दिलीप संघानी, अध्यक्ष, इफको / New India Abroad
इंडियन फार्मर्स फर्टिलाइजर कोऑपरेटिव लिमिटेड (इफको) के अध्यक्ष दिलीप संघाणी का कहना है कि भारत और अमेरिका के बीच कृषि, नवाचार और सहकारिता क्षेत्र में सहयोग को और मजबूत करने की अपार संभावनाएं हैं। हाल ही में उन्होंने एक प्रतिनिधिमंडल के साथ अमेरिका का दौरा किया जहां कृषि व्यापार, तकनीक, टिकाऊ खेती और किसान-केंद्रित संस्थाओं के साथ साझेदारी के अवसरों पर चर्चा की गई। इस यात्रा का उद्देश्य वैश्विक अनुभवों और नई संभावनाओं को भारतीय किसानों तक पहुंचाना था।
अमेरिका यात्रा का मुख्य उद्देश्य क्या था?
दिलीप संघाणी ने बताया कि इस यात्रा का प्रमुख उद्देश्य भारत और अमेरिका के बीच सहकारिता, कृषि व्यापार, नवाचार, टिकाऊ कृषि और संस्थागत साझेदारी को मजबूत करना था। उन्होंने कहा कि प्रतिनिधिमंडल ने अमेरिका की प्रमुख सहकारी संस्थाओं, नीति-निर्माताओं, विश्वविद्यालयों और उद्योग संगठनों के साथ बैठकें कीं ताकि ऐसे सहयोग के अवसर तलाशे जा सकें जिनसे दोनों देशों के किसानों और ग्रामीण समुदायों को लाभ मिले।
यात्रा की सबसे बड़ी उपलब्धि क्या रही?
संघाणी के अनुसार इस यात्रा की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि अमेरिकी सहकारी मॉडल, कृषि आपूर्ति श्रृंखला, किसान-केंद्रित संस्थाओं और वैश्विक बाजार व्यवस्था को करीब से समझना रही। उन्होंने कहा कि कई अमेरिकी संस्थाओं ने भारत के सहकारी क्षेत्र के साथ मिलकर काम करने में गहरी रुचि दिखाई।
भारतीय किसानों को क्या लाभ मिलेगा?
संघाणी ने कहा कि उनका उद्देश्य वैश्विक स्तर की सर्वोत्तम कृषि पद्धतियां, उन्नत तकनीक, मूल्य संवर्धन के अवसर, निर्यात संबंध और आधुनिक आपूर्ति श्रृंखला प्रणालियां भारतीय किसानों तक पहुंचाना है। उनके अनुसार ऐसे सहयोग से किसानों की आय बढ़ेगी, उत्पादकता में सुधार होगा और भारतीय कृषि वैश्विक स्तर पर अधिक प्रतिस्पर्धी बनेगी।
भारत अमेरिकी सहकारी मॉडल से क्या सीख सकता है?
संघाणी ने कहा कि अमेरिकी सहकारी संस्थाएं पेशेवर प्रबंधन, सदस्य सहभागिता, तकनीकी नवाचार और बाजार आधारित संचालन पर विशेष जोर देती हैं। उन्होंने कहा कि भारत के पास पहले से ही मजबूत सहकारी ढांचा मौजूद है। यदि इसमें उन्नत तकनीक और वैश्विक बाजार तक बेहतर पहुंच जोड़ी जाए तो भारतीय सहकारी संस्थाएं और अधिक प्रभावशाली बन सकती हैं।
इस यात्रा में इफको की क्या भूमिका रही?
संघाणी ने कहा कि इफको हमेशा किसानों के कल्याण को प्राथमिकता देता है। उन्होंने बताया कि इस यात्रा के दौरान इफको ने वैश्विक अनुभवों को समझने, सहयोग के अवसरों की पहचान करने और ऐसी नई तकनीकी एवं व्यावसायिक संभावनाओं की तलाश करने पर ध्यान दिया, जो भारतीय किसानों और सहकारी क्षेत्र के लिए लाभकारी हों।
भारत-अमेरिका कृषि व्यापार में नए अवसर दिखते हैं?
संघाणी ने कहा कि कृषि प्रसंस्करण, खाद्य उत्पादों, कृषि तकनीक, अनुसंधान सहयोग, आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन और मूल्यवर्धित कृषि उत्पादों में बड़ी संभावनाएं मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देशों की ताकतें एक-दूसरे की पूरक हैं और भविष्य की साझेदारी के लिए मजबूत आधार तैयार करती हैं।
जलवायु परिवर्तन और टिकाऊ कृषि पर क्या चर्चा हुई?
संघाणी ने बताया कि जलवायु-अनुकूल कृषि, संसाधनों का कुशल उपयोग, मिट्टी का स्वास्थ्य, जल संरक्षण और टिकाऊ खेती चर्चा के प्रमुख विषय रहे। उन्होंने कहा कि जलवायु चुनौतियों के बीच दीर्घकालिक कृषि उत्पादकता और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ये विषय बेहद महत्वपूर्ण हैं।
क्या इस यात्रा से औपचारिक समझौते होने की संभावना है?
संघाणी ने कहा कि यह यात्रा मुख्य रूप से संबंध मजबूत करने और साझा रुचि के क्षेत्रों की पहचान करने पर केंद्रित थी। उन्होंने बताया कि कई सकारात्मक चर्चाएं हुई हैं और उन्हें उम्मीद है कि भविष्य में ये संवाद सार्थक साझेदारियों और संयुक्त परियोजनाओं में बदलेंगे।
भारत में सहकारिता आंदोलन का भविष्य कैसा है?
संघाणी का मानना है कि भारत का सहकारिता आंदोलन दुनिया के सबसे बड़े आंदोलनों में से एक है। उन्होंने कहा कि सरकार के निरंतर समर्थन, तकनीकी नवाचार, युवाओं की भागीदारी और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के साथ इसका भविष्य बेहद उज्ज्वल है और यह ग्रामीण विकास तथा आर्थिक प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
यात्रा के बाद आपका संदेश क्या है?
दिलीप संघाणी ने कहा कि सहकारिता केवल एक आर्थिक मॉडल नहीं है, बल्कि सामाजिक और सामूहिक विकास का एक शक्तिशाली माध्यम है। उन्होंने कहा कि यह यात्रा भारत-अमेरिका संबंधों को और मजबूत करने तथा किसानों और सहकारी संस्थाओं के लिए नए अवसर पैदा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
संघाणी ने जोर देकर कहा कि उनका लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि वैश्विक ज्ञान, नवाचार और अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों का लाभ सीधे किसानों, ग्रामीण समुदायों और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचे।
ADVERTISEMENT
ADVERTISEMENT
Comments
Start the conversation
Become a member of New India Abroad to start commenting.
Sign Up Now
Already have an account? Login