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2025 के स्लोन रिसर्च फेलो की लिस्ट जारी, इन छह भारतीय-अमेरिकियों को मिला सम्मान

पुरस्कार स्वरूप हर फेलो को 75 हजार डॉलर की राशि मिलेगी, जिसका इस्तेमाल वे दो साल तक अपने शोध से संबंधित कार्यों में कर सकते हैं।

 (ऊपर बाएं से) हिमाबिंदु, भविन जे शास्त्री, विक्रम गडगकर; (नीचे बाएं से) दीपक पाठक, मालविका मुरुगन, श्रेया सक्सेना (ऊपर बाएं से) हिमाबिंदु, भविन जे शास्त्री, विक्रम गडगकर; (नीचे बाएं से) दीपक पाठक, मालविका मुरुगन, श्रेया सक्सेना / courtesy photos

अल्फ्रेड पी. स्लोन फाउंडेशन ने साल 2025 के लिए स्लोन रिसर्च फेलो की वार्षिक सूची जारी की है। इसमें छह अर्ली करियर भारतीय-अमेरिकी शोधकर्ताओं को शामिल किया गया है। 

इस साल कुल 126 फेलो चुने गए हैं जो अमेरिका और कनाडा के विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों से हैं। इनमें बड़ी पब्लिक यूनिवर्सिटी, आइवी लीग संस्थान और छोटे लिबरल आर्ट्स कॉलेज के सबसे प्रतिभाशाली वैज्ञानिक शामिल हैं।  

पुरस्कार स्वरूप हर फेलो को 75 हजार डॉलर की राशि मिलेगी, जिसका इस्तेमाल वे दो साल तक अपने शोध से संबंधित कार्यों में कर सकते हैं। यह वार्षिक छात्रवृत्ति 1955 से दी जा रही है।  

इस साल के भारतीय-अमेरिकी फेलो ये हैं:  
हिमा बिंदु लक्कराजु – हार्वर्ड बिजनेस स्कूल में बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन की असिस्टेंट प्रोफेसर और कंप्यूटर साइंस में फैकल्टी एफिलिएट हैं। उन्होंने स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी से पीएचडी और एमएस किया है। उनकी विशेषज्ञता कृत्रिम बुद्धिमत्ता, मशीन लर्निंग और वास्तविक जीवन में उनके प्रयोग में है।  

विक्रम गडगकर – कोलंबिया यूनिवर्सिटी के ज़करमैन माइंड ब्रेन बिहेवियर इंस्टीट्यूट में न्यूरोसाइंस के असिस्टेंट प्रोफेसर हैं। उन्होंने बैंगलोर यूनिवर्सिटी, IISc और कॉर्नेल यूनिवर्सिटी में पढ़ाई की है। उनका शोध कंप्यूटेशनल एंड एक्सपेरिमेंटल न्यूरोसाइंस की मदद से सीखने, निर्णय लेने और अनुकूलन व्यवहार पर केंद्रित है।  

मालविका मुरुगन – एमोरी यूनिवर्सिटी में बायोलॉजी की असिस्टेंट प्रोफेसर मालविका ने वेल्लोर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से बीटेक और ड्यूक यूनिवर्सिटी से पीएचडी की है। उनका शोध सोशल रिकॉग्निशन के न्यूरल मैकेनिजम पर केंद्रित है। इसके लिए वे इमेजिंग, इलेक्ट्रो फिजियोलॉजी और ऑप्टो जेनेटिक्स तकनीकों का उपयोग करती हैं।  

श्रेया सक्सेना – येल यूनिवर्सिटी में बायोमेडिकल इंजीनियरिंग की असिस्टेंट प्रोफेसर और Wu Tsai Institute की कोर मेंबर हैं। उन्होंने EPFL, जॉन्स हॉपकिन्स और MIT में पढ़ाई की है। उनका शोध न्यूरल कंट्रोल, कोऑर्डिनेटेड बिहेवियरऔर क्लोज्ड लूप मोटर कंट्रोल पर केंद्रित है।  

भाविन जे. शास्त्री – कनाडा की क्वीन्स यूनिवर्सिटी में इंजीनियरिंग फिजिक्स के असिस्टेंट प्रोफेसर और वेक्टर इंस्टिट्यूट फॉर एआई में फैकल्टी एफिलिएट हैं। उन्होंने मैकगिल यूनिवर्सिटी से पीएचडी की है। उनकी विशेषज्ञता न्यूरोमॉर्फिक फोटोनिक्स, क्वांटम मशीन लर्निंग और इंटीग्रेटेड फोटोनिक सिस्टम्स में है।  

इनके अलावा दीपक पाठक को भी फेलोशिप प्रदान की गई है। दीपक कार्नेगी मेलन यूनिवर्सिटी में कंप्यूटर साइंस के शोधकर्ता हैं। स्लोन फाउंडेशन की यह पहल वैज्ञानिक इनोवेशन को बढ़ावा देती है और भविष्य की तकनीकों को आकार देने में अहम योगदान देती है। 

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