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भारत के स्पेस स्टेशन की योजना को ISRO ने दी रफ्तार, 80 उपग्रह निर्माणाधीन

इस समय लगभग 80 उपग्रहों पर काम चल रहा है, जो वैज्ञानिक अनुसंधान, नवाचार, आपदा प्रबंधन, आंतरिक सुरक्षा, नेविगेशन और गगनयान मिशन से जुड़े अहम सिग्नलों को पृथ्वी तक भेजने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

ISRO के प्रोग्राम डायरेक्टर इम्तियाज अहमद / IANS

भारत अपने स्वयं के अंतरिक्ष स्टेशन की स्थापना की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है और इसके साथ ही गगनयान मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन पर भी काम तेज किया गया है। यह जानकारी ISRO के प्रोग्राम डायरेक्टर इम्तियाज अहमद ने सोमवार को दी।

उन्होंने बताया कि इस समय लगभग 80 उपग्रहों पर काम चल रहा है, जो वैज्ञानिक अनुसंधान, नवाचार, आपदा प्रबंधन, आंतरिक सुरक्षा, नेविगेशन और गगनयान मिशन से जुड़े अहम सिग्नलों को पृथ्वी तक भेजने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

समस्तीपुर में भारत के पहले स्वदेशी उपग्रह ‘आर्यभट्ट’ की स्वर्ण जयंती के अवसर पर IANS से बातचीत में अहमद ने कहा कि इस तरह के मिशन भारत की अंतरिक्ष क्षमताओं को मजबूत करने और तकनीकी आत्मनिर्भरता को बढ़ाने के लिए बेहद अहम हैं।

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उन्होंने बताया कि ISRO वर्तमान में कई बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहा है, जिनमें पृथ्वी अवलोकन (अर्थ ऑब्जर्वेशन) मिशन, नेविगेशन विद इंडियन कॉन्स्टेलेशन (NVS), इंडियन डेटा रिले सैटेलाइट सिस्टम (IDRSS), गगनयान और वीनस ऑर्बिटर मिशन शामिल हैं। ये सभी पहल अंतरिक्ष विज्ञान, अन्वेषण और उपयोगी तकनीकों में भारत की बढ़ती भूमिका को दर्शाती हैं।

आर्यभट्ट उपग्रह के ऐतिहासिक प्रक्षेपण को याद करते हुए अहमद ने कहा कि 19 अप्रैल 1975 को लॉन्च हुआ यह उपग्रह, जिसे प्राचीन भारतीय गणितज्ञ और खगोलशास्त्री आर्यभट्ट के नाम पर रखा गया था, भारत की वैज्ञानिक यात्रा में एक मील का पत्थर साबित हुआ। शीत युद्ध के दौर में सीमित संसाधनों के बावजूद आर्यभट्ट की सफलता ने भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों की नींव रखी और ISRO को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाई।

आर्यभट्ट की स्वर्ण जयंती के अवसर पर ISRO ने स्कूली छात्रों के लिए एक राष्ट्रव्यापी जनजागरूकता कार्यक्रम भी शुरू किया है। इस पहल के तहत बिहार का पहला कार्यक्रम सोमवार को समस्तीपुर के होली मिशन हाई स्कूल में आयोजित किया गया, जिसमें पांच अलग-अलग 10+2 स्कूलों के छात्रों ने भाग लिया।

कार्यक्रम के दौरान छात्रों को ISRO के कार्यों और अंतरिक्ष क्षेत्र में भविष्य की संभावनाओं के बारे में जानकारी दी गई। वैज्ञानिकों ने अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए बताया कि उनमें से कई हिंदी माध्यम के स्कूलों से पढ़े हैं, जिससे छात्रों को बड़े सपने देखने और अंतरिक्ष विज्ञान व तकनीक में करियर बनाने की प्रेरणा मिली।

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