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प्रवासी समुदाय का प्रभाव

AI समिट ने विशेष रूप से यह दिखाया कि डायस्पोरा नेटवर्क किस तरह भारत के तेजी से बढ़ते स्टार्टअप ईकोसिस्टम को अमेरिका की तकनीकी विशेषज्ञता के साथ जोड़ सकते हैं।

बेंगलुरु में इंडियास्पोरा का सम्मेलन / Shinjini Ghosh

मार्च 2026 में बेंगलुरु में आयोजित इंडियास्पोरा फोरम और इंडियास्पोरा ग्लोबल AI समिट ने इस बात को रेखांकित किया है कि भारत की विकास गाथा में भारतीय डायस्पोरा (प्रवासी भारतीय) को समझने के तरीके में एक निर्णायक बदलाव आया है। 'भारत और उसका डायस्पोरा: प्रगति में भागीदार' नामक रिपोर्ट का मुख्य निष्कर्ष स्पष्ट है: 200 से अधिक देशों में फैली 3.5 करोड़ लोगों की यह विशाल वैश्विक बिरादरी, जिसकी अनुमानित वार्षिक आय 730 अरब डॉलर है, अब केवल अपने द्वारा भेजे जाने वाले पैसों (remittances) से ही नहीं, बल्कि अपनी पूंजी, क्षमता और विश्वसनीयता से पहचानी जाती है। और अब वे भारत के 2047 के लक्ष्यों को पूरा करने में योगदान दे रहे हैं।

इस बदलाव का भारत-अमेरिका संबंधों पर सीधा असर पड़ता है। जैसा कि सम्मेलन के भागीदारों ने बताया कि टेक्नोलॉजी, शिक्षा, नीति-निर्माण और व्यापार जगत में भारतीय मूल के नेता भरोसेमंद सेतु का काम करते हैं, जिससे AI, नवाचार और उद्यमिता के क्षेत्रों में आपसी सहयोग को बढ़ावा मिलता है। AI समिट ने विशेष रूप से यह दिखाया कि डायस्पोरा नेटवर्क किस तरह भारत के तेजी से बढ़ते स्टार्टअप ईकोसिस्टम को अमेरिका की तकनीकी विशेषज्ञता के साथ जोड़ सकते हैं। समिट में प्रस्तुत आंकड़ों से पता चला कि भारत के शीर्ष AI स्टार्टअप्स ने 3.6 अरब डॉलर से अधिक की पूंजी जुटाई है, लगभग 59.6 करोड़ डॉलर का राजस्व अर्जित किया है, और लगभग 20,000 रोजगार के अवसर पैदा किए हैं। ये आंकड़े इस क्षेत्र में मौजूद अवसरों की विशालता को और भी पुख्ता करते हैं।

यह भी पढ़ें: इंडियास्पोरा रिपोर्ट: भारत के 2047 के लक्ष्य और प्रवासी भारतीयों की भूमिका

फिर भी, इन चर्चाओं में आलोचनात्मक पहलुओं को भी नजरअंदाज नहीं किया गया। एक बार-बार उठने वाली चिंता भारत में योजनाओं के क्रियान्वयन (execution) से जुड़ी थी: नीति-क्रियान्वयन, वित्तपोषण (funding) की व्यवस्था और संस्थागत समन्वय में मौजूद कमियों के कारण प्रगति की गति धीमी बनी हुई है। जब तक इन कमियों को दूर नहीं किया जाता, तब तक डायस्पोरा का उत्साह पूरी तरह से दीर्घकालिक साझेदारियों में तब्दील नहीं हो पाएगा।

इसके अलावा, कुछ बाहरी दबाव भी मौजूद हैं। अमेरिका की आव्रजन (immigration) नीतियों से जुड़ी चर्चाओं में आ रहे बदलाव और वैश्विक स्तर पर प्रतिभाओं को आकर्षित करने की होड़ का असर उस आवाजाही (mobility) पर पड़ सकता है, जिसने लंबे समय से दोनों देशों के आपसी संबंधों को मजबूती प्रदान की है। 'ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स' पर आयोजित सत्रों में इस बात का जिक्र किया गया कि ये केंद्र अब केवल लागत-बचत पर केंद्रित परिचालन इकाइयों से आगे बढ़कर नवाचार के केंद्रों (innovation hubs) में तब्दील हो रहे हैं। साथ ही, यह चेतावनी भी दी गई कि AI-जनित व्यवधानों (disruptions) की गति इस बदलाव की गति से कहीं अधिक तेज हो सकती है।

बेंगलुरु से निकला व्यापक संदेश अत्यंत व्यावहारिक और यथार्थवादी था। भारतीय डायस्पोरा भारत-अमेरिका संबंधों के सबसे मज़बूत स्तंभों में से एक बना रहेगा, परंतु दोनों ही पक्षों को संरचनात्मक और भू-राजनीतिक चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना करना होगा। आपसी सद्भावना को दीर्घकालिक और ठोस परिणामों में बदलने के लिए नीतियों के निरंतर और प्रभावी क्रियान्वयन, संस्थागत स्तर पर गहरे भरोसे, और समावेशी विकास के प्रति दोनों पक्षों की साझा प्रतिबद्धता की आवश्यकता होगी।

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