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शिवाजी महाराज पर छपे लेख पर बहस, भारतीय-अमेरिकी टिप्पणीकार की चुनौती

लेखिका इंदु विश्वनाथन का तर्क है कि न्यूयॉर्क टाइम्स के हालिया लेख में भारतीय इतिहास में मराठा शासक की भूमिका को गलत तरीके से पेश किया गया है।

 इंदु विश्वनाथन इंदु विश्वनाथन / Indu Viswanathan Website

छत्रपति शिवाजी महाराज की राजनीतिक विरासत पर 'न्यूयॉर्क टाइम्स' के हालिया लेख की भारतीय मूल के कुछ लोगों ने आलोचना की है। इनमें भारतीय-अमेरिकी लेखिका और कमेंटेटर इंदु विश्वनाथन भी शामिल हैं, जिन्होंने अखबार पर भारतीय सार्वजनिक जीवन में इस ऐतिहासिक हस्ती की भूमिका को गलत तरीके से पेश करने का आरोप लगाया है।

31 मई को छपे इस लेख में बताया गया था कि आज की भारतीय राजनीति में शिवाजी महाराज की विरासत का इस्तेमाल कैसे किया जा रहा है। 'भारत के हिंदू दक्षिणपंथियों को मिला एक नया हीरो: 17वीं सदी का योद्धा राजा' शीर्षक वाले इस लेख में कहा गया था कि मराठा शासक हिंदू राष्ट्रवादी समूहों और राजनीतिक नेताओं के लिए एक अहम प्रतीक बन गए हैं।

यह भी पढ़ें: हिंदू अमेरिकी पहचान की पड़ताल करती है इंदु विश्वनाथन की पहली पुस्तक

सोशल मीडिया पर एक लंबी पोस्ट में, विश्वनाथन ने लेख के नजरिए पर सवाल उठाए। उन्होंने तर्क दिया कि शिवाजी महाराज पीढ़ियों से भारत में एक जानी-मानी ऐतिहासिक हस्ती रहे हैं और उन्हें नया हीरो कहना सही नहीं है। उन्होंने लिखा कि शिवाजी को कभी भुलाया ही नहीं गया था।  उन्होंने इस बात की तुलना जॉर्ज वॉशिंगटन को हाल ही में खोजा गया अमेरिकी हीरो बताने से की।

विश्वनाथन ने भारतीय सार्वजनिक जीवन में शिवाजी महाराज की लंबे समय से मौजूदगी की ओर इशारा किया। जैसे स्मारक, शिक्षण संस्थान, सड़कें, ट्रांसपोर्ट हब और सार्वजनिक आयोजन, जो मौजूदा राजनीतिक दौर से पहले से ही मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि लेख ने ऐतिहासिक हस्ती के स्थायी महत्व और उस हस्ती की विरासत पर जोर देने की मौजूदा कोशिशों के बीच के अंतर को धुंधला कर दिया है।

उनकी आलोचना का मुख्य केंद्र मीडिया द्वारा बात को पेश करने का तरीका था। उन्होंने लेख में शिवाजी की मूर्तियों के पूरे भारत में बनने के विवरण पर ध्यान दिलाया और कहा कि इस भाषा का मतलब स्मारकों के भौतिक निर्माण से कहीं आगे जाता है।

विश्वनाथन के अनुसार, मुद्दा यह नहीं था कि नई मूर्तियां और स्मारक बनाए जा रहे हैं या नहीं, बल्कि यह था कि भारत के ऐतिहासिक संदर्भ से अनजान पाठकों के सामने इन घटनाओं को कैसे पेश किया जा रहा है।
 



उनकी टिप्पणियों में भारतीय इतिहास-लेखन से जुड़ी व्यापक बहसों पर भी बात की गई, जिसमें पाठ्यपुस्तकों में बदलाव, औपनिवेशिक दौर में इतिहास की व्याख्या, मुगल शासन का चित्रण और अकादमिक विमर्श में हिंदू राज्यों व प्रतिरोध आंदोलनों का प्रतिनिधित्व जैसे मुद्दे शामिल हैं।

17वीं सदी में मराठा साम्राज्य की स्थापना करने वाले शिवाजी महाराज भारत की सबसे सम्मानित ऐतिहासिक हस्तियों में से एक हैं। खासकर महाराष्ट्र में उन्हें बहुत सम्मान दिया जाता है; उन्हें एक स्वतंत्र राज्य की स्थापना, नौसेना का विकास और अपने समय की बड़ी साम्राज्यवादी ताकतों का मुकाबला करने के लिए याद किया जाता है। दशकों से राजनीतिक और वैचारिक मतभेदों से परे उनकी विरासत का सम्मान किया जाता रहा है।

यह टिप्पणी उस व्यापक चर्चा को दर्शाती है कि अंतरराष्ट्रीय दर्शकों के सामने भारतीय इतिहास को कैसे पेश किया जाता है और पश्चिमी मीडिया संगठन भारत में राष्ट्रीय पहचान, धर्म और ऐतिहासिक स्मृति से जुड़ी बहसों की व्याख्या कैसे करते हैं।

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