26 अक्टूबर, 2025 को शुरू हुई यह पैदल यात्रा 108 दिनों में पूरी करने की योजना है। / Tapasya Chaubey
आज जब दुनिया चारों तरफ हिंसा, तनाव, युद्ध और अशांति से जूझ रही है ऐसे समय में मुझे बार-बार जेन आध्यात्मिक गुरु, तिक नयात हन्ह के संदेश ध्यान आ रहें हैं। उनका कहना है- शांति और सुलह का अभ्यास मानवीय कार्यों में सबसे महत्वपूर्ण और कलात्मक कार्यों में से एक है।
इसी अभ्यास के प्रयास में और ऐसे समय में शांति तथा प्रेम का संदेश लेकर चल पड़े हैं 24 बौद्ध भिक्षु और उनके साथ आलोक,एक कुत्ता।
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वियतमनामी थेरवादी बौद्ध परंपरा को मानने वाले ये भिक्षु, टेक्सस के फोर्ट वर्थ स्थित, ह्यूंग डाओ विपश्यना भावना केंद्र से मीलों दूर पैदल एक शांति यात्रा पर निकल पड़ते हैं। इस यात्रा का अंतिम पड़ाव 2300 मील वाशिंगटन डी सी है। 26 अक्टूबर, 2025 को शुरू हुई यह पैदल यात्रा 108 दिनों में पूरी करने की योजना है।
विपाशना का मंत्र ही है शांति और धीरज। इसी मंत्र के सहारे ये भिक्षु तमाम प्राकृतिक आपदाओं को झेलते हुए ऐसे चल रहे हैं जैसे धरती को चूम रहे हों। मार्ग में बारिश, धुंध और बर्फ की बाधाओं ने इनकी गति को धीम जरूर किया पर रोक नहीं पायी।
ये भिक्षु शांति और प्रेम का प्रसार करते हुए हजारों लोगों को रास्ते में जोड़ते हुए जा रहे हैं। जो भी सुन रहा है कि वे उनके निकट मार्ग से गुजर रहें हैं, उनके रास्ते में फूल-फल लेकर खड़े हो जा रहे हैं। अनगिनत लोग अपने आसुओं से इनका स्वागत कर रहें हैं। अपने मन की शांति के लिए बस इनके एक स्पर्श मात्र की कल्पना कर रहें हैं।
आज से पांचवें दिन यानी 10 फरवरी, 2026 को यह 'वॉक फॉर पीस' यात्रा डी.सी. में संपन्न होगी।
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