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रूसी तेल पर अमेरिकी बिल से भारत-अमेरिका रिश्तों को नुकसान का खतरा: अशोक मागो

इस कानून के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति को यह अधिकार होगा कि वे उन देशों से आयात होने वाले सामान और सेवाओं पर कम से कम 500 प्रतिशत तक शुल्क लगा सकें

 भारतीय अमेरिकी रिपब्लिकन अशोक मागो भारतीय अमेरिकी रिपब्लिकन अशोक मागो / Facebook

प्रख्यात रिपब्लिकन नेता और भारतीय-अमेरिकी कारोबारी अशोक मागो ने चेतावनी दी है कि रूस से तेल आयात करने वाले देशों को निशाना बनाने वाला प्रस्तावित अमेरिकी कानून भारत-अमेरिका संबंधों को नुकसान पहुंचा सकता है। उन्होंने कहा कि इस कानून का समय और इसका दायरा दोनों ही ऐसे हैं, जो नई दिल्ली और वॉशिंगटन के बीच चल रही व्यापार और टैरिफ वार्ताओं को कमजोर कर सकते हैं।

आईएएनएस से बातचीत में यूएस-इंडिया चैंबर ऑफ कॉमर्स (पूर्व में ग्रेटर डलास इंडो-अमेरिकन चैंबर) के संस्थापक चेयरमैन अशोक मागो ने कहा, “जब दिल्ली और वॉशिंगटन के बीच टैरिफ को लेकर बातचीत चल रही है, तब ऐसा कदम उठाना बिल्कुल भी मददगार नहीं है।” उन्होंने रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम द्वारा पेश किए जा रहे रूस प्रतिबंध विधेयक में प्रस्तावित 500 प्रतिशत तक टैरिफ को “अच्छा विचार नहीं” बताया।

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ट्रम्प का समर्थन मिलने का दावा
सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने हाल ही में कहा था कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इस द्विदलीय विधेयक को हरी झंडी दे दी है। ग्राहम के अनुसार, “यह बिल राष्ट्रपति ट्रम्प को उन देशों को दंडित करने की शक्ति देगा, जो सस्ता रूसी तेल खरीदकर पुतिन की युद्ध मशीन को ईंधन दे रहे हैं।” ग्राहम ने साफ तौर पर भारत, चीन और ब्राज़ील जैसे देशों का नाम लेते हुए कहा कि यह कानून उन्हें रूसी तेल खरीदने से रोकने के लिए दबाव बनाएगा।

 

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