सांकेतिक तस्वीर / IANS
नई दिल्ली में जर्मन दूतावास ने मंगलवार को घोषणा की कि भारतीय नागरिकों को अब जर्मन एयरपोर्ट पर लेओवर के साथ दूसरे देश की यात्रा करते समय ट्रांजिट वीजा की जरूरत नहीं होगी। किसी यात्रा के दौरान अंतिम गंतव्य तक पहुंचने से पहले बीच में एक स्थान पर अस्थायी ठहराव को लेओवर कहते हैं।
नई दिल्ली में जर्मन दूतावास ने कहा, “भारतीय नागरिकों के लिए तथाकथित एयरपोर्ट ट्रांजिट वीजा की जरूरत को हटाने की घोषणा फेडरल लॉ गैजेट (बुंडेसगेसेट्ज़ब्लाट) में 2 जून को की गई थी और यह 3 जून से लागू होगा।”
संघीय गणराज्य के सार्वजानिक राजपत्र में कहा गया, “यह इस साल जनवरी में जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज की भारत यात्रा का नतीजा है। यह जर्मन-भारतीय संबंधों को गहरा करने, लोगों की आवाजाही को आसान बनाने और आर्थिक संबंधों को और मजबूत करने के लिए फेडरल सरकार की प्रतिबद्धता को दिखाता है।”
इस दौरे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जर्मन चांसलर मर्ज ने आपसी व्यापार और निवेश में लगातार बढ़ोतरी का स्वागत किया था और कहा कि 2024 में दोनों देशों के बीच व्यापार रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गया और यह अच्छा व्यापार 2025 तक जारी रहेगा।
भारत और जर्मनी ने व्यापार, तकनीक, स्वास्थ्य और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्र में कई समझौतों पर हस्ताक्षर किए थे। विदेश मंत्रालय के मुताबिक दोनों पक्षों ने 19 समझौते किए और रणनीतिक, आर्थिक और लोगों के बीच आपसी सहयोग को गहरा करने के मकसद से कई नीति की घोषणाएं कीं।
दोनों नेताओं ने भारत-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर (आईएमईसी) के लिए अपने मजबूत समर्थन को फिर से सुनिश्चि किया और वैश्विक कॉमर्स, कनेक्टिविटी और खुशहाली को नया आकार देने और बढ़ावा देने में इसकी बदलाव लाने की क्षमता पर जोर दिया। दोनों नेताओं ने इस पहल को आगे बढ़ाने के लिए ठोस कदम उठाने के लिए पहली आईएमईसी मंत्रिस्तरीय मीटिंग का भी इंतजार किया।
नेताओं द्वारा जारी एक संयुक्त बयान में बताया गया, "नेताओं ने एक रक्षा औद्योगिक सहयोग रोडमैप बनाने के लिए संयुक्त आशय की घोषणा पर हस्ताक्षर करने का स्वागत किया। इससे लंबे समय तक औद्योगिक स्तर पर सहयोग को बढ़ावा मिलेगा, जिसमें तकनीकी साझेदारी, रक्षा प्लेटफॉर्म और इक्विपमेंट का सहविकसित और सहउत्पादन शामिल है। भारत ने रक्षा उपकरणों के एक्सपोर्ट को जल्दी क्लियरेंस देने के लिए जर्मनी की कोशिशों का स्वागत किया।"
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