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भारत के विदेशी धन प्रवाह में आ सकती है बाधा, जानें किसने जताई यह आशंका

भारत को 2024-25 में लगभग 134 अरब डॉलर का धन प्राप्त हुआ, जिससे यह विश्व स्तर पर सबसे बड़े धन प्राप्तकर्ताओं में से एक बन गया।

सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन / IANS/Qamar Sibtain

भारत के मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन का कहनाहै कि खाड़ी क्षेत्र में आर्थिक व्यवधान जारी रहने की स्थिति में भारत में आने वाले धन पर दबाव पड़ सकता है, जिससे अनुमानित तौर पर 10 अरब डॉलर तक का नुकसान हो सकता है। यूएस-इंडिया इकोनॉमिक फोरम 2026 को संबोधित करते हुए नागेश्वरन ने प्रमुख मेजबान देशों में भू-राजनीतिक तनाव और आर्थिक मंदी के कारण धन प्रवाह की संवेदनशीलता पर प्रकाश डाला।

भारत को 2024-25 में लगभग 134 अरब डॉलर का धन प्राप्त हुआ, जिससे यह विश्व स्तर पर सबसे बड़े धन प्राप्तकर्ताओं में से एक बन गया। इसमें से लगभग आधा हिस्सा खाड़ी क्षेत्र में रहने वाले भारतीय कामगारों से आया था। उन्होंने कहा कि सामान्य आर्थिक गतिविधियों को बहाल होने में समय लगेगा इसलिए खाड़ी क्षेत्र में काम करने वाले कामगारों द्वारा भेजी जाने वाली रकम पर इसका कुछ असर पड़ना स्वाभाविक है।

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उन्होंने अनुमान लगाया कि व्यवधान की अवधि और गंभीरता के आधार पर संभावित प्रभाव 5 अरब डॉलर से 10 अरब डॉलर तक हो सकता है। नागेश्वरन ने कहा कि जोखिम कई कारकों से उत्पन्न होते हैं, जिनमें संघर्ष के कारण कामगारों की वापसी, मेजबान देशों में धीमी आर्थिक गतिविधि और रोजगार की स्थिति को लेकर अनिश्चितता शामिल हैं।

खाड़ी क्षेत्र भारतीय प्रवासी कामगारों के लिए एक प्रमुख गंतव्य बना हुआ है, विशेष रूप से निर्माण, सेवा और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में। लंबे समय तक व्यवधान से आय कम हो सकती है और कामगारों की नौकरी पर वापसी में देरी हो सकती है।

यह चिंता व्यापार, ऊर्जा बाजारों और पूंजी प्रवाह को प्रभावित करने वाली व्यापक वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच सामने आई है। नागेश्वरन ने प्रेषण को उन चार प्रमुख माध्यमों में से एक बताया जिनके द्वारा बाहरी झटके भारत की अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकते हैं।

उन्होंने कहा कि जोखिमों के बावजूद, भारत का बाहरी क्षेत्र मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार और विविध आवक प्रवाहों के कारण लचीला बना हुआ है। उन्होंने कहा कि हम एक बहुत ही ठोस व्यापक आर्थिक आधार के साथ इस स्थिति में प्रवेश कर रहे हैं।

भारत में विश्व की सबसे बड़ी प्रवासी आबादी है, जिसमें लाखों श्रमिक विदेशों में कार्यरत हैं। खाड़ी सहयोग परिषद के देशों का इस कार्यबल में महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो इस क्षेत्र को भारत के प्रेषण प्रवाह के लिए महत्वपूर्ण बनाता है।

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