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इतिहासकार रिशाद चौधरी को प्रतिष्ठित 'बर्नार्ड एस. कोहन' पुरस्कार

यह पुरस्कार दक्षिण एशिया पर पिछले वर्ष प्रकाशित किसी लेखक की पहली उत्कृष्ट और नवीन अंग्रेजी मोनोग्राफ (शोध-ग्रंथ) को मान्यता देने के लिए प्रदान किया जाता है।

इतिहासकार रिशाद चौधरी / LinkedIn/@Rishad Choudhury

ओबरलिन कॉलेज में एसोसिएट प्रोफेसर और कॉर्नेल यूनिवर्सिटी से पीएचडी (2015) रिशाद चौधरी को उनकी पहली पुस्तक के लिए 'एसोसिएशन फॉर एशियन स्टडीज' द्वारा प्रतिष्ठित बर्नार्ड एस. कोहन पुरस्कार (Bernard S. Cohn Prize) से सम्मानित किया गया है। उन्हें यह पुरस्कार उनकी पुस्तक "Hajj Across Empires: Pilgrimage and Political Cultures After the Mughals, 1739-1857" के लिए दिया गया है।

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यह पुरस्कार दक्षिण एशिया पर पिछले वर्ष प्रकाशित किसी लेखक की पहली उत्कृष्ट और नवीन अंग्रेजी मोनोग्राफ (शोध-ग्रंथ) को मान्यता देने के लिए प्रदान किया जाता है। दक्षिण एशिया और हिंद महासागर के इतिहासकार रिशाद चौधरी ने अपनी इस पहली किताब में यह विस्तार से बताया है कि कैसे दक्षिण एशियाई मुसलमानों ने मुगल साम्राज्य के पतन और ब्रिटिश औपनिवेशिक विस्तार के बीच के दौर में अरब और ऑटोमन (उस्मानी) दुनिया की हज यात्राओं के माध्यम से क्षेत्रीय संबंध बनाए और राजनीतिक बदलावों का सामना किया।



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