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पाकिस्तान के शैक्षणिक संस्थानों में यौन उत्पीड़न गंभीर समस्या

पाकिस्तान के प्रमुख दैनिक द एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, शिकायत दर्ज कराने वाले कई छात्र-छात्राओं को संरक्षण मिलने के बजाय दबाव, धमकी और संस्थागत चुप्पी का सामना करना पड़ता है।

पाकिस्तान के शैक्षणिक संस्थान / Xinhua/Jamil Ahmed

पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में शैक्षणिक संस्थानों में यौन उत्पीड़न की समस्या लगातार गंभीर बनी हुई है। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कई पीड़ितों का आरोप है कि संस्थानों में गठित आंतरिक जांच समितियां उन्हें न्याय दिलाने में विफल साबित हो रही हैं।

पाकिस्तान के प्रमुख दैनिक द एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, शिकायत दर्ज कराने वाले कई छात्र-छात्राओं को संरक्षण मिलने के बजाय दबाव, धमकी और संस्थागत चुप्पी का सामना करना पड़ता है। इस वजह से कई पीड़ित या तो अपनी शिकायत वापस लेने को मजबूर हो जाते हैं या अपने भविष्य को बचाने के लिए चुप रहना ही बेहतर समझते हैं। हाल के वर्षों में कॉलेजों और विश्वविद्यालयों से उत्पीड़न के कई मामले सामने आए हैं, लेकिन पीड़ितों का कहना है कि उन्हें सुरक्षा देने के लिए बनाई गई व्यवस्था लगभग पूरी तरह विफल हो चुकी है।

अपनी पहचान गोपनीय रखने की शर्त पर एक छात्रा ने द एक्सप्रेस ट्रिब्यून को बताया कि उसने अपने ही शिक्षक के खिलाफ यौन उत्पीड़न की शिकायत दर्ज कराई थी। पीड़िता ने कहा, “मैंने सभी नियमों का पालन किया और लिखित शिकायत दी, लेकिन मदद मिलने के बजाय विभाग और उत्पीड़न समिति के सदस्यों की ओर से मुझ पर दबाव बनाया गया। दबाव इतना ज्यादा था कि आखिरकार मुझे अपनी शिकायत वापस लेनी पड़ी।”

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खैबर पख्तूनख्वा में महिलाओं के कार्यस्थल पर उत्पीड़न से संरक्षण अधिनियम, 2010 लागू है, जिसे राष्ट्रीय विधानसभा द्वारा पारित किया गया था। इस कानून के तहत प्रत्येक संस्थान में एक उत्पीड़न समिति गठित करना अनिवार्य है, जो निष्पक्ष रूप से शिकायतों की सुनवाई कर दोनों पक्षों को सुनने के बाद न्याय सुनिश्चित करे। हालांकि, शैक्षणिक संस्थानों से लगातार सामने आ रहे मामलों से साफ है कि कानून का प्रभावी क्रियान्वयन अब भी कमजोर है।

प्रभावित छात्रों का आरोप है कि उत्पीड़न समितियां अक्सर प्रभावशाली फैकल्टी सदस्यों का पक्ष लेती हैं, जिससे पीड़ित पूरी तरह अकेले पड़ जाते हैं। कई मामलों में शैक्षणिक संस्थानों में उत्पीड़न की शिकायतों के बाद पीड़ितों को गंभीर मानसिक तनाव का सामना करना पड़ा है और कुछ छात्रों द्वारा आत्महत्या किए जाने की भी रिपोर्ट सामने आई है। सामाजिक बदनामी का डर, पारिवारिक दबाव और शैक्षणिक भविष्य को लेकर चिंता के चलते अधिकांश पीड़ित चुप्पी साधने को मजबूर हो जाते हैं।

खैबर पख्तूनख्वा के लोकपाल (ओम्बड्सपर्सन) कार्यालय के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024 में प्रांत में उत्पीड़न की 169 शिकायतें दर्ज की गईं। वहीं, संघीय लोकपाल (महिला) द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई 2023 से जून 2024 के बीच पूरे पाकिस्तान में कुल 823 उत्पीड़न के मामले सामने आए। इनमें से 219-219 मामले पंजाब और इस्लामाबाद से, 28 खैबर पख्तूनख्वा से, 69 सिंध से और सात मामले बलूचिस्तान से रिपोर्ट किए गए।

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