भारत के पूर्व विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला / Courtesy photo
वेनेजुएला के खिलाफ अमेरिका की कार्रवाई के बाद से दुनिया में पेट्रो डॉलर और तेल व्यापार को लेकर बहस छिड़ गई है। इसके साथ ही इस मुद्दे को लेकर चिंता भी उजागर हो रही है कि आखिर दुनिया में तेल के व्यापार पर क्या असर पड़ेगा। इस संबंध में पूर्व विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला ने अपनी जानकारी साझा की और बताया कि वेनेजुएला के साथ तेल व्यापार का क्या असर पड़ेगा।
पूर्व विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला ने कहा कि भारत ने वेनेजुएला में लगभग छह बिलियन डॉलर निवेश किए थे; वेनेजुएला का क्रूड इंडिया में आयात किया जा रहा था। अमेरिका के प्रतिबंध की वजह से, यह जारी नहीं रह सका। इसलिए भारत, ओएनजीसी और भारतीय कंपनियों की वेनेजुएला में दिलचस्पी है।
उन्होंने आगे कहा, "यह कैसे काम करेगा? हमारी कंपनियों और हमारे इंटरेस्ट के लिए क्या विकल्प है? उस पर भी हमें ध्यान से देखना होगा। लेकिन यह साफ है कि वेनेजुएला बड़े तेल उत्पादक के नजरिए से एक जरूरी देश है, जिसके पास दुनिया में सबसे बड़ा तेल रिजर्व है, सऊदी अरब से भी ज्यादा। तो हम उस कनेक्शन को फिर से कैसे बना सकते हैं और बैन हटने का इंतजार कैसे कर सकते हैं, सही हालात बनने का इंतजार कैसे कर सकते हैं, यह हमें देखना होगा।"
बता दें, ब्रोकरेज रिपोर्ट में कहा गया है कि वेनेजुएला में सत्ता परिवर्तन के कारण भारत की सरकारी तेल कंपनी ओएनजीसी को बकाया 500 मिलियन डॉलर मिलने की संभावना है।
ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म जेफरीज ने कहा कि अमेरिकी हमले के बाद वेनेजुएला की बदलती स्थिति के कारण वेनेजुएला ऑयल प्रोजेक्ट में अटका ओएनजीसी का 500 मिलियन डॉलर का बकाया डिविडेंड मिल सकता है।
जानकारों का कहना है कि वेनेजुएला की तेल इंडस्ट्री पर अमेरिकी नियंत्रण के बाद वेनेजुएलियन क्रूड निर्यात पर प्रतिबंध हट सकता है। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वेनेजुएला के तेल निर्यात पर लगे प्रतिबंध जारी रहेंगे और अगर भविष्य में कोई छूट दी जाती है तो वैश्विक बाजारों में कच्चे तेल की आपूर्ति बढ़ जाएगी और इससे कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बढ़ेगा।
रिपोर्ट में बताया गया कि यदि स्थिति में सुधार होता है तो ओएनजीसी को लाभ हो सकता है, क्योंकि कंपनी को सैन क्रिस्टोबल परियोजना से 2014 तक की अवधि के लिए लगभग 500 मिलियन डॉलर का बकाया डिविडेंड प्राप्त होना है। हालांकि, 2014 के बाद इस क्षेत्र में उत्पादन बंद हो गया, जिसके परिणामस्वरूप बाद के वर्षों में कोई डिविडेंड प्राप्त नहीं हुआ।
ओएनजीसी की अपनी विदेशी इकाई ओएनजीसी विदेश लिमिटेड (ओवीएल) के माध्यम से वेनेजुएला के तेल क्षेत्र में हिस्सेदारी है। कंपनी वेनेजुएला में सैन क्रिस्टोबल परियोजना में 40 प्रतिशत हिस्सेदारी रखती है। इसके अलावा, ओवीएल, इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन और ऑयल इंडिया के साथ मिलकर काराबोबो 1 तेल क्षेत्र में 11 प्रतिशत हिस्सेदारी रखती है।
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