ADVERTISEMENT

ADVERTISEMENT

अमेरिकी राजदूत गोर ने भारत को बताया वैश्विक रणनीति का केंद्र

एक साक्षात्कार में गोर ने कहा कि ट्रंप, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक सच्चा मित्र मानते हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर / IANS/X/@narendramodi

अमेरिका भारत को अपनी लंबी अवधि की वैश्विक रणनीति के केंद्र में रख रहा है। अमेरिका के भारत में राजदूत सर्जियो गोर ने रक्षा, व्यापार और नई तकनीकों को लेकर बड़े सहयोग की योजना बताई है। उन्होंने कहा कि अमेरिका भारत के साथ अपने रिश्ते को और मजबूत करना चाहता है। उनका लक्ष्य इस रिश्ते को 21वीं सदी की सबसे अहम रणनीतिक साझेदारी बनाना है।

स्पैन मैग्जीन को दिए एक साक्षात्कार में गोर ने कहा कि उनकी काम करने की शैली राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ काम करने के अनुभव से प्रभावित है। उन्होंने कहा कि ट्रंप राजनीति में सबसे ज्यादा मेहनत करने वाले व्यक्ति हैं। वे तेजी से काम करते हैं और नतीजे चाहते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उनका ध्यान आम लोगों के लिए अच्छे और ठोस नतीजे देने पर है। 

गोर ने नेताओं के बीच संबंधों को भी अहम बताया। उन्होंने कहा कि ट्रंप, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक सच्चा मित्र मानते हैं। उनके अनुसार, इससे दोनों देशों के रिश्ते और मजबूत होते हैं। गोर ने कहा कि रक्षा सहयोग इस रिश्ते का सबसे मजबूत आधार है। दोनों देशों के बीच एक बड़ा रक्षा समझौता और 10 साल का नया ढांचा तैयार किया गया है। इसमें रक्षा उत्पादन, विज्ञान, तकनीक और सैन्य सहयोग शामिल है।

उन्होंने मालाबार, टाइगर ट्रायम्फ और कोप इंडिया जैसे संयुक्त सैन्य अभ्यासों का भी जिक्र किया। उनके अनुसार, इससे दोनों देशों की सेनाओं के बीच तालमेल और मजबूत होता है। कूटनीति, सैन्य अभ्यास और रक्षा सौदे ये तीन चीजें इस साझेदारी को मजबूत बनाए रखती हैं।

गोर ने कहा कि मेरा लक्ष्य है कि यह साझेदारी दोनों देशों के आम लोगों को फायदा पहुंचाए। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि अमेरिकी किसान भारत में ज्यादा सामान बेच सकें, ऊर्जा और दवा के क्षेत्र में साझा शोध हो और दोनों देशों की सेनाएं मिलकर काम करें। उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका के रिश्ते लोकतंत्र, आपसी लाभ और सुरक्षा हितों पर आधारित हैं। ये रिश्ते आने वाले समय में दुनिया की दिशा तय करेंगे।

आर्थिक क्षेत्र में भी उन्होंने बड़े अवसरों की बात कही। उन्होंने कहा कि भारत के बुनियादी ढांचे की जरूरतें बढ़ रही हैं और इसमें अमेरिका सहयोग कर सकता है। ऊर्जा, विमानन और आधुनिक निर्माण जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों को फायदा हो सकता है। उन्होंने कहा कि यह दोनों के लिए फायदे की स्थिति है। गोर ने जरूरी आपूर्ति श्रृंखलाओं को सुरक्षित बनाने पर भी जोर दिया।

उन्होंने बताया कि दोनों देश मिलकर चिप, जरूरी खनिज और दवाइयों के क्षेत्र में काम कर रहे हैं। इससे एक ही स्रोत पर निर्भरता कम होगी। कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई भी सहयोग का एक बड़ा क्षेत्र बन रहा है। नई दिल्ली में हुए एक कार्यक्रम का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में भारत और अमेरिका के बीच अपार संभावनाएं हैं। हालांकि उन्होंने चेतावनी दी कि इस तकनीक पर बहुत ज्यादा केंद्रीकृत वैश्विक नियंत्रण नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह तय करने के लिए कोई वैश्विक संस्था नहीं होनी चाहिए कि कौन इस तकनीक का इस्तेमाल कैसे करे।

Comments

Related