ADVERTISEMENT

ADVERTISEMENT

संजय विश्वामित्र को मिली तरक्की, UAMS में रेडियोलॉजी विभाग के चेयरमैन बने

UAMS में प्रोफेसर और चीफ ऑफ इमरजेंसी रेडियोलॉजी विश्वामित्र ने संस्थान में क्लिनिकल कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है।

 विश्वामित्र पिछले दो दशकों से रेडियोलॉजी क्षेत्र में सेवाएं दे रहे हैं।  विश्वामित्र पिछले दो दशकों से रेडियोलॉजी क्षेत्र में सेवाएं दे रहे हैं। / Courtesy Image

अर्कांसस यूनिवर्सिटी फॉर मेडिकल साइंसेज (UAMS) के कॉलेज ऑफ मेडिसिन ने संजय विश्वामित्र को रेडियोलॉजी विभाग का नया चेयरमैन नियुक्त किया है। 

विश्वामित्र पिछले दो दशकों से रेडियोलॉजी क्षेत्र में सेवाएं दे रहे हैं। वह पिछले साल अगस्त से अंतरिम चेयरमैन के रूप में कार्यभार संभाल रहे थे। अब उन्हें स्थायी रूप से इस पद पर नियुक्त किया गया है।  

ये भी देखें - पेन स्टेट ने स्टूडेंट्स के चहेते दो भारतवंशी प्रोफेसरों को दिए ये खास अवॉर्ड

UAMS में 2001 से कार्यरत प्रोफेसर और चीफ ऑफ इमरजेंसी रेडियोलॉजी रहे विश्वामित्र ने संस्थान में क्लिनिकल और शैक्षणिक कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है। इस वक्त वह इंडियन एसोसिएशन ऑफ कार्डियक इमेजिंग के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन भी हैं।

कार्डियक इमेजिंग, बॉडी व मस्कुलोस्केलेटल एमआरआई तथा न्यूक्लियर मेडिसिन जैसे क्षेत्रों में उनके योगदान को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया है। उनके नेतृत्व में साल 2023 में UAMS में इमरजेंसी रेडियोलॉजी डिवीजन की स्थापना हुई थी। 

UAMS कॉलेज ऑफ मेडिसिन के डीन और एक्जीक्यूटिव वाइस चांसलर स्टीवन ए. वेबर ने कहा कि पिछले आठ महीनों में विश्वामित्र ने रेडियोलॉजी प्रोग्राम का अच्छा नेतृत्व किया है। 23 साल से अधिक की सेवा के दौरान उन्होंने कार्डियक इमेजिंग, बॉडी एमआरआई और न्यूक्लियर मेडिसिन में गहरी विशेषज्ञता दिखाई है। इमरजेंसी रेडियोलॉजी को मजबूत बनाने में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही है। 

विश्वमित्र ने भारत के प्रतिष्ठित जवाहरलाल इंस्टीट्यूट ऑफ पोस्टग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (JIPMER) से एमबीबीएस किया है। इसके बाद उन्होंने पेंसिल्वेनिया यूनिवर्सिटी और थॉमस जेफरसन यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल जैसे शीर्ष अमेरिकी संस्थानों से रेजिडेंसी और फेलोशिप पूरी की।  

विश्वामित्र रेडियोलॉजी और न्यूरोफिजियोलॉजिकल मॉनिटरिंग दोनों में बोर्ड सर्टिफाइड हैं। उनके 60 से अधिक वैज्ञानिक शोध पत्र प्रकाशित हो चुके हैं। वे रेडियोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ नॉर्थ अमेरिका और इंडियन एसोसिएशन ऑफ कार्डियक इमेजिंग जैसी संस्थाओं में अहम पदों पर कार्य कर चुके हैं। 

Comments

Leave A Comment

Required fields are marked (*).

Related

Talk to us?