भाग मजबूत हैं, कौन से परिवर्तन के लिए तैयार हैं।
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प्रीतिबाला कहती हैं कि ज्यादातर लोग यह नहीं पूछते कि भविष्य क्या लाएगा, बल्कि यह जानना चाहते हैं कि मैं यह अनुभव क्यों कर रही हूं?। उनके अनुसार, कर्म सज्ञान और शिक्षा का माध्यम है, न कि दंड। पिछले जन्मों के अनुभव, पारिवारिक प्रतिध्वनियां और अभी तक अधूरी निर्णय शक्ति हमारी वर्तमान समस्याओं और रिश्तों में झलकती हैं।
दीपावली का संदेश और 2026 की दिशा
प्रीतिबाला के अनुसार, 2025 एक कर्मिक वर्ष रहा है, जिसमें अनुशासन और धैर्य की परीक्षा ली गई। 2026 में चुनौतियां खत्म नहीं होंगी, लेकिन नई शुरुआत के अवसर मिलेंगे। दीपावली पर जलाए गए दीपक हमें याद दिलाते हैं कि अंत को नए आरंभ में बदला जा सकता है, और बाधाओं से ज्ञान प्राप्त किया जा सकता है।
प्रीतिबाला मुम्बई, भारत में जन्मीं और वर्तमान में कैलिफ़ोर्निया स्थित वैदिक ज्योतिष हैं।
(इस लेख में व्यक्त किए गए विचार और राय लेखक के अपने हैं और न्यू इंडिया अब्रॉड की आधिकारिक नीति या स्थिति को प्रतिबिंबित नहीं करते।)
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