शिवसेना नेता श्रीकांत शिंदे / @DrSEShinde/X)
महाराष्ट्र राज्य की सत्तारूढ़ महायुति में अंदरूनी खींचतान एक बार फिर खुलकर सामने आ गई है। शिवसेना सांसद और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के बेटे श्रीकांत शिंदे ने भाजपा पर तीखा हमला करते हुए आरोप लगाया है कि पार्टी स्थानीय स्तर पर एआईएमआईएम और कांग्रेस से गठजोड़ कर अपनी वैचारिक प्रतिबद्धताओं से समझौता कर रही है।
यह बयान उन खबरों के बाद आया है, जिनमें बताया गया है कि भाजपा ने अकोला में असदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम के साथ मिलकर ‘अकोट विकास मंच’ बनाया है, जबकि अंबरनाथ में नगर परिषद की सत्ता हासिल करने के लिए कांग्रेस से भी हाथ मिलाया गया।
श्रीकांत शिंदे ने सवाल उठाया कि जो पार्टी कुछ ही समय पहले “बटेंगे तो कटेंगे” जैसे नारे के साथ चुनावी मैदान में उतरी थी, वह अब एआईएमआईएम के साथ गठबंधन कैसे कर सकती है। उन्होंने कहा कि ऐसे फैसले उन लोगों के लिए “पीड़ादायक” हैं, जो हिंदुत्व की विचारधारा में विश्वास रखते हैं।
उन्होंने खासतौर पर अंबरनाथ का जिक्र करते हुए कहा कि यह क्षेत्र शिंदे गुट की शिवसेना का मजबूत गढ़ है, इसके बावजूद भाजपा ने शिवसेना को किनारे कर कांग्रेस के साथ मिलकर बहुमत बनाया। श्रीकांत शिंदे ने कहा कि “एक भरोसेमंद सहयोगी को दरकिनार कर कांग्रेस का हाथ थामना महायुति की भावना के खिलाफ है।”
उन्होंने चेतावनी दी कि स्थानीय सत्ता के लिए बनाए जा रहे ऐसे “अस्वाभाविक” गठबंधन मतदाताओं को भ्रमित कर सकते हैं और आगामी बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) चुनावों से पहले गठबंधन की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
श्रीकांत शिंदे ने मीडिया से कहा, “आपको भाजपा से पूछना चाहिए कि उन्होंने ये गठबंधन कैसे बनाए। उनके नेताओं ने सत्ता के लिए ऐसा किया होगा। भाजपा के वरिष्ठ नेताओं को इस पर कार्रवाई करनी चाहिए।”
गौरतलब है कि एक दिन पहले ही भाजपा की अगुवाई में अकोला में ‘अकोट विकास मंच’ का गठन किया गया, जिसमें एआईएमआईएम शामिल है। इस गठबंधन के पास अध्यक्ष सहित 33 सदस्यीय सदन में 26 सदस्यों का समर्थन है, जबकि कांग्रेस (6) और वंचित बहुजन आघाड़ी (2) विपक्ष में बैठेंगी।
वहीं, अंबरनाथ नगर परिषद में शिंदे गुट की शिवसेना सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी, इसके बावजूद भाजपा ने कांग्रेस और अन्य दलों के साथ मिलकर न सिर्फ अध्यक्ष पद हासिल किया, बल्कि कामकाजी बहुमत भी जुटा लिया। 60 सदस्यीय नगर परिषद में शिवसेना के 27, भाजपा के 14, कांग्रेस के 12, एनसीपी (अजित पवार) के 4 और तीन निर्दलीय सदस्य हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि श्रीकांत शिंदे का यह हमला महायुति में “बिग ब्रदर” बनाम “स्थानीय सहयोगी” के टकराव को उजागर करता है। जहां भाजपा इन गठबंधनों को “स्थानीय स्तर की मजबूरी” और संख्या गणित का परिणाम बता रही है, वहीं शिंदे गुट इसे अपने प्रभाव वाले नगर निकाय क्षेत्रों में सीधी चुनौती के तौर पर देख रहा है।
पर्यवेक्षकों के अनुसार, यह तनाव आगामी बीएमसी चुनावों में भाजपा और शिवसेना के रिश्तों को प्रभावित कर सकता है, खासकर तब जब दोनों दल एक ही “प्रो-हिंदुत्व” और “प्रो-डेवलपमेंट” मतदाता वर्ग को साधने की कोशिश कर रहे हैं।
ADVERTISEMENT
ADVERTISEMENT
Comments
Start the conversation
Become a member of New India Abroad to start commenting.
Sign Up Now
Already have an account? Login