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यूके संसद में सिखों पर हो रहे हेट क्राइम पर हुई चर्चा

ऑल पार्टी पार्लियामेंट्री ग्रुप फॉर ब्रिटिश सिख्स के अध्यक्ष अथवाल ने कहा कि नस्लवाद हमारे समाज के लिए एक अभिशाप है। हमें एकजुट होकर इसे रोकना होगा इससे पहले कि और लोग इसकी चपेट में आएं।

यह कार्यक्रम गुरुवार को ब्रिटेन की संसद में आयोजित किया गया, जिसका आयोजन ब्रिटिश सिखों के लिए सर्वदलीय संसदीय समूह (एपीपीजी), सिख नेटवर्क और सिख फेडरेशन यूके द्वारा किया गया। / Jas Athwal

भारतीय मूल के ब्रिटिश सांसद जस अथवाल ने यूके संसद में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान चेतावनी दी कि नस्लवाद और एंटी-सिख नफरत समुदायों को सक्रिय रूप से नष्ट कर रही है। यह कार्यक्रम नफरत, दक्षिणपंथी उग्रवाद और सार्वजनिक नीतियों में सिख समुदाय की अदृश्यता पर केंद्रित था।

यह आयोजन ऑल पार्टी पार्लियामेंट्री ग्रुप फॉर ब्रिटिश सिख्स, द सिख नेटवर्क और सिख फेडरेशन यूके द्वारा किया गया था। इसमें सांसदों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और सामुदायिक नेताओं ने भाग लिया था जिन्होंने दक्षिणपंथी विचारधारा से बढ़ते खतरे और अल्पसंख्यक समुदायों पर उसके प्रभाव पर चर्चा की।

ऑल पार्टी पार्लियामेंट्री ग्रुप फॉर ब्रिटिश सिख्स के अध्यक्ष अथवाल ने कहा कि नस्लवाद में वृद्धि न केवल हमारी ब्रिटिश जीवन शैली के लिए खतरा है बल्कि यह वर्तमान में समुदायों को नष्ट कर रही है और लोगों को मानसिक आघात पहुंचा रही है।

उन्होंने हाल में सिखों पर हुए कई हमलों का जिक्र किया जिनमें वॉल्वरहैम्पटन में दो पुरुषों पर हमला किया गया था। इनमें एक 70 वर्षीय टैक्सी ड्राइवर भी था। दोनों को गंभीर चोटें आईं थीं। इसके अलावा ओल्डबरी और वालसॉल में सिख महिलाओं के साथ यौन हिंसा की घटनाओं का भी उल्लेख किया गया जिनमें अपराधियों ने पीड़िताओं से अपने देश वापस जाओ कहा था।

अथवाल ने कहा कि नस्लवाद हमारे समाज के लिए एक अभिशाप है। हमें एकजुट होकर इसे रोकना होगा इससे पहले कि और लोग इसकी चपेट में आएं।

चर्चा के दौरान वक्ताओं ने चेतावनी दी कि राजनीति और मीडिया में दक्षिणपंथी उग्रवाद तेजी से बढ़ रहा है और असहिष्णुता को सामान्य बनाया जा रहा है। प्रतिभागियों ने 1970 के दशक से लेकर अब तक ब्रिटेन में सिखों के खिलाफ भेदभाव और हिंसा के सात दशकों के इतिहास पर विचार किया। हिंसा अब सड़क पर हमलों की बजाय आज संस्थागत भेदभाव तक के रूप में बदल गई हैं।

द मॉनिटरिंग ग्रुप के संस्थापक सुरेश ग्रोवर ने 1970 के दशक के साउथॉल यूथ मूवमेंट को याद किया, जिसने नस्लीय हमलों और सरकारी उदासीनता के खिलाफ संघर्ष किया था। उन्होंने उस दौर और वर्तमान में बढ़ते दक्षिणपंथी प्रभाव के बीच समानताएं बताईं।

वक्ताओं ने सिखों की सांख्यिकीय अदृश्यता पर भी चिंता जताई और सरकार से बेहतर जातीय निगरानी, डेटा में प्रतिनिधित्व और नीतिगत ढांचे में सिखों की भागीदारी की मांग की। सभा में हाल ही में सिख महिलाओं के खिलाफ हुए नस्लीय रूप से प्रेरित यौन हमलों पर गहरी चिंता व्यक्त की गई और इन मामलों की त्वरित जांच की अपील की गई।

कार्यक्रम के अंत में अथवाल ने कहा कि यह आयोजन सिख समुदाय की एकजुटता और शक्ति की एक सशक्त याद दिलाने वाला था।

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