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अमेरिका में भारतीय महिला टेक लीडर्स के लिए नेटवर्क क्यों है सबसे बड़ी ताकत? चैत्रा वेदुल्लापल्ली ने बताई वजह

वुमैन इन क्लाउड की सह-संस्थापक चैत्रा वेदुल्लापल्ली ने कहा कि AI के दौर में भारतीय महिला टेक प्रोफेशनल्स के लिए मजबूत नेटवर्क, नेतृत्व और आर्थिक अवसर पहले से ज्यादा जरूरी हैं। उन्होंने प्रवासी महिलाओं, छात्रों और टेक प्रोफेशनल्स को वैश्विक कौशल, समुदाय और सही मार्गदर्शन पर ध्यान देने की सलाह दी।

 चैत्रा वेदुल्लापल्ली चैत्रा वेदुल्लापल्ली / Handout

वुमैन इन क्लाउड की सह-संस्थापक और अध्यक्ष चैत्रा वेदुल्लापल्ली का मानना है कि अमेरिका में भारतीय महिला टेक लीडर्स के लिए मजबूत पेशेवर नेटवर्क बनाना पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गया है। 

आपको बताएं कि वुमैन इन क्लाउड एक वैश्विक समुदाय है जो दुनिया भर में 1.5 लाख से अधिक महिला टेक संस्थापकों, अधिकारियों, पेशेवरों और सामुदायिक नेताओं को जोड़ने और सशक्त बनाने का काम करता है। इस संगठन की स्थापना वॉशिंगटन के इग्नाइट में करेन फैसियो और गैब्रिएला शूस्टर के साथ मिलकर की गई थी।

वेदुल्लापल्ली बताती हैं कि 2019 में वुमैन इन क्लाउड की शुरुआत इसलिए हुई क्योंकि उन्हें एहसास हुआ कि टेक इंडस्ट्री में महिलाओं के सामने सबसे बड़ी चुनौती प्रतिभा, डिग्री, प्रमाणपत्र या अनुभव की कमी नहीं थी। उन्होंने कहा कि असल बाधा आर्थिक अवसरों तक पहुंच थी खासतौर पर ग्राहकों, पूंजी, नेटवर्क और नेतृत्व के अवसरों तक पहुंच।

उनके अनुसार क्लाउड टेक्नोलॉजी के विस्तार के दौर में यह आर्थिक असमानता साफ दिखाई दे रही थी लेकिन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के तेज विकास ने इस अंतर को और बढ़ा दिया है, जिससे कई महिलाओं को नई टेक अर्थव्यवस्था में समान अवसर और भागीदारी नहीं मिल पा रही है।

निजी संघर्ष से शुरू हुई यह यात्रा

वेदुल्लापल्ली के इस मिशन की प्रेरणा उनकी अपनी जीवन यात्रा से जुड़ी है। बेंगलुरु के आरवी कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग करने के बाद वह 1995 में अमेरिका चली गईं। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने बिल गेट्स को Windows 95 लॉन्च करते देखा तभी उन्होंने तय कर लिया था कि वह टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में अपना करियर बनाएंगी।

लेकिन परिवार की देखभाल के लिए कुछ समय तक काम से दूर रहने के बाद जब उन्होंने दोबारा नौकरी की दुनिया में लौटने की कोशिश की, तो उन्हें एक कड़वी सच्चाई का सामना करना पड़ा।

उन्होंने कहा कि एक प्रवासी महिला के रूप में जब मैं दोबारा कार्यक्षेत्र में लौटी तो मैंने खुद महसूस किया कि कितनी जल्दी पहचान और अवसर खत्म हो जाते हैं। अपने पेशेवर जीवन को फिर से शुरू करना मेरे लिए आसान नहीं था। तभी मुझे एहसास हुआ कि मेरी तरह कई प्रतिभाशाली महिलाएं भी इसी संघर्ष से गुजर रही हैं। यही वुमैन इन क्लाउड की शुरुआत की वजह बनी।

नैपकिन पर बना एक विचार, जो वैश्विक आंदोलन बन गया

वेदुल्लापल्ली बताती हैं कि शुरुआत में उनका लक्ष्य महिलाओं के लिए 1 अरब डॉलर के आर्थिक अवसर तैयार करना था।

उन्होंने कहा कि अगर आपको वास्तविक बदलाव लाना है, तो आपको बड़ा सपना देखना होगा। टेक इंडस्ट्री में महिलाओं के लिए 1 अरब डॉलर के आर्थिक अवसर खोलने का विचार उस समय लगभग असंभव माना जाता था।

उन्होंने बताया कि संगठन ने पहले महिला स्टार्टअप संस्थापकों पर ध्यान केंद्रित किया। फिर टेक प्रोफेशनल्स और अब वरिष्ठ नेतृत्व स्तर की महिलाओं के साथ काम किया जा रहा है। आज वुमैन इन क्लाउड के 120 देशों में 1.5 लाख से अधिक सदस्य हैं।

यह संगठन महिलाओं को प्रमाणित कौशल विकसित करने, रोजगार पाने, व्यवसाय बढ़ाने और नेतृत्व क्षमता मजबूत करने में मदद करता है।

वेदुल्लापल्ली के अनुसार संगठन का अंतिम लक्ष्य महिलाओं को क्लाउड और AI युग के लिए आत्मविश्वासी, नेतृत्व के लिए तैयार और आर्थिक रूप से सक्षम बनाना है।

चुनौतियों को अवसर में बदलना

वेदुल्लापल्ली का कहना है कि उनके जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धियां हमेशा किसी बड़ी चुनौती को अवसर में बदलने से आई हैं। अपने करियर के अलावा उन्होंने एक गंभीर स्वास्थ्य संकट का भी सामना किया। इस अनुभव ने उन्हें महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी शोध और जागरूकता की मजबूत समर्थक बना दिया।

उन्होंने कहा कि मेरे जीवन के सबसे महत्वपूर्ण क्षण मेरे व्यक्तिगत संघर्षों से जुड़े हैं। क्योंकि मैंने खुद इन चुनौतियों को जिया है, इसलिए मैं अच्छी तरह समझती हूं कि अवसरों के लिए संघर्ष करना क्या होता है।

उद्यमिता और निवेश की दुनिया में भी पहचान

चैत्रा वेदुल्लापल्ली 4P Co-Sell Go-to-Market (GTM) Method की वास्तुकार भी हैं। यह एक ऐसा फ्रेमवर्क है जो कंपनियों को माइक्रोसॉफ्ट और गूगल जैसी बड़ी टेक कंपनियों के साथ रणनीतिक गो-टू-मार्केट योजना बनाने में मदद करता है। वह एमएक्सडब्लू वेंचर्स में मैनेजिंग जनरल पार्टनर की भूमिका भी निभा रही हैं।

प्रवासी महिलाओं की सबसे बड़ी चुनौती

वेदुल्लापल्ली का मानना है कि अमेरिका आने वाली प्रवासी महिलाओं के सामने सबसे बड़ी चुनौती केवल घर की जिम्मेदारियों से बाहर निकलना नहीं है। बल्कि वास्तविक अवसरों तक पहुंच बनाना है।

उन्होंने कहा कि मैंने ऐसी कई बेहद प्रतिभाशाली महिलाओं को देखा है, जिनके पास शानदार तकनीकी कौशल और उत्कृष्ट शैक्षणिक योग्यता है। इसके बावजूद उन्हें पहचान, स्पांसरशिप, नेतृत्व की भूमिका, ग्राहक हासिल करने और निवेश तक पहुंच बनाने में संघर्ष करना पड़ता है।

AI के दौर में मजबूत नेटवर्क पहले से ज्यादा जरूरी

एक संस्थापक और निवेशक होने के नाते वेदुल्लापल्ली का मानना है कि AI के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल और नौकरियों पर उसके प्रभाव को देखते हुए वुमैन इन क्लाउड जैसे मजबूत नेटवर्क पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गए हैं।

उन्होंने कहा कि इतने बड़े बदलाव के दौर में हमें इंसानों की भूमिका पर ध्यान देना होगा। पिछले एक वर्ष में प्रवासी पृष्ठभूमि वाले उद्यमियों के लिए समय बेहद कठिन रहा है। ऐसे समय में नेताओं को मजबूत नेटवर्क और समुदायों का सहारा लेना चाहिए।

भारतीय छात्रों के लिए सलाह

अमेरिकी आव्रजन नीतियों को लेकर बढ़ती अनिश्चितता के बीच वेदुल्लापल्ली ने विदेश में उच्च शिक्षा की योजना बना रहे भारतीय छात्रों को लंबी अवधि की सोच अपनाने की सलाह दी।

उन्होंने कहा कि अच्छी बात यह है कि प्रतिभा की तलाश अब वैश्विक हो चुकी है। नवाचार का पूरा तंत्र दुनिया भर के कुशल लोगों पर निर्भर करता है। उनके अनुसार भारत में रहने वाले छात्रों और शुरुआती करियर वाले युवाओं के लिए भी अब अवसर पहले की तुलना में अधिक उपलब्ध हैं।

उन्होंने कहा कि प्रतिभाशाली लोग अब किसी एक देश तक सीमित नहीं हैं। वे दुनिया के किसी भी हिस्से से वैश्विक कंपनियों, स्टार्टअप्स और AI इकोसिस्टम के साथ काम कर सकते हैं।

वेदुल्लापल्ली का मानना है कि छात्रों को अपना पूरा भविष्य किसी एक देश से जोड़ने के बजाय वैश्विक स्तर पर उपयोगी कौशल विकसित करने पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि सबसे सफल पेशेवर वे होते हैं, जिनके पास ऐसे कौशल, मजबूत नेटवर्क और आत्मविश्वास होता है, जिन्हें वे दुनिया के किसी भी देश में इस्तेमाल कर सकें। आज भौगोलिक सीमाएं बाधा नहीं, बल्कि अवसर बन चुकी हैं।

मुश्किल समय में नेटवर्क ही सबसे बड़ा सहारा

सिलिकॉन वैली में छंटनी और वीजा संबंधी अनिश्चितताओं का सामना कर रहे भारतीय टेक पेशेवरों के संदर्भ में वेदुल्लापल्ली ने कहा कि मजबूत नेटवर्क कठिन समय में सुरक्षा कवच का काम करता है।

उन्होंने कहा कि अगर आपने मजबूत नेटवर्क नहीं बनाया, तो मुश्किल समय आने पर आप पूरी तरह अकेले पड़ सकते हैं। इसलिए ऐसे समुदायों का हिस्सा बनना और उनमें सक्रिय योगदान देना बेहद जरूरी है।

उन्होंने कहा कि अमेरिका में रहने वाले भारतीय पेशेवरों को अपने स्थानीय और पेशेवर समुदायों के साथ गहराई से जुड़ना चाहिए, सामाजिक भरोसा विकसित करना चाहिए और जरूरत पड़ने पर मदद मांगने में संकोच नहीं करना चाहिए।

उनके शब्दों में जब आप किसी समुदाय में निवेश करते हैं, तो जरूरत पड़ने पर वही लोग आपके साथ खड़े होते हैं।

वीजा धारकों के लिए महत्वपूर्ण सलाह

आव्रजन नियमों की जटिलताओं पर बात करते हुए वेदुल्लापल्ली ने अमेरिका में अस्थायी वीजा पर रह रहे सभी भारतीय छात्रों और पेशेवरों को सलाह दी कि वे अपने विकल्पों को समझने के लिए योग्य इमिग्रेशन वकीलों से कानूनी सलाह जरूर लें।

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