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भारतवंशी महिला को EEOC केस में महत्वपूर्ण गवाही पेश करने की अनुमति

यह मामला Equal Employment Opportunity Commission (EEOC) यानी अमेरिका की रोजगार भेदभाव रोकथाम एजेंसी के खिलाफ चल रहा है।

प्रतीकात्मक तस्वीर / pexels

एक अमेरिकी संघीय अदालत ने भारतीय मूल की अमेरिकी नागरिक उमा आर. कंदन को उनके सेक्स-डिस्क्रिमिनेशन (लैंगिक भेदभाव) केस में महत्वपूर्ण गवाही और सबूत पेश करने की अनुमति दे दी है। यह मामला Equal Employment Opportunity Commission (EEOC)—यानी अमेरिका की रोजगार भेदभाव रोकथाम एजेंसी के खिलाफ चल रहा है।

क्या है मामला?
कंदन ने EEOC पर आरोप लगाया है कि ह्यूस्टन डिस्ट्रिक्ट डायरेक्टर रेफोर्ड इर्विन ने न्यू ऑरलियन्स फील्ड ऑफिस में फील्ड डायरेक्टर पद के लिए उनके बजाय पुरुष उम्मीदवार माइकल किर्कलैंड को चुना। कंदन का कहना है कि यह फैसला सेक्स-डिस्क्रिमिनेशन पर आधारित था। पहले उन्होंने नस्लीय और राष्ट्रीय मूल (रेस और नेशनल ओरिजिन) भेदभाव के आरोप भी लगाए थे, लेकिन बाद में ये दावे वापस ले लिए। अब मुकदमा केवल लैंगिक भेदभाव तक सीमित है।

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कौन-सा सबूत पेश कर सकेंगी कंदन?
कोर्ट ने EEOC की अटॉर्नी जेनिफर ऑर्टिज प्रैदर की गवाही स्वीकार की, जिसमें कहा गया कि इर्विन महिला कर्मचारियों को पुरुषों की तुलना में अधिक नीचा दिखाते, डराते और तंग करते थे, मैनेजरों को खासकर महिलाओं के खिलाफ खड़ा करते थे, कंदन के एक्सेंट का मजाक उड़ाते थे और उनके भारत में परिवार से मिलने जाने पर ली गई छुट्टी की आलोचना करते थे।

 

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