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इन तीन कलाकारों को यूनाइटेड स्टेट्स आर्टिस्ट्स ने फेलोशिप से किया सम्मानित

इस साल यूएसए फेलोशिप के तहत दुनिया भर के 50 कलाकारों को मान्यता दी गई है

तीन भारतवंशी कलाकार एमी नेझुकुमाथिल, अंजलि श्रीनिवासन और श्योक मिशा। चौधरी / Photo unitedstatesartists.org

भारतीय मूल के तीन कलाकारों को साल 2025 के यूनाइटेड स्टेट्स आर्टिस्ट्स (यूएसए) फेलोशिप से सम्मानित किया गया है। शिकागो के गैर-लाभकारी संगठन यूनाइटेड स्टेट्स आर्टिस्ट्स की तरफ से यह प्रतिष्ठित पुरस्कार विभिन्न क्षेत्रों में असाधारण योगदान देने वाले कलाकारों को प्रदान किए जाते हैं।

इस फेलोशिप के तहत हर विजेता को 50 हजार डॉलर की मदद दी जाती है। इस पर कोई रोक नहीं होती। यूएसए फैलोशिप को संसाधनों और सेवाओं के माध्यम से हर चरण में कलाकारों का सपोर्ट करने के लिए तैयार किया गया है।

इस साल यूएसए फेलोशिप के तहत दुनिया भर के 50 कलाकारों को मान्यता दी गई है। इनमें भारतीय मूल के तीन कलाकार - एमी नेझुकुमाथिल, अंजलि श्रीनिवासन और श्योक मिशा चौधरी शामिल हैं।

एमी नेझुकुमाथिल
एमी नेझुकुमातिल दक्षिण भारतीय मूल की कवि और निबंधकार हैं। उनके न्यूयॉर्क टाइम्स के नेचर संबंधी निबंध अधिक बिकने वाले कलेक्शन हैं। उनके साहित्यिक कार्यों में चार कविता संग्रह हैं। उन्हें कई पुरस्कार मिल चुके हैं जिनमें नेशनल एंडॉमेंट फॉर द आर्ट्स से कविता फैलोशिप, पुशकार्ट पुरस्कार और कविता में गुगेनहाइम फैलोशिप शामिल हैं। इस वक्त वह सिएरा मैगजीन में कविता संपादक हैं। 

अंजलि श्रीनिवासन
भारतीय आर्टिस्ट व डिजाइनर श्रीनिवासन 1996 से भारत में पारंपरिक ग्लास कारीगरों के साथ रचनात्मक सहयोग में जुटी हैं। उनका फोकस सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण के लिए अनुसंधान एवं डिजाइन पर है। उन्होंने अल्फ्रेड विश्वविद्यालय के न्यूयॉर्क स्टेट कॉलेज ऑफ सेरामिक्स से बैचलर ऑफ फाइन आर्ट्स (बीएफए) में डिग्री लेने से पहले नई दिल्ली में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी में एक्सेसरीज डिजाइन की पढ़ाई की थी। बाद में रोड आइलैंड स्कूल ऑफ डिज़ाइन से मास्टर ऑफ फाइन आर्ट्स (एमएफए) किया। ग्लास आर्ट में श्रीनिवासन को कई प्रतिष्ठित पुरस्कार भी मिल चुके हैं। 

श्योक मीशा चौधरी
भारत में जन्मे और ब्रुकलिन में रहने वाले लेखक, निर्देशक व आर्टिस्ट श्योक मीशा चौधरी ने खुद को समकालीन रंगमंच की एक अग्रणी आवाज के रूप में स्थापित किया है। उन्हें ओबी अवार्ड और व्हिटिंग अवार्ड जैसे कई पुरस्कार मिल चुके हैं। उनका पहला नाटक Public Obscenities 2024 के पुलित्जर पुरस्कार के फाइनल तक पहुंचा था। चौधरी दो बार के सनडांस फेलो रहे हैं। उन्होंने लघु फिल्मों की सीरीज विसिट्रा बनाई है। इस वक्त वह अपनी भौतिक विज्ञानी मां के साथ सहयोग कर रहे हैं। 

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