ऐश्वर्या श्रीनिवासन / Instagram/ Aishwarya Srinivasan
भारतीय मूल की उद्यमी और एआई शिक्षिका ऐश्वर्या श्रीनिवासन ने कहा है कि अमेरिका में प्रवास केवल करियर का फैसला नहीं था, बल्कि पूरी जिंदगी को नए सिरे से खड़ा करने की एक लंबी और चुनौतीपूर्ण यात्रा थी।
हाल ही में इंस्टाग्राम पर साझा किए गए एक पोस्ट में उन्होंने प्रवासी जीवन की चुनौतियों और अकेलेपन के बारे में खुलकर बात की। उन्होंने लिखा कि प्रवास के साथ एक अलग तरह का अकेलापन भी आता है। आप सिर्फ देश नहीं बदलते, बल्कि अपनी पूरी जिंदगी को नए सिरे से बनाते हैं। आपको घर, नौकरी, वीजा, दोस्ती, स्वास्थ्य सेवाएं, टैक्स, पहचान, अपनापन और ऐसी सैकड़ों छोटी-बड़ी चीजों को समझना पड़ता है, जिनके लिए कोई पहले से तैयार नहीं करता।
भारत छोड़े हुए आठ साल से अधिक समय बाद श्रीनिवासन ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि प्रवासी जीवन अनिश्चितताओं, संघर्ष और आत्मविश्वास से भरा होता है। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने उन्हें पेशेवर अवसर तो दिए, लेकिन इसके साथ नई संस्कृति और नए माहौल में लगातार खुद को ढालना भी पड़ा।
उन्होंने लिखा कि प्रवासी होना बहुत कुछ सिखाता है। यह आपको उन कमरों में भी आत्मविश्वास के साथ प्रवेश करना सिखाता है, जहां कोई आपकी कहानी नहीं जानता, फिर भी आपको विश्वास रखना होता है कि आप वहां रहने के हकदार हैं।
ऐश्वर्या ने अमेरिका में अपने करियर की शुरुआत डेटा साइंस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस विशेषज्ञ के रूप में की थी। बाद में उन्होंने उद्यमिता, स्टार्टअप सलाह, एआई शिक्षा और कंटेंट क्रिएशन के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई।
उन्होंने कहा कि लंबी और कठिन इमिग्रेशन प्रक्रिया ने कई बार उनके धैर्य, मानसिक मजबूती और आत्मविश्वास की परीक्षा ली। इसके बाद एक बेहद कठिन इमिग्रेशन प्रक्रिया आई, जिसने मेरे धैर्य, मजबूती और खुद पर विश्वास को कई बार चुनौती दी।
श्रीनिवासन का कहना है कि अमेरिका में काम करने के अनुभव ने उन्हें अपनी कीमत समझने और बड़े सपने देखने का साहस दिया। अमेरिका ने मुझे सिखाया कि मैं अपनी मेहनत की सही कीमत मांगूं, गलत लगने वाली बातों पर आवाज उठाऊं और दूसरों को सहज रखने के लिए अपने सपनों को छोटा न करूं।
उन्होंने उन आलोचनाओं का भी जवाब दिया, जिनका सामना विदेश में रहने वाले भारतीयों को अक्सर करना पड़ता है। उन्होंने लिखा कि कुछ लोग कहते हैं कि मुझे भारत लौटकर देश की अर्थव्यवस्था में योगदान देना चाहिए था या परिवार के साथ रहना चाहिए था। लेकिन वे यह नहीं समझते कि भौगोलिक दूरी यह तय नहीं करती कि आप अपने परिवार से कितना प्यार करते हैं या अपने देश के प्रति कितने समर्पित हैं।
उनका मानना है कि विदेश में अवसरों की तलाश करना अपनी जड़ों से दूरी बनाना नहीं है।
उन्होंने कहा कि आप अपने देश से प्यार कर सकते हैं और फिर भी किसी दूसरे देश में अपनी जिंदगी बना सकते हैं। आप बेहतर अवसरों की तलाश कर सकते हैं, बिना अपनी जड़ों को छोड़े।
तमिलनाडु के वेल्लोर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (VIT) से पढ़ाई करने के बाद ऐश्वर्या ने कोलंबिया यूनिवर्सिटी से मास्टर डिग्री हासिल की। उन्होंने आईबीएम और गूगल जैसी कंपनियों में भी काम किया है।
उन्होंने शोध परियोजनाओं, ओपन-सोर्स मशीन लर्निंग पहलों और डेटा साइंस तथा एआई क्षेत्र में आने वाले युवाओं के मार्गदर्शन में भी योगदान दिया है।
अपने सफर को याद करते हुए उन्होंने कहा कि अमेरिका जाना उनके लिए भारत को छोड़ना नहीं था। उन्होंने कहा कि मेरे लिए यहां आना घर को पीछे छोड़ना नहीं था। यह खुद पर भरोसा करने का फैसला था, ऐसी जगह पर जहां मुझे हर अवसर अपनी मेहनत से हासिल करना था। और इसके लिए मैं कभी माफी नहीं मांगूंगी।
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