फोटो जर्नलिस्ट रंजीत मणि / Maninder K. Chandhoke
दो साल पहले पेरिस में हुए समर पैरालंपिक्स में भारतीय खिलाड़ियों के शानदार प्रदर्शन के बाद कई लोगों को उम्मीद थी कि भारत विंटर पैरालंपिक्स में भी अपनी ताकत दिखाएगा। लेकिन गर्म क्षेत्र में स्थित भारत ने अभी तक विंटर पैरालंपिक्स में अपना डेब्यू नहीं किया है। हालांकि भारत के दो कश्मीरी खिलाड़ी आरिफ मोहम्मद खान और स्टांजिन लुंडुप विंटर ओलंपिक खेलों में हिस्सा ले चुके हैं, लेकिन वे प्रभावशाली स्थान हासिल नहीं कर पाए।
दिलचस्प बात यह है कि पेरिस में हुए समर पैरालंपिक्स में भारत ने शानदार प्रदर्शन किया था। भारत 29 पदकों के साथ 19वें स्थान पर रहा। इनमें सात स्वर्ण पदक शामिल थे। यह किसी भी ओलंपिक प्रतियोगिता में भारत का अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन था। चीन ने पेरिस में भी शीर्ष स्थान हासिल किया था। उसके पास कुल 221 पदक थे, जिनमें 94 स्वर्ण शामिल थे। एशियाई देशों में भारत तीसरे स्थान पर रहा। जापान 41 पदकों के साथ 11वें स्थान पर रहा, जिनमें 14 स्वर्ण थे। कनाडा 13वें स्थान पर रहा। उसके पास भी भारत जितने 29 पदक थे हालांकि कनाडा के पास भारत से ज्यादा कुल 10 स्वर्ण पदक थे।
वॉलंटियर सौमिक चटर्जी / Maninder K. Chandhokeसमर पैरालंपिक्स का पैमाना काफी बड़ा था। इसमें 170 देशों के 4433 खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया था। कुल 549 स्वर्ण पदक दांव पर थे। वहीं इसके मुकाबले यहां 55 देशों के 611 खिलाड़ी भाग ले रहे हैं और 71 स्वर्ण पदक दांव पर हैं। चल रहे विंटर पैरालंपिक्स में चीन स्पष्ट रूप से शीर्ष पर है। उसके पास कुल 27 पदक हैं, जिनमें 10 स्वर्ण और सात रजत शामिल हैं। वहीं कनाडा के पास 10 पदक हैं, जिनमें एक स्वर्ण और एक रजत शामिल है।
पदक जीतने से ज्यादा महत्वपूर्ण भागीदारी होती है। प्रतियोगिता के मैदानों में भारतीय खिलाड़ी भले ही नहीं हैं, लेकिन दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था भारत के खेल प्रेमी यहां दिखाई दे रहे हैं। भले ही इनकी संख्या बेहद कम है।
बेंगलुरु से आए पत्रकार रंजीत मणि यहां फ्रीलांस रिपोर्टिंग के लिए पहुंचे हैं। यह ओलंपिक या पैरालंपिक्स को कवर करने का उनका पहला अनुभव है और वह इसे लेकर उत्साहित हैं। वह पहाड़ों में स्थित कोरीना और अन्य स्थानों पर जा चुके हैं। उन्होंने सैंटा जूलिया आइस हॉकी एरिना में पैरा आइस हॉकी भी देखी है।
यहां एक अलग भूमिका में मेडिकल वैज्ञानिक सौमिक चटर्जी भी मौजूद हैं। वह एआई मेडिकल इमेजिंग के क्षेत्र में काम करते हैं। वह पहले पांच साल जर्मनी में रहे और तीन साल पहले अपनी गर्लफ्रेंड के साथ इटली चले गए। उनका काम मेडिकल इमेजिंग और जेनेटिक्स से जुड़ा है। सैंटा जूलिया आइस हॉकी मीडिया सेंटर में वॉलंटियर के रूप में काम करना उन्हें अच्छा लग रहा है। यहां दक्षिण एशिया के अन्य देशों से भी कई वॉलंटियर आए हैं। इनमें श्रीलंका, बांग्लादेश और नेपाल के लोग शामिल हैं, क्योंकि इन देशों के भी यहां कोई खिलाड़ी नहीं हैं।
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