अमेरिकी इंडो-पैसिफिक कमांड के प्रमुख एडमिरल सैमुअल पापारो जूनियर / Courtesy: X/@INDOPACOM
अमेरिकी इंडो-पैसिफिक कमांड (INDOPACOM) के प्रमुख एडमिरल सैमुअल पापारो जूनियर ने नए साल में दक्षिण कोरिया और अमेरिका से अपनी संयुक्त रक्षा तैयारियों को और मजबूत करने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि ऐसा करना संभावित विरोधियों को यह “स्पष्ट संदेश” देगा कि किसी भी तरह की आक्रामकता की कीमत बेहद भारी होगी।
न्यू ईयर संदेश में एडमिरल पापारो ने यह बात कही। यह संदेश कोरिया-यूएस एलायंस फाउंडेशन (KUSAF) और कोरिया डिफेंस वेटरन्स एसोसिएशन (KDVA) के जरिए जारी किया गया, जिसकी जानकारी योनहाप न्यूज एजेंसी ने दी। उन्होंने कहा कि वॉशिंगटन, सियोल और क्षेत्र के अन्य सहयोगी देशों से अमेरिका की रणनीतिक सीमा मानी जाने वाली ‘फर्स्ट आइलैंड चेन’ की सुरक्षा में योगदान की अपेक्षा की जा रही है, ताकि क्षेत्र में चीन के प्रभाव का संतुलन किया जा सके।
एडमिरल पापारो ने कहा, “हमें एक मजबूत संयुक्त रक्षा ढांचा लगातार तैयार करना होगा, ताकि किसी भी विरोधी को साफ संदेश जाए कि आक्रामक कदमों की कीमत बहुत ज्यादा होगी।”
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उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है, जब चीन ने ताइवान जलडमरूमध्य और उसके आसपास के इलाकों में सेना, नौसेना, वायुसेना और रॉकेट फोर्स की तैनाती की। चीनी सेना ने इसे ‘अलगाववादी ताकतों’ और ‘बाहरी हस्तक्षेप’ के खिलाफ कड़ा संदेश बताया है। इसके जवाब में अमेरिकी विदेश विभाग ने बीजिंग से ताइवान पर सैन्य दबाव बंद करने और “सार्थक संवाद” शुरू करने की अपील की है।
अपने संदेश में पापारो ने यह भी कहा कि 2025 के दौरान दोनों देशों के नेताओं, रक्षा मंत्रियों और शीर्ष सैन्य अधिकारियों के बीच हुई बैठकों के जरिए सियोल और वॉशिंगटन ने अपनी “आयरनक्लैड” यानी अटूट प्रतिबद्धता को दोहराया है। उन्होंने सहयोगियों से “साझा नवाचार के रास्ते” को अपनाने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा, “हमारा साझा दायित्व है कि इस गति को ठोस कार्रवाई में बदला जाए, ताकि कोरियाई प्रायद्वीप और पूरे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।”
इस बीच, अमेरिका फोर्सेज कोरिया (USFK) के कमांडर जनरल जेवियर ब्रंसन ने KUSAF और KDVA जैसे संगठनों का आभार जताया। उन्होंने कहा कि इन्हीं संगठनों की वजह से पिछले सात दशकों से अमेरिका-दक्षिण कोरिया गठबंधन मजबूत बना हुआ है।
ब्रंसन ने कहा, “इन संगठनों के कारण हमारा गठबंधन मजबूत, प्रासंगिक और भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार है।” यह बयान ऐसे समय में सामने आए हैं, जब इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सुरक्षा हालात तेजी से बदल रहे हैं और अमेरिका अपने सहयोगी देशों के साथ रणनीतिक साझेदारी को और गहराई देने पर जोर दे रहा है।
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