एआई समिट में पीएम मोदी / Narendra Modi YouTube grab
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 'इंडिया-एआई इम्पैक्ट समिट' में दिया गया यह संबोधन भविष्य की तकनीक और मानवीय मूल्यों के बीच संतुलन बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
एक नई शुरुआत: 'MANAV' विजन का परिचय
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एआई के क्षेत्र में भारत के 'मानव-केंद्रित' दृष्टिकोण को दुनिया के सामने रखा, जिसे उन्होंने 'MANAV' (मानव) नाम दिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि 21वीं सदी में एआई की दिशा मशीनों द्वारा नहीं, बल्कि मानवीय मूल्यों द्वारा तय होनी चाहिए। उनके अनुसार, एआई को एक 'खुला आसमान' तो मिलना चाहिए, लेकिन इसकी कमान हमेशा इंसान के हाथों में ही रहनी चाहिए, ठीक उसी तरह जैसे जीपीएस रास्ता दिखाता है लेकिन अंतिम फैसला चालक का होता है।
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एआई की तुलना परमाणु ऊर्जा से
एआई की शक्ति और उसके खतरों को समझाते हुए प्रधानमंत्री ने इसकी तुलना परमाणु ऊर्जा से की। उन्होंने कहा कि मानवता ने परमाणु ऊर्जा का विनाशकारी रूप भी देखा है और इसके सकारात्मक योगदान को भी महसूस किया है। मोदी जी ने चेतावनी दी कि यदि एआई 'दिशाहीन' रहा, तो यह विनाश का कारण बनेगा, लेकिन यदि इसे 'सही दिशा' दी गई, तो यह दुनिया की बड़ी समस्याओं का समाधान बन जाएगा।
'MANAV' का पूर्ण रूप और अर्थ
प्रधानमंत्री ने 'MANAV' शब्द के प्रत्येक अक्षर की व्याख्या करते हुए भारत के पांच स्तंभों को समझाया-
M (Moral & Ethical Systems): एआई को नैतिकता और मानवीय मूल्यों का सम्मान करना चाहिए।
A (Accountable Governance): इसमें पारदर्शी नियम और राष्ट्रीय संप्रभुता होनी चाहिए; जिसके पास डेटा है, उसके पास अधिकार भी होने चाहिए।
N (Accessible & Inclusive): एआई किसी का एकाधिकार नहीं, बल्कि सबके लिए अवसरों का गुणक (Multiplier) होना चाहिए।
A (Valued & Legitimate): यह कानूनी रूप से वैध, भरोसेमंद और सामाजिक रूप से स्वीकार्य होना चाहिए।
V (Vision for Humanity): इसका अंतिम लक्ष्य केवल और केवल 'जन कल्याण' होना चाहिए।
पारदर्शिता और 'डिजिटल न्यूट्रिशन लेबल'
गोपनीयता के बजाय पारदर्शिता पर जोर देते हुए पीएम मोदी ने कहा कि "धूप सबसे अच्छा कीटाणुनाशक है।" उन्होंने कुछ देशों और कंपनियों द्वारा एआई को गुप्त रखने की प्रवृत्ति की आलोचना की और इसे 'वैश्विक सार्वजनिक वस्तु' (Global Common Good) के रूप में विकसित करने का आह्वान किया। इसके साथ ही, डीपफेक और भ्रामक सामग्री से निपटने के लिए उन्होंने 'डिजिटल न्यूट्रिशन लेबल' का सुझाव दिया, ताकि लोगों को पता चल सके कि कौन सी सामग्री असली है और कौन सी एआई द्वारा बनाई गई है।
बाल सुरक्षा और भविष्य की पीढ़ी
प्रधानमंत्री ने एआई के इकोसिस्टम में बच्चों की सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि जैसे स्कूलों का पाठ्यक्रम सावधानी से तैयार (Curated) किया जाता है, वैसे ही एआई का वातावरण भी 'चाइल्ड-सेफ' और 'फैमिली-गाइडेड' होना चाहिए। उन्होंने वर्तमान पीढ़ी से सवाल किया कि हम आने वाली पीढ़ियों को किस तरह का एआई सौंपना चाहते हैं, इसलिए आज सही कदम उठाना अनिवार्य है।
भारत: डर नहीं, अवसर का देश
अंत में, प्रधानमंत्री ने गर्व के साथ कहा कि भारत एआई से डरता नहीं है, बल्कि इसमें अपना भविष्य देखता है। उन्होंने बताया कि भारत के पास प्रतिभा, ऊर्जा और नीतिगत स्पष्टता है। इसी समिट में तीन भारतीय कंपनियों द्वारा अपने एआई मॉडल और ऐप्स लॉन्च करना इस बात का प्रमाण है कि भारत के युवा अब वैश्विक स्तर पर समाधान देने के लिए तैयार हैं।
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