सूर्यभेदन प्राणायाम / Morarji desai national institute for yoga
योगशास्त्र में प्राणायाम को जीवन शक्ति के नियंत्रण और विस्तार का महत्वपूर्ण साधन माना गया है। प्राणायाम न केवल श्वास को नियंत्रित करता है, बल्कि नाड़ी तंत्र को संतुलित करने में भी मदद करता है। इसी कड़ी में सूर्यभेदन प्राणायाम है, जो शरीर के अंदरूनी ताप को तेजी से बढ़ाता है।
'सूर्य' का अर्थ सूर्य (गर्मी और ऊर्जा का प्रतीक) तथा 'भेदन' का अर्थ भेदना या जागृत करना है। यह प्राणायाम दाहिनी नासिका (पिंगला नाड़ी या सूर्य नाड़ी) के माध्यम से श्वास लेकर शरीर में सूर्य तत्व की तरह गर्मी, ऊर्जा और जीवन शक्ति को बढ़ाता है। हठयोग प्रदीपिका और अन्य प्राचीन ग्रंथों में इसे आठ प्रमुख कुम्भकों में से एक माना गया है।
आयुष मंत्रालय के अनुसार, सूर्यभेदन प्राणायाम शरीर को गर्म रखने, प्रतिरक्षा (इम्यूनिटी) मजबूत करने और ठंड से होने वाली जकड़न दूर करने वाला एक प्रभावी प्राणायाम है, जिसमें दाहिनी नासिका से सांस लेकर बाईं नासिका से छोड़ी जाती है, खासकर सर्दियों में इसे करने की विशेष सलाह दी जाती है, लेकिन उच्च रक्तचाप और हृदय रोगियों को इससे बचना चाहिए।
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सूर्यभेदन प्राणायाम को काफी आसान तरीके से किया जा सकता है। इसको करने के लिए सबसे पहले सुखासन, पद्मासन, या किसी आरामदायक मुद्रा में बैठ जाएं। अब बाईं नासिका को अंगूठे से बंद करते हुए दाहिनी नासिका से धीरे-धीरे गहरी सांस लें। सांस भरने के बाद दोनों नासिकाएं बंद कर कुछ सेकंड तक रोके रखें। इसके बाद बाईं नासिका से धीरे-धीरे सांस छोड़ें। यह एक चक्र है। रोजाना 10-15 चक्र सुबह के समय खाली पेट करना चाहिए।
एक्सपर्ट का मानना है कि इस प्राणायाम के रोजाना अभ्यास करने से सर्दी-जुकाम, नाक बंद होना जैसी शारीरिक स्वास्थ्य संबंधित समस्याओं से निजात मिलने में काफी हद तक आराम मिलता है।
वहीं, आयुर्वेद का मानना है कि यह आसन शरीर में सूर्य नाड़ी (पिंगला नाड़ी) को सक्रिय करती है, आंतरिक ऊष्मा (अग्नि) उत्पन्न करता है। साथ ही, पाचन सुधारता है, प्रतिरक्षा को बढ़ाता है और मानसिक एकाग्रता व जीवन शक्ति (प्राण) को जगाता है, खासकर कफ दोष (सर्दी-खांसी) में लाभदायक है। यह प्राणायाम फेफड़ों की क्षमता बढ़ाता है और शरीर को ऊर्जावान व चुस्त बनाता है।
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