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भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) द्वारा चलाए जा रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन–SIR) अभियान को देश के भीतर जहां तीव्र विरोध और आलोचना का सामना करना पड़ा, वहीं अंतरराष्ट्रीय मंच पर इसे व्यापक सराहना मिल रही है। विदेशी मीडिया में इस पहल को भारतीय लोकतंत्र को सशक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा और आवश्यक कदम बताया गया है।
ऑस्ट्रेलिया स्थित ग्रीक न्यूज पोर्टल ग्रीक सिटी टाइम्स ने चुनाव आयोग के इस अभियान की खुलकर प्रशंसा करते हुए इसे “एक व्यक्ति, एक वोट” के मूल लोकतांत्रिक सिद्धांत की मजबूत आधारशिला करार दिया है। पोर्टल ने कहा कि यह ऐतिहासिक पहल भारत की लोकतांत्रिक भावना में नई जान फूंकती है और हर मतदाता के वोट की गरिमा और महत्व को दोहराती है।
रिपोर्ट में उल्लेख किया गया कि निर्वाचन आयोग ने बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले SIR को सफलतापूर्वक लागू किया, जो पिछले दो दशकों में पहली बार इतना व्यापक मतदाता सूची पुनरीक्षण था। बिहार चुनावों के बाद आयोग ने 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में इस अभियान का विस्तार किया, जिस पर विपक्षी दलों ने आपत्ति जताई।
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ग्रीक सिटी टाइम्स के अनुसार, SIR का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हर पात्र नागरिक को समान और निष्पक्ष रूप से मतदान का अधिकार मिले। पोर्टल ने कहा, “डुप्लीकेट प्रविष्टियों, मृत मतदाताओं के नाम और अपात्र लोगों को हटाने के साथ-साथ नए पात्र मतदाताओं, खासकर पहली बार वोट देने वाले युवाओं को जोड़ने से मतदाता सूची वर्तमान वास्तविकताओं के अधिक अनुरूप बनती है।”
विदेशी पोर्टल ने यह भी कहा कि बहुस्तरीय सत्यापन प्रक्रिया से चुनावी नतीजों की विश्वसनीयता और वैधता बढ़ेगी और मतदाता पंजीकरण अधिक सुलभ व समावेशी बनेगा। पारदर्शी और अद्यतन मतदाता सूची से जनता का भरोसा मजबूत होगा और चुनावी प्रक्रिया में उनकी भागीदारी भी बढ़ेगी।
रिपोर्ट में कहा गया कि फर्जी और ‘घोस्ट’ प्रविष्टियों के हटने से लोग चुनावी व्यवस्था पर अधिक विश्वास करेंगे और विशेष रूप से पहली बार मतदान करने वाले तथा हाशिए पर मौजूद वर्ग लोकतांत्रिक प्रक्रिया से अधिक जुड़ेंगे। यह सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार के सिद्धांत को भी मजबूती देता है।
ग्रीक सिटी टाइम्स ने SIR को भारतीय लोकतंत्र के विकास में एक निर्णायक क्षण बताते हुए कहा कि यह भारत की चुनावी संस्थाओं की लचीलापन और अनुकूलन क्षमता का प्रमाण है। पोर्टल के शब्दों में, “लोकतंत्र तभी फलता-फूलता है, जब मतदाता को उसकी पूरी सच्चाई के साथ पहचाना, सत्यापित किया और सुना जाए।”
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