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भारत में पीएम मोदी की सत्ता संभालते ही बदली मंदिरों की दशा : संत समाज

अयोध्या के साधु संतों ने भी सोमनाथ मंदिर पर हमले के 1,000 वर्ष पूरे होने और प्रधानमंत्री मोदी द्वारा इस पर लिखे गए लेख को लेकर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।

 सीताराम दास महाराज जी सीताराम दास महाराज जी / IANS

द्वादश ज्योतिर्लिंगों में शामिल गुजरात का सोमनाथ सिर्फ आस्था का प्रतीक नहीं है, बल्कि ये हमारे देश का गौरव और आत्मा है। लाखों की संख्या में भक्त मंदिर में बाबा भोलेनाथ का पूजन करते हैं, लेकिन 1,000 साल पहले इस धार्मिक स्थल की अखंडता को चोट पहुंचाने की कोशिश की गई थी।  

पीएम मोदी ने सोमनाथ मंदिर को करोड़ों वीर सनातनियों के स्वाभिमान और अदम्य साहस का प्रतीक बताया है। पीएम मोदी के इस बयान का समर्थन पूरा संत समाज कर रहा है और उन्होंने इस विषय पर अपनी राय रखी है।

जगतगुरु स्वामी महेशाश्रम जी महाराज ने कहा कि द्वादश ज्योतिर्लिंग में शामिल गुजरात के सोमनाथ मंदिर हो या जगन्नाथ पुरी, चारों धाम के मंदिरों का निर्माण खुद विश्कर्मा जी ने किया है और किसी में भी हिम्मत नहीं है कि वो मंदिर का विध्वंस कर सके। महमूद गजनवी ने मंदिर को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की, लेकिन हमारा मंदिर अखंड था और सृष्टि के आखिर पल तक अखंड ही रहेगा।

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अयोध्या के साधु संतों ने भी सोमनाथ मंदिर पर हमले के 1,000 वर्ष पूरे होने और प्रधानमंत्री मोदी द्वारा इस पर लिखे गए लेख को लेकर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। 

महामंडलेश्वर विष्णु दास ने कहा है कि प्रधानमंत्री मोदी के सत्ता संभालते ही देश के समस्त मंदिरों और सनातन धर्म का उत्थान हुआ है। सोमनाथ मंदिर 100 करोड़ लोगों की आस्था का प्रतीक है, जहां बाबा भोलेनाथ को आराध्य के रूप में पूजा जाता है, लेकिन वर्षों पहले कुछ लोगों ने सोमनाथ मंदिर पर आतंक फैलाने की कोशिश की थी, लेकिन वे नाकाम रहे।

उन्होंने आगे कहा कि पीएम मोदी भी संत समान हैं और उन्होंने देश के सभी मंदिरों के विकास कार्यों पर जोर दिया है। उन्होंने सोमनाथ मंदिर को लेकर जो कुछ कहा है, हम सभी उनका समर्थन करते हैं।

साकेत भवन मंदिर के सीताराम दास ने कहा है कि निश्चित तौर पर अफगानी महमूद गजवनी और आतंकवादियों द्वारा सनातन धर्म पर जो कुठाराघात किया गया, उसके 1,000 वर्ष पूरे हुए हैं। इस बात को प्रधानमंत्री मोदी ने लोगों को स्मरण कराया है। यह बेहद महत्वपूर्ण बात है। हमारे द्वादश ज्योतिर्लिंग सोमनाथ को अखंड बनाने में कई वीर जवानों ने अपनी आहुति दी और आस्था को बरकार रखा है। यह मंदिर सिर्फ आस्था का प्रतीक नहीं है, बल्कि कई वीरों की अमर गाथा है। देश उनके पराक्रम को हमेशा याद रखेगा।

 

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