अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प / REUTERS/Carlos Barria/File Photo
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की व्यापक टैरिफ नीति को असंवैधानिक करार देते हुए रद्द कर दिया है। कोर्ट ने अपने महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि राष्ट्रपति ने राष्ट्रीय आपातकालीन कानून (IEEPA) का उपयोग कर आयात शुल्क लगाने में अपने अधिकारों का उल्लंघन किया है। इस फैसले का असर न केवल अमेरिकी राजनीति, बल्कि भारत सहित पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।
मुख्य न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स द्वारा लिखे गए इस 6-3 के बहुमत वाले फैसले में स्पष्ट किया गया कि अमेरिकी संविधान के तहत टैक्स और टैरिफ लगाने की शक्ति केवल कांग्रेस (अमेरिकी संसद) के पास है।
कोर्ट ने 1977 के 'इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट' (IEEPA) के तहत लगाए गए शुल्कों को खारिज करते हुए कहा कि राष्ट्रपति को टैरिफ लगाने के लिए संसद से स्पष्ट अनुमति लेनी होगी, जो उनके पास नहीं थी। रॉबर्ट्स ने लिखा, "राष्ट्रपति को टैरिफ लगाने की असाधारण शक्ति को सही ठहराने के लिए संसद के स्पष्ट प्राधिकरण की आवश्यकता है, जो उनके पास नहीं है।"
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$175 अरब से अधिक की वापसी का संकट
ट्रम्प प्रशासन ने इस कानून का उपयोग कर चीन, कनाडा, मैक्सिको और भारत सहित लगभग हर व्यापारिक भागीदार पर भारी शुल्क लगाए थे। अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि अब तक लगभग $175 बिलियन (करीब 14.5 लाख करोड़ रुपये) टैरिफ के रूप में वसूले जा चुके हैं। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद, प्रभावित व्यवसायों को यह पैसा वापस लौटाना पड़ सकता है।
प्रशासन ने अगले दशक में इन टैरिफ से ट्रिलियन डॉलर जुटाने का लक्ष्य रखा था, जो अब खतरे में है।
ट्रम्प का 'गेम टू' प्लान: अन्य कानूनों का सहारा
फैसले के बाद राष्ट्रपति ट्रम्प ने संकेत दिया है कि वह हार नहीं मानेंगे। उन्होंने पहले ही कहा था कि यदि कोर्ट उनके खिलाफ फैसला देता है, तो वह "गेम टू" (Game Two) योजना पर काम करेंगे। ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने संकेत दिया कि सरकार अब अन्य कानूनों का उपयोग करेगी, जैसे कि राष्ट्रीय सुरक्षा (Section 232) और अनुचित व्यापार प्रथाओं के खिलाफ जवाबी कार्रवाई (Section 301)। हालांकि, ये कानून IEEPA जितने लचीले और शक्तिशाली नहीं हैं।
भारत और अन्य देशों पर प्रभाव
ट्रम्प ने भारत द्वारा रूसी तेल खरीदने और कनाडाई ड्रग तस्करी जैसे मुद्दों को 'राष्ट्रीय आपातकाल' बताकर टैरिफ लगाए थे। भारतीय अमेरिकी वकील नील कात्याल ने सुप्रीम कोर्ट में इन टैरिफ के खिलाफ लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कोर्ट के इस आदेश से उन भारतीय निर्यातकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है, जिन पर 'पारस्परिक' (Reciprocal) टैरिफ लगाए गए थे।
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