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फोर्ब्स की टॉप इमिग्रेंट्स लिस्ट में 26 भारतीय-अमेरिकी, अधिकांश पेशेवर

फोर्ब्स ने देश की 250वीं वर्षगांठ के जश्न के मौके पर यह सूची जारी की।

 (बाएं से, ऊपर) विनोद खोसला, नवल रविकांत, (नीचे) हेमंत तनेजा और सुंदर पिचाई। (बाएं से, ऊपर) विनोद खोसला, नवल रविकांत, (नीचे) हेमंत तनेजा और सुंदर पिचाई। / Forbes

फोर्ब्स ने 10 जून को अपनी पहली FORBES 250 America's Most Successful Immigrants (अमेरिका के सबसे सफल 250 प्रवासी) लिस्ट जारी की है। इसमें उन प्रवासियों को शामिल किया गया है जिन्होंने अमेरिकी बिजनेस, इनोवेशन और समाज को नई दिशा दी है।

फोर्ब्स ने देश की 250वीं सालगिरह के जश्न के तौर पर यह लिस्ट जारी की है। इसमें अमेरिका के 250 सबसे सफल जीवित प्रवासियों को रैंक किया गया है और साथ ही देश पर प्रवासियों के कुल असर को भी देखा गया है।

विनोद खोसला
इस लिस्ट में शामिल होने वाले पहले भारतीय-अमेरिकी, 71 साल के विनोद खोसला 1976 में अमेरिका आए थे। सिलिकॉन वैली के सबसे ताकतवर वेंचर कैपिटलिस्ट में से एक बनने से पहले, उन्होंने 1982 में सन माइक्रोसिस्टम्स (Sun Microsystems) की सह-स्थापना की थी।

नवल रविकांत
इन्वेस्टमेंट प्लेटफॉर्म एंजेललिस्ट (AngelList) के 51 साल के को-फाउंडर रविकांत ने उबर (Uber), ट्विटर (Twitter) और डिलीवरी सर्विस पोस्टमेट्स (Postmates) में शुरुआती निवेश किया था। उबर ने 2020 में पोस्टमेट्स को 2.7 अरब डॉलर में खरीद लिया था।

हेमंत तनेजा
जनरल कैटलिस्ट (General Catalyst) के फाउंडर, 50 साल के तनेजा के इन्वेस्टमेंट पोर्टफोलियो में स्ट्राइप (Stripe), सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म स्नैप (Snap) और डिफेंस फर्म अंडुरिल (Anduril) शामिल हैं।

यह भी पढ़ें: जयश्री उलाल और नीरजा सेठी फोर्ब्स की इस लिस्ट में

संजय मेहरोत्रा
माइक्रोन (Micron) के CEO संजय मेहरोत्रा ​​ने कंप्यूटर मेमोरी की बढ़ती मांग का फायदा उठाते हुए कंपनी को ट्रिलियन-डॉलर वैल्यूएशन तक पहुंचाया। इससे पहले, उन्होंने मेमोरी चिप बनाने वाली बड़ी कंपनी सैनडिस्क (SanDisk) की स्थापना की थी, जिसे 2016 में वेस्टर्न डिजिटल (Western Digital) ने 19 अरब डॉलर में खरीद लिया था। मेहरोत्रा ​​67 साल के हैं।

सुंदर पिचाई
53 साल के पिचाई 2004 में गूगल (Google) से जुड़े और कंपनी के क्रोम ब्राउजर (Chrome browser) के डेवलपमेंट का काम संभाला। इसकी सफलता ने उन्हें 2015 में CEO बनने में मदद की।

अभिजीत बनर्जी
बनर्जी अब्दुल लतीफ जमील पॉवर्टी एक्शन लैब (J-PAL) के को-फाउंडर हैं, जो रैंडमाइज्ड कंट्रोल्ड ट्रायल्स (randomized controlled trials) के जरिए आर्थिक नीतियों को परखती है। उन्हें 2019 में अर्थशास्त्र में नोबेल पुरस्कार मिला था और वे अभी 65 साल के हैं।

पद्मा लक्ष्मी
लक्ष्मी एक अमेरिकी टेलीविजन होस्ट, मॉडल, लेखिका, एंटरप्रेन्योर और एक्टिविस्ट हैं। 55 साल की ये महिला ब्रावो के कुकिंग कॉम्पिटिशन प्रोग्राम "टॉप शेफ" को होस्ट करके मशहूर हुईं। वह 1974 में बचपन में ही अमेरिका आ गई थीं।

सत्या नडेला
2014 में माइक्रोसॉफ्ट की कमान संभालने के बाद से, 58 साल के नडेला ने कंपनी को क्लाउड कंप्यूटिंग और AI की ओर आगे बढ़ाया है और साथ ही एक्टिविजन ब्लिजार्ड और लिंक्डइन के अधिग्रहण में अहम भूमिका निभाई है।

जय चौधरी
चौधरी का जन्म भारत के हिमालय के एक दूर-दराज के गांव में हुआ था और 1980 में 22 साल की उम्र में वे सिनसिनाटी यूनिवर्सिटी में ग्रेजुएट पढ़ाई के लिए अमेरिका चले आए। 67 साल के चौधरी क्लाउड सिक्योरिटी की दिग्गज कंपनी Zscaler के फाउंडर, चेयरमैन और CEO हैं।

रमेश टी. वाधवानी
वाधवानी 78 साल के हैं और 1969 में भारत से अमेरिका चले आए थे। वे अब SymphonyAI के चेयरमैन और SAIGroup के फाउंडर हैं। SAIGroup एक प्राइवेट इक्विटी और सॉफ्टवेयर इन्वेस्टर कंपनी है जिसने दर्जनों टेक कंपनियां बनाई हैं।

कवितार्क राम श्रीराम
69 साल के श्रीराम, गूगल के शुरुआती निवेशकों में से एक हैं, इसके फाउंडिंग बोर्ड मेंबर हैं और शेरपालो वेंचर्स के ज़रिए वेंचर कैपिटलिस्ट का काम करते हैं।

ज्योति बंसल
48 साल की ज्योति एक सीरियल एंटरप्रेन्योर हैं, जो 23 साल की उम्र में यानी साल 2000 में अमेरिका चली गई थीं। वह AppDynamics की फाउंडर हैं, जिसे उन्होंने सिस्को को 3.7 अरब डॉलर में बेचा था, और वह Harness और Traceable की को-फाउंडर भी हैं।

नेहा नार्खेड़े
41 साल की नार्खेड़े ने डेटा स्ट्रीमिंग प्लेटफ़ॉर्म Confluent की को-फाउंडिंग की थी, जिसे मार्च में IBM ने 11 अरब डॉलर में खरीद लिया था।

डेविड पॉल
पॉल 1990 के दशक की शुरुआत में टेम्पल यूनिवर्सिटी से मास्टर्स डिग्री लेने के लिए भारत से अमेरिका गए थे। 59 साल के पॉल, स्पाइन इम्प्लांट और मेडिकल डिवाइस बनाने वाली कंपनी Globus Medical के फाउंडर और एग्जीक्यूटिव चेयरमैन हैं।

जितेंद्र मोहन
52 साल के जितेंद्र IIT बॉम्बे में पढ़ाई करने के बाद स्टैनफोर्ड से MS करने अमेरिका गए थे और वह AI सेमीकंडक्टर नेटवर्किंग फर्म Astera Labs के को-फाउंडर और CEO हैं।

निकेश अरोड़ा
अरोड़ा 1990 के दशक से अमेरिका के टेक सेक्टर में एक्टिव हैं और अभी साइबरसिक्योरिटी कंपनी Palo Alto Networks के चेयरमैन और CEO हैं।

श्याम शंकर
44 साल के शंकर, Palantir Technologies के CTO और EVP हैं। वह कंपनी में शुरुआती कर्मचारियों में से एक (13वें कर्मचारी) के तौर पर शामिल हुए थे और धीरे-धीरे कंपनी में ऊंचे पदों तक पहुंचे।

राज सरदाना
66 साल के सरदाना 1981 में जॉर्जिया टेक से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में मास्टर्स डिग्री लेने अमेरिका गए थे और वह IT सर्विस और स्टाफिंग फर्म Innova Solutions के फाउंडर और CEO हैं।

अमन नारंग
42 साल के नारंग, रेस्टोरेंट POS और मैनेजमेंट प्लेटफॉर्म Toast के को-फाउंडर और CEO हैं। 

अरविंद कृष्णा
64 साल के कृष्णा 1980 के दशक के आखिर में अमेरिका चले एए और 1990 में IBM से जुड़े। वे अभी IBM के चेयरमैन और CEO हैं।

शांतनु नारायण
63 साल के नारायण 1980 के दशक में ग्रेजुएट पढ़ाई के लिए अमेरिका गए थे। उन्होंने बॉलिंग ग्रीन से MS और UC बर्कले से MBA किया है। नारायण अभी Adobe के चेयरमैन और CEO हैं।

के.आर. श्रीधर
65 साल के श्रीधर, क्लीन-एनर्जी फ्यूल सेल कंपनी 'ब्लूम एनर्जी' के फाउंडर और CEO हैं।

प्रेमल शाह
शाह माइक्रोफाइनेंस कंपनी 'कीवा' (Kiva) के को-फाउंडर और प्रेसिडेंट हैं और अब वे इम्पैक्ट इन्वेस्टिंग और परोपकार के कामों से जुड़े हैं।

राकेश गंगवाल
गंगवाल 70 साल के हैं और हायर एजुकेशन के लिए अमेरिका चले गए थे। वह इंडिगो एयरलाइंस के को-फाउंडर और एक इन्वेस्टर भी हैं। उन्होंने US एयरवेज ग्रुप के CEO के तौर पर भी काम किया है।

राजीव जैन
60 साल के राजीव जैन ग्लोबल इन्वेस्टमेंट फर्म GQG पार्टनर्स के फाउंडर हैं, जिसके पास $162 बिलियन से ज़्यादा की एसेट्स (संपत्ति) का मैनेजमेंट है।

इंद्रा नूयी
70 साल की नूयी 1978 में येल से MBA करने के लिए अमेरिका आई थीं। वह पेप्सिको की पूर्व CEO, अमेजन जैसी कंपनियों की बोर्ड मेंबर और एक पब्लिश्ड लेखिका हैं।

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