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ढाका हिंसा के पीछे बांग्लादेशी ऑनलाइन एक्टिविस्टों का ट्रांसनेशनल अभियान: रिपोर्ट

रिपोर्ट में कहा गया है कि कुछ ही घंटों में ढाका स्थित ‘प्रथम आलो’ के दफ्तर के बाहर भीड़ जमा हो गई और इमारत में तोड़फोड़ की गई।

बांग्लादेश में हिंसा की तस्वीर / Credit Image: © Monirul Alam/ZUMAPRESS.com)

एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका और फ्रांस में रह रहे दो बांग्लादेशी ऑनलाइन एक्टिविस्टों द्वारा चलाए गए ट्रांसनेशनल सोशल मीडिया अभियान ने हाल के दिनों में ढाका में प्रमुख मीडिया संस्थानों और सांस्कृतिक संगठनों पर हुए हिंसक हमलों को भड़काया। इस घटना ने सीमा पार ऑनलाइन उकसावे और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के दुरुपयोग के गंभीर खतरे को उजागर किया है।

पत्रकारों और पर्यवेक्षकों का कहना है कि यह बांग्लादेश में उन शुरुआती मामलों में से एक है, जहां सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल सीमा पार बैठकर बड़े पैमाने पर हिंसा संगठित करने के लिए किया गया। इससे प्लेटफॉर्म की जवाबदेही और सरकार की दूर से संचालित, एल्गोरिदम-आधारित भीड़ जुटाने की क्षमता पर लगाम लगाने की क्षमता पर सवाल खड़े हो गए हैं।

‘नॉर्थईस्ट न्यूज’ की रिपोर्ट के मुताबिक, 18 दिसंबर 2025 की रात न्यूयॉर्क के जैक्सन हाइट्स में रहने वाले एक्टिविस्ट और पूर्व पत्रकार एलियास हुसैन ने फेसबुक पर पोस्ट किया, “प्रथम आलो की एक भी ईंट न बचे।” यह पोस्ट हुसैन के 22 लाख से अधिक फॉलोअर्स तक पहुंची, जिसे फेसबुक के वेरिफिकेशन बैज ने और अधिक बढ़ावा दिया। इसके बाद यह संदेश व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम और अन्य फेसबुक पेजों पर तेजी से फैल गया।

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रिपोर्ट में कहा गया है कि कुछ ही घंटों में ढाका स्थित ‘प्रथम आलो’ के दफ्तर के बाहर भीड़ जमा हो गई और इमारत में तोड़फोड़ की गई। इसी दौरान पेरिस में मौजूद उनके सहयोगी पिनाकी भट्टाचार्य के साथ मिलकर ‘द डेली स्टार’ सहित छायानट और उदिची जैसे सांस्कृतिक संस्थानों को भी निशाना बनाने के निर्देश दिए गए। सोशल मीडिया के जरिए संदेशों को रियल टाइम में लाखों लोगों तक पहुंचाया गया, जिससे भीड़ को उकसाया गया।

बीते एक साल में एलियास हुसैन और पिनाकी भट्टाचार्य ने ‘प्रथम आलो’ और ‘द डेली स्टार’ के खिलाफ लगातार अभियान चलाया, यह आरोप लगाते हुए कि ये अखबार भारत की खुफिया एजेंसियों के इशारे पर काम कर रहे हैं और गलत सूचनाएं फैला रहे हैं। इन अभियानों ने अविश्वास का माहौल बनाया और हिंसा को बढ़ावा दिया।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि अक्टूबर और नवंबर 2024 में न्यूज़रूम्स को घेरने और कर्मचारियों को निशाना बनाने की कोशिशें की गई थीं, जिनमें ऑनलाइन भाषा लगातार उग्र होती गई। इसके अलावा, 5 फरवरी 2025 को पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के धनमंडी स्थित पैतृक घर को गिराए जाने की घटना को भी इन्हीं एक्टिविस्टों द्वारा संगठित बताया गया, जिसे हसीना के लाइव फेसबुक संबोधन के समय अंजाम दिया गया।

बूमलाइव की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा गया कि 18 दिसंबर की रात जब न्यूज़रूम्स में आगजनी हो रही थी, तब भीड़ के कुछ हिस्सों ने एलियास हुसैन और पिनाकी भट्टाचार्य के नेतृत्व में नई सरकार बनाने की मांग भी की। रिपोर्ट के अनुसार, दोनों के सरकारी अधिकारियों से सीधे संपर्क थे, जिन्हें वे सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करते रहे, जिससे उनके प्रभाव को वास्तविक दुनिया में भी बल मिला।

गौरतलब है कि अगस्त 2024 में मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के सत्ता में आने के बाद से बांग्लादेश में पत्रकारों पर हमलों, भीड़ संस्कृति के उभार और कानून-व्यवस्था की स्थिति में गिरावट देखने को मिली है।

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