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कनाडा में दक्षिण एशियाई समुदाय को निशाना बना रहा था कौन? 17 गिरफ्तारियों से खुलासा!

यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब कनाडा संगठित आपराधिक नेटवर्कों के खिलाफ लगातार सख्ती कर रहा है। इनमें भारत में आतंकवादी गतिविधियां चला रहे खालिस्तानी समूह भी शामिल हैं।

 कनाडाई पुलिस ने दक्षिण एशियाई समुदाय को निशाना बनाने वाले एक अंतरराष्ट्रीय आपराधिक गिरोह के 17 सदस्यों को गिरफ्तार किया। कनाडाई पुलिस ने दक्षिण एशियाई समुदाय को निशाना बनाने वाले एक अंतरराष्ट्रीय आपराधिक गिरोह के 17 सदस्यों को गिरफ्तार किया। / x@peelpolice

कनाडा के ओंटारियो प्रांत के पील क्षेत्र की एक्सटॉर्शन टास्क फोर्स ने सोमवार को 17 लोगों की गिरफ्तारी की घोषणा की। इनमें से ज्यादातर का संबंध फोर ब्रदर्स नाम के एक अंतरराष्ट्रीय आपराधिक नेटवर्क से बताया गया है जो पूरे क्षेत्र में दक्षिण एशियाई कारोबारी और समुदाय के लोगों को निशाना बना रहा था। यह नेटवर्क सिर्फ कनाडा ही नहीं, बल्कि अमेरिका में भी सक्रिय था।

यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब कनाडा संगठित आपराधिक नेटवर्कों के खिलाफ लगातार सख्ती कर रहा है। इनमें भारत में आतंकवादी गतिविधियां चला रहे खालिस्तानी समूह भी शामिल हैं। पील रीजनल पुलिस ने कहा कि उसकी एक्सटॉर्शन टास्क फोर्स ने डराने-धमकाने, हिंसा और हमलों के जरिए वसूली करने वाले एक संगठित अभियान को ध्वस्त किया है।

पुलिस के बयान में कहा गया कि यह संगठित आपराधिक नेटवर्क पील क्षेत्र के दक्षिण एशियाई समुदाय पर कई लक्षित हमलों के लिए जिम्मेदार माना जा रहा है। इनके ब्रैम्पटन, मिसिसॉगा, कैलेडन और ब्रिटिश कोलंबिया में सक्रिय होने के साथ कैलिफोर्निया से भी संबंध पाए गए हैं।

बयान के मुताबिक दिसंबर 2025 में एक संयुक्त अभियान शुरू किया गया था जिसमें पील रीजनल पुलिस और ओंटारियो प्रांतीय पुलिस के अलावा कनाडा बॉर्डर सर्विसेज एजेंसी, एफबीआई और कनाडा की फाइनेंशियल ट्रांजैक्शंस एंड रिपोर्ट्स एनालिसिस सेंटर भी शामिल थे।

पुलिस ने बताया कि कई व्यवसायों जैसे रेस्तरां और ट्रकिंग कंपनियों को बार-बार निशाना बनाया गया क्योंकि उन्होंने वसूली की मांग मानने से इनकार कर दिया था। इससे गिरोह की लगातार बढ़ती हिंसक रणनीतियों का पता चलता है। एक मामले में जांचकर्ताओं का आरोप है कि आरोपियों में से दो लोग कैलेडन के एक घर पर गोलीबारी और आगजनी के जिम्मेदार थे। इसके कुछ ही मिनट बाद ब्रैम्पटन में एक व्यवसाय को निशाना बनाकर दूसरी गोलीबारी की गई।

पुलिस ने कहा कि सभी 17 आरोपी कुल 24 घटनाओं से जुड़े हुए हैं। इनमें 16 हिंसक घटनाएं फोर ब्रदर्स नेटवर्क से संबंधित पाई गईं, जिनमें आगजनी और कई गोलीबारी की घटनाएं शामिल हैं। इन घटनाओं में कुल 324 गोलियां चलाई गई थीं। अप्रैल 2026 में जांचकर्ताओं ने कई स्थानों पर छापेमारी की, जिसके बाद 17 लोगों को गिरफ्तार किया गया। इन पर कुल 106 आपराधिक मामले दर्ज किए गए हैं।

पुलिस ने कहा कि पील रीजनल पुलिस द्वारा आरोपित छह लोगों के खिलाफ आपराधिक मामलों के बाद इमिग्रेशन कार्रवाई भी हो सकती है, जिसमें देश से निष्कासन तक शामिल है।

गिरफ्तार आरोपियों में इकबाल सिंह भगरिया (25), आकाशदीप सिंह (24), रविंदर सिंह (25), जसनबीर सिंह (21), दिलावरप्रीत सिंह (26), मनदीप सिंह (21), प्रभदीप सोहल (22), परतापबीर घुमन (22), अजयदीप सिंह (29), नवरूप सिंह (24), राजन सिंह (28), अमृतजोत सिंह (22), जसनप्रीत सिंह (22), गुनित गुनित (27), सुखविंदर सिंह (32), मोहिंदर सिंह (30) और गौतम गौतम (22) शामिल हैं। इनमें ज्यादातर ब्रैम्पटन और ब्रिटिश कोलंबिया से हैं, जबकि एक आरोपी कैलिफोर्निया के मंटेका से है।

जांच के दौरान पुलिस ने छह हथियार, अवैध ड्रग्स, कई मोबाइल फोन, सिम कार्ड और फर्जी पहचान पत्र भी बरामद किए हैं।

पील रीजनल पुलिस प्रमुख निशान दुरैयप्पाह ने कहा कि ये गिरफ्तारियां पील रीजनल पुलिस और हमारे अंतरराष्ट्रीय कानून प्रवर्तन सहयोगियों के संयुक्त प्रयासों का परिणाम हैं। वसूली केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है बल्कि इसका संबंध राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर है। इससे निपटने के लिए मजबूत सीमा-पार सहयोग और एजेंसियों के बीच सूचना साझा करना जरूरी है।

उन्होंने कहा कि दक्षिण एशियाई समुदाय के भीतर इस मामले ने डर और नुकसान पैदा किया है और पुलिस इन अपराधों को रोकने तथा समुदायों को सुरक्षित रखने के लिए प्रतिबद्ध है।

सोमवार को भारत के कनाडा में उच्चायुक्त दिनेश के पटनायक ने IANS को दिए एक विशेष इंटरव्यू में कहा कि कनाडा अब भारत की सुरक्षा चिंताओं को गंभीरता से लेने लगा है और प्रो-खालिस्तानी तत्वों से जुड़े उग्रवादी और आपराधिक नेटवर्कों के खिलाफ कार्रवाई कर रहा है।

पटनायक ने कहा कि हाल के महीनों में भारतीय और कनाडाई सुरक्षा एजेंसियों के बीच सहयोग काफी बेहतर हुआ है। निज्जर विवाद के बाद दोनों देशों के रिश्तों में आई गिरावट के बाद यह बड़ा बदलाव माना जा रहा है।

उन्होंने कहा कि हर क्षेत्र में करीबी सहयोग हो रहा है। उन्होंने बताया कि पहले दोनों देश एक-दूसरे से बात तक नहीं कर रहे थे, लेकिन अब राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों, पुलिस बलों और जांच एजेंसियों के बीच नियमित संवाद हो रहा है।

पटनायक ने कहा कि दोनों देश अब जानकारी साझा कर रहे हैं और संयुक्त अभियान भी चला रहे हैं। हर कोई एक-दूसरे से बात कर रहा है, जानकारी साझा कर रहा है और संयुक्त अभियान चला रहा है ताकि दोनों देश एक-दूसरे के लिए सुरक्षित रहें।

उन्होंने माना कि कनाडा में अभी भी कुछ उग्रवादी समूह मौजूद हैं, लेकिन अब ओटावा इस मुद्दे को सिर्फ भारत की चिंता के नजरिए से नहीं देख रहा।

पटनायक ने कहा कि कनाडा में एक छोटा वर्ग अभी भी चीजों को खराब करने की कोशिश कर रहा है। लेकिन पिछले छह-सात महीनों में हमने, खासकर प्रधानमंत्री कार्नी के सहयोग से, उन्हें फिर से हाशिये पर धकेलने में सफलता पाई है।

उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे कई नेटवर्क अब विचारधारा से ज्यादा संगठित अपराध का हिस्सा बन चुके हैं।

उन्होंने कहा कि वे इससे पैसा कमा रहे हैं। यह विचारधारा से ज्यादा आर्थिक गतिविधि बन चुकी है। उन्होंने इसमें हथियारों की तस्करी, ड्रग्स, मानव तस्करी और वसूली जैसी गतिविधियों का जिक्र किया।

पटनायक ने कहा कि भारत लगातार कनाडा से यह कहता रहा है कि शांतिपूर्ण विरोध और हिंसक उग्रवाद में फर्क किया जाए।

उन्होंने कहा कि हम विरोध से उतने चिंतित नहीं हैं, जितने उस हिंसा से जो ये लोग फैला रहे हैं, सड़कों पर नफरत फैला रहे हैं और प्रचार कर रहे हैं। उन्होंने इन समूहों पर भारत में आतंकवादी गतिविधियां चलाने और वसूली जैसे आपराधिक कामों में शामिल होने का भी आरोप लगाया है। हालांकि पिछले तनावों के बावजूद पटनायक ने कहा कि भारत-कनाडा संबंध अब अच्छी स्थिति में हैं।

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