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येल यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर प्रिया शाह मुखोपाध्याय ने जीता MLA पुरस्कार

यह पुरस्कार मुखोपाध्याय के काम की गहरी शोधपूर्ण दृष्टि और इतिहास में आम लेखन के महत्व को मान्यता देता है।

येल यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर भारतवंशी प्रिया शाह / Yale

भारतीय मूल की अमेरिकी शिक्षाविद् और येल यूनिवर्सिटी की असिस्टेंट प्रोफेसर प्रिया शाह मुखोपाध्याय, को मॉडर्न लैंग्वेज एसोसिएशन (MLA) का Aldo and Jeanne Scaglione पुरस्कार दक्षिण एशियाई अध्ययन के क्षेत्र में उनके किताब ‘Required Reading: The Life of Everyday Texts in the British Empire’ (Princeton University Press, 2024) के लिए दिया गया है।

मुखोपाध्याय की यह किताब ब्रिटिश साम्राज्य के दौरान आम लेखन जैसे मैनुअल, याचिकाएं, ऐल्मनाक और पत्रिकाओं के माध्यम से लोगों के सोचने और समझने के तरीके का विश्लेषण करती है। उनकी रिसर्च इस बात पर विशेष ध्यान देती है कि पाठक इन दस्तावेजों के साथ किस तरह संबंध बनाते थे और कैसे रोजमर्रा की उलझन, गंभीरता और कभी-कभी हास्य उनके अनुभव का हिस्सा बनती थी।

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किताब में उन्नीसवीं सदी से लेकर आज तक के सामान्य दस्तावेज जैसे जनगणना, याचिकाएं, सरकारी फॉर्म और अन्य रोजमर्रा की लिखाई पर ध्यान केंद्रित किया गया है, जिनसे दक्षिण एशियाई लोग ब्रिटिश शासन के तहत रोजमर्रा में मिलते थे।

 

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