ADVERTISEMENT

ADVERTISEMENT

कोहना के रटगर्स कार्यक्रम में हिंदू धर्म, पहचान और पक्षपात पर चर्चा

डिमिस्टिफाइंग हिंदुइज्म: क्लैरिटी थ्रू स्कॉलरशिप (Demystifying Hinduism: Clarity Through Scholarship) शीर्षक वाला यह सेमिनार कोहना और उसके युवा विंग CYAN (कोहना यूथ एक्शन नेटवर्क) के रटगर्स चैप्टर द्वारा आयोजित किया गया।

 CYAN के रटगर्स सेमिनार में उपस्थित लोग CYAN के रटगर्स सेमिनार में उपस्थित लोग / CoHNA

कोएलिशन ऑफ हिंदूज ऑफ नॉर्थ अमेरिका यानी CoHNA ने 20 अप्रैल को रटगर्स विश्वविद्यालय में हिंदू धर्म पर एक सेमिनार आयोजित किया। इस कार्यक्रम में 75 से अधिक छात्र, शोधकर्ता, शिक्षक और सामुदायिक सदस्य शामिल हुए। डिमिस्टिफाइंग हिंदुइज्म: क्लैरिटी थ्रू स्कॉलरशिप शीर्षक वाला यह सेमिनार कोहना और उसके युवा विंग CYAN (कोहना यूथ एक्शन नेटवर्क) के रटगर्स चैप्टर द्वारा आयोजित किया गया।

इसमें रटगर्स हिंदू स्टूडेंट्स काउंसिल (HSC) और विश्वविद्यालय की हिंदू चैपलेंसी ने भी साझेदारी की। आयोजकों ने कहा कि इस सम्मेलन में ऐसे प्रतिष्ठित विद्वान शामिल हुए जिनका काम जीवंत परंपरा और गंभीर अकादमिक अध्ययन के बीच स्थित है। सेमिनार में नील देसाई का भी एक विशेष सत्र हुआ। वे एक हाई स्कूल इतिहास शिक्षक हैं। उन्होंने शैक्षणिक संस्थानों में वर्षों से बढ़ते और बने हुए हिंदू-विरोधी माहौल पर बात की। कार्यक्रम में शॉनी स्टेट यूनिवर्सिटी की भारतीय इतिहास और धर्मों की प्रोफेसर डॉ. लावण्या वेम्सानी का भी सत्र हुआ।

उन्होंने बताया कि सावित्री, द्रौपदी और कुंती जैसी प्रमुख हिंदू महिलाओं को अकादमिक किताबों, मीडिया और लोकप्रिय संस्कृति में गलत तरीके से पेश किया गया है और उनका यौन वस्तुकरण किया गया है। एलिजाबेथटाउन कॉलेज में भारतीय दर्शन के प्रोफेसर डॉ. जेफरी डी. लॉन्ग ने पश्चिमी संस्कृति पर हिंदू दर्शन के गहरे प्रभाव को समझाया।

उन्होंने बताया कि अमेरिका के संस्थापक नेताओं से लेकर जॉर्ज हैरिसन, स्टार वॉर्स और जूलिया रॉबर्ट्स जैसे नामों तक हिंदू विचारों का असर देखा जा सकता है। कार्यक्रम का समापन छात्रों द्वारा संचालित एक पैनल चर्चा के साथ हुआ। इसमें ऐतिहासिक शोध, हिंदू धर्म की पाठ्य प्रस्तुति और परिसर में हिंदू छात्रों को प्रभावित करने वाले मुद्दों पर चर्चा हुई।

इन मुद्दों में जाति से जुड़े पूर्वाग्रह, नास्तिकता, हिंदू धर्म में बहुलता, स्त्री-विरोध और मासिक धर्म जैसे विषय शामिल थे। CYAN रटगर्स के अध्यक्ष और बायोमेडिकल इंजीनियरिंग के अंतिम वर्ष के छात्र ध्येय राय ने कार्यक्रम के बारे में कहा कि प्रेरणादायक प्रस्तुतियां, सीधे सवाल, ऊर्जावान पैनल चर्चा, भोजन और मेरे साथी छात्रों का उत्साह इन सबने इस दिन को यादगार बना दिया।

उन्होंने अपने अनुभव को साझा करते हुए कहा कि मैं पैनल के वक्ताओं और प्रतिभागियों के उत्साह से बहुत प्रेरित होकर लौटा। मुझे अपने धर्म को समझने और जीवन के महत्वपूर्ण सवालों में उसका मार्गदर्शन लेने के बारे में बहुत स्पष्टता मिली, खासकर अब जब मैं स्नातक होने जा रहा हूं।

रटगर्स के हिंदू चैपलिन हितेश त्रिवेदी ने भी इसी तरह की बात कही। उन्होंने कहा कि रटगर्स में सियान का यह कार्यक्रम सीधे तौर पर हमारे युवा सदस्यों की मांग का जवाब था। उन्होंने आगे कहा कि अकादमिक दुनिया में बढ़ते हिंदू-विरोध के बीच अब यह आम हो गया है कि गैर-हिंदू लोग हिंदू धर्म पर चर्चा की दिशा तय करते हैं। इसका परिणाम यह होता है कि संस्थागत शैक्षणिक माहौल में हिंदू परंपराओं को व्यवस्थित रूप से गलत, हल्का या शत्रुतापूर्ण तरीके से प्रस्तुत किया जाता है।

कोएलिशन ऑफ हिंदूज ऑफ नॉर्थ अमेरिका यानी CoHNA ने 20 अप्रैल को रटगर्स विश्वविद्यालय में हिंदू धर्म पर एक सेमिनार आयोजित किया। इस कार्यक्रम में 75 से अधिक छात्र, शोधकर्ता, शिक्षक और सामुदायिक सदस्य शामिल हुए। डिमिस्टिफाइंग हिंदुइज्म: क्लैरिटी थ्रू स्कॉलरशिप शीर्षक वाला यह सेमिनार कोहना और उसके युवा विंग CYAN (कोहना यूथ एक्शन नेटवर्क) के रटगर्स चैप्टर द्वारा आयोजित किया गया।

इसमें रटगर्स हिंदू स्टूडेंट्स काउंसिल (HSC) और विश्वविद्यालय की हिंदू चैपलेंसी ने भी साझेदारी की। आयोजकों ने कहा कि इस सम्मेलन में ऐसे प्रतिष्ठित विद्वान शामिल हुए जिनका काम जीवंत परंपरा और गंभीर अकादमिक अध्ययन के बीच स्थित है। सेमिनार में नील देसाई का भी एक विशेष सत्र हुआ। वे एक हाई स्कूल इतिहास शिक्षक हैं। उन्होंने शैक्षणिक संस्थानों में वर्षों से बढ़ते और बने हुए हिंदू-विरोधी माहौल पर बात की। कार्यक्रम में शॉनी स्टेट यूनिवर्सिटी की भारतीय इतिहास और धर्मों की प्रोफेसर डॉ. लावण्या वेम्सानी का भी सत्र हुआ।

उन्होंने बताया कि सावित्री, द्रौपदी और कुंती जैसी प्रमुख हिंदू महिलाओं को अकादमिक किताबों, मीडिया और लोकप्रिय संस्कृति में गलत तरीके से पेश किया गया है और उनका यौन वस्तुकरण किया गया है। एलिजाबेथटाउन कॉलेज में भारतीय दर्शन के प्रोफेसर डॉ. जेफरी डी. लॉन्ग ने पश्चिमी संस्कृति पर हिंदू दर्शन के गहरे प्रभाव को समझाया।

उन्होंने बताया कि अमेरिका के संस्थापक नेताओं से लेकर जॉर्ज हैरिसन, स्टार वॉर्स और जूलिया रॉबर्ट्स जैसे नामों तक हिंदू विचारों का असर देखा जा सकता है। कार्यक्रम का समापन छात्रों द्वारा संचालित एक पैनल चर्चा के साथ हुआ। इसमें ऐतिहासिक शोध, हिंदू धर्म की पाठ्य प्रस्तुति और परिसर में हिंदू छात्रों को प्रभावित करने वाले मुद्दों पर चर्चा हुई।

इन मुद्दों में जाति से जुड़े पूर्वाग्रह, नास्तिकता, हिंदू धर्म में बहुलता, स्त्री-विरोध और मासिक धर्म जैसे विषय शामिल थे। CYAN रटगर्स के अध्यक्ष और बायोमेडिकल इंजीनियरिंग के अंतिम वर्ष के छात्र ध्येय राय ने कार्यक्रम के बारे में कहा कि प्रेरणादायक प्रस्तुतियां, सीधे सवाल, ऊर्जावान पैनल चर्चा, भोजन और मेरे साथी छात्रों का उत्साह इन सबने इस दिन को यादगार बना दिया।

उन्होंने अपने अनुभव को साझा करते हुए कहा कि मैं पैनल के वक्ताओं और प्रतिभागियों के उत्साह से बहुत प्रेरित होकर लौटा। मुझे अपने धर्म को समझने और जीवन के महत्वपूर्ण सवालों में उसका मार्गदर्शन लेने के बारे में बहुत स्पष्टता मिली, खासकर अब जब मैं स्नातक होने जा रहा हूं।

रटगर्स के हिंदू चैपलिन हितेश त्रिवेदी ने भी इसी तरह की बात कही। उन्होंने कहा कि रटगर्स में सियान का यह कार्यक्रम सीधे तौर पर हमारे युवा सदस्यों की मांग का जवाब था। उन्होंने आगे कहा कि अकादमिक दुनिया में बढ़ते हिंदू-विरोध के बीच अब यह आम हो गया है कि गैर-हिंदू लोग हिंदू धर्म पर चर्चा की दिशा तय करते हैं। इसका परिणाम यह होता है कि संस्थागत शैक्षणिक माहौल में हिंदू परंपराओं को व्यवस्थित रूप से गलत, हल्का या शत्रुतापूर्ण तरीके से प्रस्तुत किया जाता है।

कोएलिशन ऑफ हिंदूज ऑफ नॉर्थ अमेरिका यानी CoHNA ने 20 अप्रैल को रटगर्स विश्वविद्यालय में हिंदू धर्म पर एक सेमिनार आयोजित किया। इस कार्यक्रम में 75 से अधिक छात्र, शोधकर्ता, शिक्षक और सामुदायिक सदस्य शामिल हुए। डिमिस्टिफाइंग हिंदुइज्म: क्लैरिटी थ्रू स्कॉलरशिप शीर्षक वाला यह सेमिनार कोहना और उसके युवा विंग CYAN (कोहना यूथ एक्शन नेटवर्क) के रटगर्स चैप्टर द्वारा आयोजित किया गया।

इसमें रटगर्स हिंदू स्टूडेंट्स काउंसिल (HSC) और विश्वविद्यालय की हिंदू चैपलेंसी ने भी साझेदारी की। आयोजकों ने कहा कि इस सम्मेलन में ऐसे प्रतिष्ठित विद्वान शामिल हुए जिनका काम जीवंत परंपरा और गंभीर अकादमिक अध्ययन के बीच स्थित है। सेमिनार में नील देसाई का भी एक विशेष सत्र हुआ। वे एक हाई स्कूल इतिहास शिक्षक हैं। उन्होंने शैक्षणिक संस्थानों में वर्षों से बढ़ते और बने हुए हिंदू-विरोधी माहौल पर बात की। कार्यक्रम में शॉनी स्टेट यूनिवर्सिटी की भारतीय इतिहास और धर्मों की प्रोफेसर डॉ. लावण्या वेम्सानी का भी सत्र हुआ।

उन्होंने बताया कि सावित्री, द्रौपदी और कुंती जैसी प्रमुख हिंदू महिलाओं को अकादमिक किताबों, मीडिया और लोकप्रिय संस्कृति में गलत तरीके से पेश किया गया है और उनका यौन वस्तुकरण किया गया है। एलिजाबेथटाउन कॉलेज में भारतीय दर्शन के प्रोफेसर डॉ. जेफरी डी. लॉन्ग ने पश्चिमी संस्कृति पर हिंदू दर्शन के गहरे प्रभाव को समझाया।

उन्होंने बताया कि अमेरिका के संस्थापक नेताओं से लेकर जॉर्ज हैरिसन, स्टार वॉर्स और जूलिया रॉबर्ट्स जैसे नामों तक हिंदू विचारों का असर देखा जा सकता है। कार्यक्रम का समापन छात्रों द्वारा संचालित एक पैनल चर्चा के साथ हुआ। इसमें ऐतिहासिक शोध, हिंदू धर्म की पाठ्य प्रस्तुति और परिसर में हिंदू छात्रों को प्रभावित करने वाले मुद्दों पर चर्चा हुई।

इन मुद्दों में जाति से जुड़े पूर्वाग्रह, नास्तिकता, हिंदू धर्म में बहुलता, स्त्री-विरोध और मासिक धर्म जैसे विषय शामिल थे। CYAN रटगर्स के अध्यक्ष और बायोमेडिकल इंजीनियरिंग के अंतिम वर्ष के छात्र ध्येय राय ने कार्यक्रम के बारे में कहा कि प्रेरणादायक प्रस्तुतियां, सीधे सवाल, ऊर्जावान पैनल चर्चा, भोजन और मेरे साथी छात्रों का उत्साह इन सबने इस दिन को यादगार बना दिया।

उन्होंने अपने अनुभव को साझा करते हुए कहा कि मैं पैनल के वक्ताओं और प्रतिभागियों के उत्साह से बहुत प्रेरित होकर लौटा। मुझे अपने धर्म को समझने और जीवन के महत्वपूर्ण सवालों में उसका मार्गदर्शन लेने के बारे में बहुत स्पष्टता मिली, खासकर अब जब मैं स्नातक होने जा रहा हूं।

रटगर्स के हिंदू चैपलिन हितेश त्रिवेदी ने भी इसी तरह की बात कही। उन्होंने कहा कि रटगर्स में सियान का यह कार्यक्रम सीधे तौर पर हमारे युवा सदस्यों की मांग का जवाब था। उन्होंने आगे कहा कि अकादमिक दुनिया में बढ़ते हिंदू-विरोध के बीच अब यह आम हो गया है कि गैर-हिंदू लोग हिंदू धर्म पर चर्चा की दिशा तय करते हैं। इसका परिणाम यह होता है कि संस्थागत शैक्षणिक माहौल में हिंदू परंपराओं को व्यवस्थित रूप से गलत, हल्का या शत्रुतापूर्ण तरीके से प्रस्तुत किया जाता है।

कोएलिशन ऑफ हिंदूज ऑफ नॉर्थ अमेरिका यानी CoHNA ने 20 अप्रैल को रटगर्स विश्वविद्यालय में हिंदू धर्म पर एक सेमिनार आयोजित किया। इस कार्यक्रम में 75 से अधिक छात्र, शोधकर्ता, शिक्षक और सामुदायिक सदस्य शामिल हुए। डिमिस्टिफाइंग हिंदुइज्म: क्लैरिटी थ्रू स्कॉलरशिप शीर्षक वाला यह सेमिनार कोहना और उसके युवा विंग CYAN (कोहना यूथ एक्शन नेटवर्क) के रटगर्स चैप्टर द्वारा आयोजित किया गया।

इसमें रटगर्स हिंदू स्टूडेंट्स काउंसिल (HSC) और विश्वविद्यालय की हिंदू चैपलेंसी ने भी साझेदारी की। आयोजकों ने कहा कि इस सम्मेलन में ऐसे प्रतिष्ठित विद्वान शामिल हुए जिनका काम जीवंत परंपरा और गंभीर अकादमिक अध्ययन के बीच स्थित है। सेमिनार में नील देसाई का भी एक विशेष सत्र हुआ। वे एक हाई स्कूल इतिहास शिक्षक हैं। उन्होंने शैक्षणिक संस्थानों में वर्षों से बढ़ते और बने हुए हिंदू-विरोधी माहौल पर बात की। कार्यक्रम में शॉनी स्टेट यूनिवर्सिटी की भारतीय इतिहास और धर्मों की प्रोफेसर डॉ. लावण्या वेम्सानी का भी सत्र हुआ।

उन्होंने बताया कि सावित्री, द्रौपदी और कुंती जैसी प्रमुख हिंदू महिलाओं को अकादमिक किताबों, मीडिया और लोकप्रिय संस्कृति में गलत तरीके से पेश किया गया है और उनका यौन वस्तुकरण किया गया है। एलिजाबेथटाउन कॉलेज में भारतीय दर्शन के प्रोफेसर डॉ. जेफरी डी. लॉन्ग ने पश्चिमी संस्कृति पर हिंदू दर्शन के गहरे प्रभाव को समझाया।

उन्होंने बताया कि अमेरिका के संस्थापक नेताओं से लेकर जॉर्ज हैरिसन, स्टार वॉर्स और जूलिया रॉबर्ट्स जैसे नामों तक हिंदू विचारों का असर देखा जा सकता है। कार्यक्रम का समापन छात्रों द्वारा संचालित एक पैनल चर्चा के साथ हुआ। इसमें ऐतिहासिक शोध, हिंदू धर्म की पाठ्य प्रस्तुति और परिसर में हिंदू छात्रों को प्रभावित करने वाले मुद्दों पर चर्चा हुई।

इन मुद्दों में जाति से जुड़े पूर्वाग्रह, नास्तिकता, हिंदू धर्म में बहुलता, स्त्री-विरोध और मासिक धर्म जैसे विषय शामिल थे। CYAN रटगर्स के अध्यक्ष और बायोमेडिकल इंजीनियरिंग के अंतिम वर्ष के छात्र ध्येय राय ने कार्यक्रम के बारे में कहा कि प्रेरणादायक प्रस्तुतियां, सीधे सवाल, ऊर्जावान पैनल चर्चा, भोजन और मेरे साथी छात्रों का उत्साह इन सबने इस दिन को यादगार बना दिया।

उन्होंने अपने अनुभव को साझा करते हुए कहा कि मैं पैनल के वक्ताओं और प्रतिभागियों के उत्साह से बहुत प्रेरित होकर लौटा। मुझे अपने धर्म को समझने और जीवन के महत्वपूर्ण सवालों में उसका मार्गदर्शन लेने के बारे में बहुत स्पष्टता मिली, खासकर अब जब मैं स्नातक होने जा रहा हूं।

रटगर्स के हिंदू चैपलिन हितेश त्रिवेदी ने भी इसी तरह की बात कही। उन्होंने कहा कि रटगर्स में सियान का यह कार्यक्रम सीधे तौर पर हमारे युवा सदस्यों की मांग का जवाब था। उन्होंने आगे कहा कि अकादमिक दुनिया में बढ़ते हिंदू-विरोध के बीच अब यह आम हो गया है कि गैर-हिंदू लोग हिंदू धर्म पर चर्चा की दिशा तय करते हैं। इसका परिणाम यह होता है कि संस्थागत शैक्षणिक माहौल में हिंदू परंपराओं को व्यवस्थित रूप से गलत, हल्का या शत्रुतापूर्ण तरीके से प्रस्तुत किया जाता है।

Comments

Related

To continue...

Already have an account? Log in

Create your free account or log in