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ब्रिटिश कोलंबिया के बाद न्यू बर्नस्विक का प्रतिनिधिमंडल भारत पहुंचा

इसका उद्देश्य दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते बाजारों में से एक भारत के साथ व्यावसायिक संबंधों को मजबूत करना और नई साझेदारियों की संभावनाएं तलाशना है।

प्रतीकात्मक तस्वीर / Pexels

दुनिया की तीसरी सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था भारत के साथ व्यापार, उद्योग, ऊर्जा और शैक्षणिक सहयोग के नए अवसरों की तलाश में इस सप्ताह कनाडा के दो अहम प्रतिनिधिमंडल भारत दौरे पर हैं।

इनमें पहला प्रतिनिधिमंडल कनाडा की प्रमुख यूनिवर्सिटीज़ के प्रमुखों और प्रेसिडेंट्स का है। 20 से अधिक कनाडाई विश्वविद्यालयों का प्रतिनिधित्व करने वाला यह शैक्षणिक प्रतिनिधिमंडल पांच दिनों तक भारत में रहेगा और भारतीय विश्वविद्यालयों के शीर्ष अधिकारियों से मुलाकात करेगा। इस दौरान शिक्षा और रिसर्च के क्षेत्र में सहयोग की नई संभावनाओं पर चर्चा की जाएगी। यह प्रतिनिधिमंडल गोवा और नई दिल्ली का दौरा करेगा।

दूसरा प्रतिनिधिमंडल कनाडा के न्यू बर्नस्विक प्रांत का व्यापारिक मिशन है, जो आज भारत पहुंच चुका है। यह मिशन 6 फरवरी तक केंद्र और विभिन्न राज्यों के नेताओं के साथ बैठकें करेगा। इसका उद्देश्य दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते बाजारों में से एक भारत के साथ व्यावसायिक संबंधों को मजबूत करना और नई साझेदारियों की संभावनाएं तलाशना है। इस मिशन को ‘ऑपर्च्युनिटीज़ न्यू ब्रंसविक’ (ONB) का समर्थन प्राप्त है और इसका फोकस उन व्यवसायों पर है, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विस्तार, भारत में प्रवेश और नई सप्लाई-चेन साझेदारियों की तलाश में हैं।

यूनिवर्सिटीज़ के प्रतिनिधिमंडल का यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है, जब कनाडा द्वारा अंतरराष्ट्रीय छात्रों की संख्या में कटौती की खबरें सामने आ रही हैं। नई लिबरल सरकार के पहले बजट में प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के नेतृत्व में यह स्पष्ट किया गया है कि सरकार की प्राथमिकता अब संख्या नहीं, बल्कि गुणवत्ता होगी।

इस संदर्भ में यूनिवर्सिटीज़ कनाडा के अध्यक्ष गेब्रियल मिलर के प्री-डिपार्चर बयान को काफी अहम माना जा रहा है। उन्होंने कहा, “भारत के लिए हमारा यह मिशन कनाडाई विश्वविद्यालयों को हमारी अर्थव्यवस्था को दोबारा ढालने और दुनिया में अपनी भूमिका को नए सिरे से परिभाषित करने की राष्ट्रीय परियोजना के अग्रिम मोर्चे पर लाता है।

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हमारी अर्थव्यवस्था का कोई दूसरा सेक्टर या समूह ऐसा नहीं है, जिसने इतनी जल्दी भारत जाने वाला राष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडल संगठित किया हो और दोनों देशों के रिश्तों को फिर से मजबूत करने के रोडमैप का समर्थन किया हो।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह दौरा केवल अंतरराष्ट्रीय छात्रों के प्रवेश या संख्या तक सीमित नहीं है।

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