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‘ऑस्ट्रेलिया डे चुराई गई जमीन का जश्न’, बयान से विवादों में घिरे भारतीय मूल के कमिश्नर शिवरामन

शिवरामन ने कहा, “जब 26 जनवरी की बात आती है, तो यह बहुत मुश्किल हो जाता है, क्योंकि इसमें राष्ट्रवाद की एक अंडरकरंट होती है—‘लव इट ऑर लीव इट’ वाली सोच।

भारतीय मूल के कमिश्नर शिवरामन / LinkedIn/@Giri Sivaraman கிரி சிவராமன்

ऑस्ट्रेलिया की अल्बानीज सरकार में भारतीय मूल के रेस डिस्क्रिमिनेशन कमिश्नर गिरिधरन शिवरामन अपने एक बयान को लेकर तीखी आलोचना का सामना कर रहे हैं। उन्होंने कहा है कि 26 जनवरी को ऑस्ट्रेलिया डे के रूप में नहीं मनाया जाना चाहिए, क्योंकि यह उपनिवेशवाद की शुरुआत और देश के प्रथम निवासियों (फर्स्ट पीपल) को उनकी ही जमीन से बेदखल किए जाने का प्रतीक है।

एसबीएस पॉडकास्ट पर बातचीत के दौरान शिवरामन ने ऑस्ट्रेलिया को “चुराई गई जमीन” (stolen land) बताया और कहा कि ऑस्ट्रेलिया डे को लेकर उनके मन में गहरा द्वंद्व है। उनके मुताबिक, इस दिन राष्ट्रवाद की एक ऐसी धारा बहती है, जिसमें ‘या तो हमारे साथ हो, या हमारे खिलाफ’ जैसी सोच हावी रहती है।

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शिवरामन ने कहा, “जब 26 जनवरी की बात आती है, तो यह बहुत मुश्किल हो जाता है, क्योंकि इसमें राष्ट्रवाद की एक अंडरकरंट होती है—‘लव इट ऑर लीव इट’ वाली सोच। लोग कहते हैं कि अगर तुम हमारे साथ नहीं हो, तो हमारे खिलाफ हो। 26 जनवरी को आपको झंडे को चूमना होगा, देश से प्यार दिखाना होगा, नहीं तो चले जाओ।”

उन्होंने एक प्रवासी के रूप में अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि भारत में जन्म लेने और कम उम्र में ऑस्ट्रेलिया आने के बावजूद यह दिन उन्हें असहज करता है। “26 जनवरी मेरे लिए बेहद conflicted दिन है। एक भारतीय प्रवासी के तौर पर मैं सोचता हूं कि आखिर हम क्या मना रहे हैं? हम सब चुराई गई जमीन पर हैं और इस देश के इतिहास को लेकर सच्चाई सामने आनी चाहिए।”

 

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