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AI सम्मेलन 'फैमिली फोटो': पीएम मोदी के साथ दिखे वैश्विक नेता, कुछ कहती है तस्वीर!

सामने आई 'फैमिली फोटो' केवल एक औपचारिक समूह तस्वीर नहीं है, बल्कि वैश्विक राजनीति और तकनीकी सहयोग का प्रतीकात्मक दृश्य भी है।

 एक तस्वीर... अनेक संदेश। एक तस्वीर... अनेक संदेश। / X/@narendramodi

राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित एआई-इम्पैक्ट समिट 2026 के चौथे दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तस्वीरों की एक श्रृंखला साझा की, जिसमें पीएम मोदी और दुनिया के बड़े और छोटे देशों के माननीय साथ में खड़े थे। सामने आई “फैमिली फोटो” केवल एक औपचारिक समूह तस्वीर नहीं है, बल्कि वैश्विक राजनीति और तकनीकी सहयोग का प्रतीकात्मक दृश्य भी है।

 मंच के मध्य में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके आसपास विभिन्न देशों के राष्ट्राध्यक्ष, मंत्री, तकनीकी विशेषज्ञ और उद्योग जगत के प्रतिनिधि दिखाई दे रहे हैं। यह तस्वीर बताती है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब केवल तकनीकी विषय नहीं, बल्कि वैश्विक कूटनीति और रणनीतिक साझेदारी का केंद्र बन चुका है।

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ऐसे अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में “फैमिली फोटो” परंपरा का हिस्सा होती है। यह सामूहिक प्रतिबद्धता का दृश्य प्रमाण मानी जाती है। 2026 के इस एआई समिट में एशिया, यूरोप, अमेरिका और अफ्रीका के प्रतिनिधियों की भागीदारी ने यह संकेत दिया कि एआई शासन, डेटा सुरक्षा, नैतिक मानक और नवाचार जैसे मुद्दे अब बहुपक्षीय विमर्श का हिस्सा हैं। तस्वीर में नेताओं की एक साथ मौजूदगी इस बात का संदेश देती है कि तकनीकी प्रतिस्पर्धा के बावजूद सहयोग की आवश्यकता को खुले दिल से स्वीकारा जा रहा है।

भारत पिछले कुछ वर्षों में डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, आधार, यूपीआई और डिजिटल सेवाओं के विस्तार को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करता रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में जिम्मेदार एआई, समावेशी विकास और मानव-केंद्रित तकनीक की आवश्यकता पर जोर दिया। फैमिली फोटो इसी संदेश का दृश्य विस्तार प्रतीत होती है—जहां विभिन्न राजनीतिक विचारधाराओं और आर्थिक हितों वाले देश एक साझा मंच पर खड़े हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह की तस्वीरें "विज़ुअल डिप्लोमेसी" का हिस्सा होती हैं। अमेरिकी विद्वान डेविड डी. पर्किन्स तो इसे "विजुअल स्टेटमेंट" कहते हैं, यानी जो दिखता है वो बहुत कुछ बयान करता है। ये तस्वीरें यह संकेत देती हैं कि कोई देश किसी उभरते वैश्विक एजेंडा में केंद्रीय भूमिका निभा रहा है।

एआई के क्षेत्र में अमेरिका और चीन जैसी बड़ी शक्तियों के बीच प्रतिस्पर्धा के दौर में भारत का मेजबान के रूप में उभरना उसकी बढ़ती तकनीकी और रणनीतिक हैसियत को दर्शाता है। फैमिली फोटो में विकसित और विकासशील देशों का साथ दिखना यह भी बताता है कि एआई केवल उन्नत अर्थव्यवस्थाओं का विषय नहीं, बल्कि ग्लोबल साउथ के लिए भी अवसर और चुनौती दोनों है।

अंतरराष्ट्रीय संबंधों के सिद्धांतकार जोसेफ एस. नाए ने अपनी चर्चित पुस्तक 'सॉफ्ट पावर: द मीन्स टू सक्सेस इन वर्ल्ड पॉलिटिक्स' में "सॉफ्ट पावर" की अवधारणा समझाते हुए कहा है कि किसी देश की छवि, सांस्कृतिक प्रभाव और सार्वजनिक प्रस्तुति उसकी वैश्विक स्थिति को मजबूत करते हैं। नाए के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय मंचों पर साझा तस्वीरें और प्रतीकात्मक क्षण किसी देश की विश्वसनीयता और आकर्षण को बढ़ाते हैं—जो सॉफ्ट पावर का मुख्य तत्व है।

हालांकि, प्रतीकात्मक तस्वीरों से आगे वास्तविक महत्व उन समझौतों और साझेदारियों में निहित होता है, जो ऐसे सम्मेलनों के बाद आकार लेते हैं। एआई के क्षेत्र में डेटा साझा करने के नियम, साइबर सुरक्षा सहयोग, अनुसंधान निवेश और नैतिक ढांचे पर सहमति—ये सभी भविष्य में तय करेंगे कि इस समिट का प्रभाव कितना व्यापक होगा।

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