Demo / File Photo: IANS
अमेरिका में H-1B वर्क वीजा से जुड़े नए नियम अगले 10 वर्षों में देश की अर्थव्यवस्था को बड़ा फायदा पहुंचा सकते हैं। अमेरिकी सरकार की निगरानी संस्था गवर्नमेंट अकाउंटेबिलिटी ऑफिस (GAO) के मुताबिक, इस नियम से साल 2026 से 2035 के बीच करीब 20 अरब डॉलर से ज्यादा का आर्थिक लाभ होने की उम्मीद है। हालांकि GAO ने यह भी चेतावनी दी है कि यह नियम शायद कानून में तय समय-सीमा से पहले लागू किया जा रहा है।
GAO की रिपोर्ट के अनुसार, होमलैंड सिक्योरिटी डिपार्टमेंट (DHS) द्वारा बनाया गया नया H-1B चयन नियम करीब 303 मिलियन डॉलर की लागत से लागू होगा। इसके बावजूद विभाग का अनुमान है कि इससे जनता को लगभग 19.78 अरब डॉलर का शुद्ध लाभ मिलेगा। इसके अलावा, 10 साल की अवधि में कुल ट्रांसफर करीब 34.34 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है।
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इस नियम की प्रभावी तारीख 27 फरवरी 2026 तय की गई है, लेकिन जीएओ ने कहा कि यह तारीख अमेरिकी कानून के तहत तय 60 दिनों की अवधि से कम है। अमेरिकी कांग्रेसनल रिव्यू एक्ट के मुताबिक, किसी भी बड़े संघीय नियम को कांग्रेस में पेश किए जाने या प्रकाशित होने के बाद कम से कम 60 दिन का समय दिया जाना चाहिए।
GAO के अनुसार, यह नियम 29 दिसंबर 2025 को कांग्रेस को भेजा गया और उसी दिन फेडरल रजिस्टर में प्रकाशित किया गया। हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स को यह नियम 29 दिसंबर को, जबकि सीनेट को 5 जनवरी 2026 को मिला। इसी वजह से समय-सीमा को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। GAO ने अपनी रिपोर्ट इस हफ्ते सीनेट और हाउस की ज्यूडिशियरी कमेटी के नेताओं को भेजी है, जो इमिग्रेशन नीति और डीएचएस की निगरानी करती हैं।
नियम के तहत अब H-1B वीजा के लिए आवेदन करने वालों का चयन एक 'वेटेड सिस्टम' से होगा। डीएचएस का कहना है कि इस नई प्रक्रिया में ज्यादा कुशल और ज्यादा वेतन पाने वाले विदेशी कर्मचारियों को प्राथमिकता मिलेगी।
विभाग ने यह भी साफ किया है कि सभी वेतन स्तरों पर H-1B कर्मचारियों को रखने की सुविधा बनी रहेगी। उनका लक्ष्य इस कार्यक्रम को कांग्रेस की मंशा के अनुसार और बेहतर बनाना है।
जीएओ ने यह भी बताया कि इस नियम का छोटे व्यवसायों पर बड़ा आर्थिक असर पड़ेगा। इसी वजह से डीएचएस ने एक विशेष नियामक विश्लेषण तैयार किया है। विभाग ने यह भी कहा कि इस नियम के तहत कोई ऐसा संघीय आदेश नहीं है जिससे अलग से कानूनी बयान की जरूरत पड़े।
H-1B वीजा अमेरिका में कुशल विदेशी पेशेवरों के लिए काम करने का मुख्य रास्ता है। इसका सबसे ज्यादा इस्तेमाल भारतीय नागरिक करते हैं, खासकर टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और हेल्थकेयर क्षेत्रों में। इसलिए इस नियम में बदलाव को भारत और अमेरिका में काम कर रहे या नौकरी की तैयारी कर रहे भारतीयों के बीच काफी ध्यान से देखा जा रहा है।
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