सांकेतिक तस्वीर / AI
जब अमेरिका अपनी 250वीं वर्षगांठ मना रहा है तो मैं केवल इस महान देश के इतिहास के बारे में ही नहीं, बल्कि एक प्रवासी के रूप में अपनी उस यात्रा के बारे में भी सोच रहा हूं, जिसने मुझे मेरी कल्पना से कहीं अधिक अवसर दिए।
मेरा जन्म और पालन-पोषण भारत के तेलंगाना राज्य के एक छोटे से किसान परिवार में हुआ। मेरे माता-पिता हमारे खेतों में दिन-रात मेहनत करते थे और सीमित संसाधनों के बावजूद शिक्षा को सबसे अधिक महत्व देते थे। एक छात्र के रूप में मैं हमेशा बेहतर भविष्य का सपना देखता था। लेकिन मैंने कभी कल्पना नहीं की थी कि यह सपना मुझे इतनी दूर तक ले जाएगा।
दिसंबर 1989 में मैं अमेरिका आया। मेरे पास केवल उम्मीद, दृढ़ संकल्प और यह विश्वास था कि कड़ी मेहनत किसी भी इंसान की जिंदगी बदल सकती है। मुझसे पहले आए लाखों प्रवासियों की तरह मैं भी अवसरों की तलाश में यहां आया था। लेकिन यहां आकर मुझे अवसरों से भी बढ़कर कुछ मिला।
मुझे एक ऐसा देश मिला, जहां किसी व्यक्ति का भविष्य इस बात से तय नहीं होता कि उसका जन्म कहां हुआ है, बल्कि इस बात से तय होता है कि वह समाज के लिए क्या योगदान देने को तैयार है। अमेरिका ने मेरा खुले दिल से स्वागत किया। इस देश ने मुझे वेन स्टेट यूनिवर्सिटी में उच्च शिक्षा प्राप्त करने का अवसर दिया, जहां से मैंने केमिकल इंजीनियरिंग में मास्टर डिग्री हासिल की।
इसने मुझे उद्यमी बनने की आजादी दी...व्यवसाय स्थापित करने का अवसर दिया... रोजगार सृजित करने का मौका दिया... अपने परिवार का भविष्य सुरक्षित करने का अवसर दिया... और अपने समुदाय की सेवा करते हुए सार्वजनिक जीवन में सक्रिय भागीदारी करने का अवसर भी दिया।
जब मैं तीन दशक से अधिक समय पहले पहली बार अमेरिका की धरती पर उतरा था, तब मैंने कभी नहीं सोचा था कि एक दिन मुझे यह सब हासिल होगा। शायद अमेरिकन ड्रीम का सबसे बड़ा प्रमाण यह है कि साल 2024 में मिशिगन के मतदाताओं ने मुझे वेन स्टेट यूनिवर्सिटी के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के सदस्य के रूप में चुना।
एक ऐसा प्रवासी, जो कभी बहुत कम साधनों के साथ इस देश में आया था... उसे आज मिशिगन के सबसे प्रतिष्ठित सार्वजनिक विश्वविद्यालयों में से एक के प्रशासन की जिम्मेदारी सौंपना... मेरे लिए विनम्रता और गर्व दोनों का विषय है।
यह मुझे हमेशा याद दिलाता है कि अमेरिका आज भी ऐसा देश है, जहां योग्यता, दृढ़ता और समाज सेवा का सम्मान किया जाता है। अमेरिका की कहानी हमेशा से सपनों और आकांक्षाओं की कहानी रही है।
पिछले 250 वर्षों से यहां की पीढ़ियां स्वतंत्रता, अवसर और लोकतांत्रिक मूल्यों पर आधारित राष्ट्र के निर्माण में लगी रही हैं। निस्संदेह, इस देश ने भी कई चुनौतियों और कमियों का सामना किया है। लेकिन इसकी सबसे बड़ी ताकत हमेशा यही रही है कि यह खुद को लगातार बेहतर बनाता है और आने वाली पीढ़ियों के लिए नए अवसर पैदा करता है।
एक भारतीय-अमेरिकी होने के नाते मुझे विशेष रूप से भारत और अमेरिका के बीच मजबूत होते संबंधों पर गर्व है। दुनिया के सबसे पुराने लोकतंत्र और सबसे बड़े लोकतंत्र के बीच यह संबंध आज 21वीं सदी की सबसे महत्वपूर्ण वैश्विक साझेदारियों में से एक बन चुका है। यह साझेदारी साझा लोकतांत्रिक मूल्यों, उद्यमिता, नवाचार और स्वतंत्रता के प्रति प्रतिबद्धता पर आधारित है। भारतीय-अमेरिकी समुदाय ने इन दोनों महान देशों के बीच एक मजबूत सेतु का काम किया है।
हमने व्यापार, चिकित्सा, प्रौद्योगिकी, शिक्षा, सार्वजनिक सेवा और अनेक अन्य क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। आज का अमेरिका अपनी विविधता की वजह से और अधिक मजबूत है। यहां अलग-अलग पृष्ठभूमि, संस्कृतियां और अनुभव रखने वाले लोग मिलकर इस देश को आगे बढ़ाते हैं। लेकिन इन सभी विविधताओं से कहीं अधिक महत्वपूर्ण वह बात है, जो हम सबको एक साथ जोड़ती है।
चाहे हम दुनिया के किसी भी हिस्से से आए हों... हम सभी स्वतंत्रता, अवसर और इस विश्वास से जुड़े हुए हैं कि हर नई पीढ़ी पिछली पीढ़ी से बेहतर भविष्य बना सकती है। आज जब अमेरिका अपनी 250वीं वर्षगांठ मना रहा है, तो मैं इस देश के प्रति अपनी गहरी कृतज्ञता व्यक्त करता हूं।
मैं उस हर अवसर, हर स्वतंत्रता और हर जिम्मेदारी के लिए आभारी हूं, जो मुझे एक अमेरिकी नागरिक के रूप में मिली है।
अमेरिकन ड्रीम केवल एक नारा नहीं है। मैंने उसे अपनी जिंदगी में जीया है। और जब मैं आने वाले अगले 250 वर्षों की ओर देखता हूं, तो मुझे पूरा विश्वास है कि अमेरिका आगे भी दुनिया भर के लोगों को उसी तरह प्रेरित करता रहेगा...जैसे उसने कई वर्ष पहले भारत के एक छोटे से गांव के एक युवा छात्र को प्रेरित किया था।
लेखक सनी रेड्डी वेन स्टेट यूनिवर्सिटी के गवर्नर, मिशिगन रिपब्लिकन पार्टी के सह-अध्यक्ष (को-चेयर), उद्यमी और सामुदायिक नेता हैं।
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