गिदोन सार / IANS
इजरायल के विदेश मंत्री गिदोन सार ने दुनिया भर में बसे भारतीय संस्कृति से जुड़े एक समूह के साथ ऑनलाइन बैठक की। इस गहन विमर्श को उन्होंने भारत और इजरायल के मजबूत होते रिश्ते से जोड़ा।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर उन्होंने इस बैठक का ब्योरा दिया। बताया कि इस चर्चा में एक उच्चस्तरीय संवाद में सकारात्मक रुझानों पर जोर दिया गया। विश्व भर के 'हिंदी लीडर्स' समूह को संबोधित करते हुए सार ने कहा कि दोनों देशों के बीच रणनीतिक, सुरक्षा और तकनीकी सहयोग तेजी से नई ऊंचाइयों को छू रहे हैं।
इस दौरान भारत-इजरायल संबंधों को “अत्यंत अहम” बताते हुए कहा गया कि यह साझेदारी केवल कूटनीतिक दायरे तक सीमित नहीं है, बल्कि रक्षा, कृषि, साइबर सुरक्षा और नवाचार जैसे क्षेत्रों में भी गहराई से विस्तारित हो चुकी है। सार ने इस सहयोग को भविष्य की वैश्विक स्थिरता के लिए भी महत्वपूर्ण बताया।
कार्यक्रम में पिछले ढाई वर्षों से इजरायल द्वारा “रेडिकल इस्लाम” के खिलाफ चलाए गए अभियान का भी उल्लेख किया गया। इजरायली विदेश मंत्री ने कहा कि इस संघर्ष में इजरायल ने विभिन्न मोर्चों पर अपनी रणनीतिक बढ़त साबित की है और उसने क्षेत्र में सक्रिय उग्रवादी नेटवर्क को काफी हद तक कमजोर किया है। इस संदर्भ में ईरान के नेतृत्व में सक्रिय तत्वों का भी जिक्र किया गया, जिन पर क्षेत्रीय अस्थिरता को बढ़ावा देने का आरोप लगाया गया।
वक्ता के अनुसार, इस संघर्ष का प्रभाव केवल मध्य पूर्व तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके दूरगामी वैश्विक परिणाम देखने को मिल सकते हैं। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए यह आवश्यक है कि वह आतंकवाद और उग्रवाद के खिलाफ एकजुट रुख अपनाए।
इस अवसर पर भारत द्वारा हमास को आतंकवादी संगठन घोषित किए जाने के महत्व को भी रेखांकित किया गया। सार ने दावा किया कि लश्कर-ए-तैयबा समेत अन्य उग्रवादी संगठनों से भी हमास के संबंध रहे हैं।
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