श्रीलंका में भारतीय सेना का ऑपरेशन 'सागर बंधु' / X/@adgpi
श्रीलंका में तूफान दित्वाह ने भारी तबाही मचाई। दित्वाह से हुई तबाही से उबरने और लोगों के रेस्क्यू के लिए शुरुआत से ही भारत सरकार ऑपरेशन सागर बंधु के तहत मदद कर रही है। ऑपरेशन सागर बंधु के तहत भारतीय सेना की इंजीनियर टास्क फोर्स बी-492 को ठीक करने के लिए लगातार काम कर रही है।
यह बी-492 मध्य प्रांत के कैंडी को श्रीलंका के उवा प्रांत के बादुल्ला से जोड़ता है। दित्वाह की वजह से यह बुरी तरह प्रभावित हुआ था। भारतीय सेना ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक वीडियो पोस्ट किया, जिसमें एक स्कूल की छात्रा ने कहा, "आपने हमारे लिए जो सर्विस की है, उसके लिए हम सच में आपके शुक्रगुजार हैं, खासकर भारत से इतनी दूर आने के लिए।"
वीडियो में छात्रा ने आगे कहा, "खराब पुल की वजह से हमारे पास इस तरफ आने का कोई रास्ता नहीं था। हम आप सभी के बहुत शुक्रगुजार हैं कि आप आए और हमारे लिए यह काम किया। आपने जो मदद की, उसके लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।"
सेना ने 'एक्स' पर वीडियो और इमेज शेयर करते हुए कहा, "भारतीय सेना की इंजीनियर टास्क फोर्स, मध्य प्रांत में कैंडी को श्रीलंका के उवा प्रांत में बादुल्ला से जोड़ने वाले बी-492 पर जरूरी रोड कनेक्टिविटी को लगातार ठीक कर रही है, जो तूफान दित्वाह से बुरी तरह प्रभावित हुआ था।"
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इसमें आगे कहा गया, "15 किलोमीटर और 21 किलोमीटर पर बेली ब्रिज के तेजी से निर्माण के जरिए टास्क फोर्स ने समुदाय को फिर से जोड़ा है, ट्रैवल टाइम कम किया है और श्रीलंका के लोगों के साथ रिश्ते मजबूत किए हैं।"
पिछले साल नवंबर 2025 में भारत ने खतरनाक तूफान दित्वाह के तुरंत बाद फर्स्ट रेस्पॉन्डर के तौर पर ऑपरेशन सागर बंधु शुरू किया था, ताकि श्रीलंका को तुरंत मानवीय सहायता और आपदा राहत/ह्यूमनिटेरियन असिस्टेंस और डिजास्टर रिलीफ (एचएडीआर) सपोर्ट दिया जा सके।
दित्वाह की वजह से पूरे श्रीलंका में बड़े पैमाने पर बाढ़, लैंडस्लाइड और इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान हुआ, जिससे देश के डिजास्टर-रिस्पॉन्स सिस्टम पर असर पड़ा।
भारतीय नौसेना के जहाज आईएनएस विक्रांत और आईएनएस उदयगिरी इमरजेंसी में रिस्पॉन्ड करने वाले पहले विदेशी जहाजों में से थे। जब तूफान आया, तब दोनों वॉरशिप श्रीलंकाई नेवी की 75वीं एनिवर्सरी के मौके पर आयोजित किए गए इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू 2025 के लिए पहले से ही श्रीलंका में मौजूद थे।
पिछले साल 27 नवंबर को तूफान के लैंडफॉल के बाद जहाजों को एचएडीआर ऑपरेशन के लिए फिर से तैनात किया गया। ऑपरेशन सागर बंधु के तहत भारतीय सेना ने दित्वाह तूफान से हुई तबाही के बाद श्रीलंका में जरूरी कनेक्टिविटी को ठीक करने की कोशिशें तेज कर दीं।
भारतीय सेना ने श्रीलंका के कैंडी जिले के पास महियांगनया में एक फील्ड हॉस्पिटल भी बनाया और इलाके में जरूरी मेडिकल जरूरतों को पूरा किया। भारत के एचएडीआर की कोशिशों के तहत, इस डिप्लॉयमेंट ने ट्रॉमा मैनेजमेंट, सर्जरी और आम मेडिकल इलाज समेत जरूरी जान बचाने वाली देखभाल की, जिससे रोजाना लगभग 1,000 से 1,200 मरीजों को फायदा हुआ।
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