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ऊर्जा आयात पर भारत: राष्ट्रीय हित सर्वोपरि, सस्ते और भरोसेमंद विकल्पों पर जोर

भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने कहा कि सरकार की “सर्वोच्च प्राथमिकता भारतीय उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा” करना है।

 भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री / IANS

भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने सोमवार को स्पष्ट किया कि देश की ऊर्जा आपूर्ति से जुड़े सभी फैसले पूरी तरह राष्ट्रीय हितों के आधार पर लिए जाते हैं, जिनमें स्रोतों का विविधीकरण और प्रतिस्पर्धी कीमतें प्रमुख प्राथमिकताएं हैं। यह बयान उन रिपोर्टों के बीच आया है, जिनमें कहा गया था कि अमेरिका के साथ अंतरिम व्यापार समझौते के बाद भारत रूसी तेल आयात में कटौती कर सकता है।

रूसी कच्चे तेल से जुड़े सवालों पर प्रतिक्रिया देते हुए विदेश सचिव ने कहा कि एक विकासशील अर्थव्यवस्था और बड़े स्तर पर ऊर्जा आयातक होने के नाते भारत के लिए सस्ती, स्थिर और भरोसेमंद ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि सरकार की “सर्वोच्च प्राथमिकता भारतीय उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा” करना है।

मिस्री ने बताया कि भारत अपनी कुल ऊर्जा जरूरतों का लगभग 80 से 85 प्रतिशत आयात करता है, और इस निर्भरता का सीधा असर महंगाई पर पड़ सकता है। ऐसे में सरकार यह सुनिश्चित करती है कि उपभोक्ताओं को उचित कीमत पर पर्याप्त ऊर्जा उपलब्ध हो।

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उन्होंने वैश्विक ऊर्जा बाजार में जारी अनिश्चितताओं का जिक्र करते हुए कहा कि भारत न सिर्फ दुनिया के सबसे बड़े ऊर्जा उपभोक्ताओं में से एक है, बल्कि वैश्विक ऊर्जा मूल्य स्थिरता बनाए रखने में भी अहम भूमिका निभाता है।
“हमारी ऊर्जा नीति के तीन मुख्य आधार हैं — पर्याप्त उपलब्धता, उचित कीमत और भरोसेमंद आपूर्ति,” उन्होंने कहा।

विदेश सचिव ने यह भी स्पष्ट किया कि ऊर्जा आयात से जुड़े फैसले सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की तेल कंपनियां बाजार स्थितियों के अनुसार लेती हैं, लेकिन हर स्तर पर राष्ट्रीय हित ही मार्गदर्शक सिद्धांत होता है।

इस बीच, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने राज्यसभा को बताया कि वैश्विक आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में भारत के रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार 74 दिनों तक देश की जरूरतें पूरी करने में सक्षम हैं। इंडियन स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिज़र्व्स लिमिटेड (ISPRL) के पास फिलहाल लगभग 40.94 लाख मीट्रिक टन कच्चा तेल संग्रहीत है, जो कुल भंडारण क्षमता का करीब 77 प्रतिशत है।

मंत्री ने यह भी बताया कि भारत कच्चे तेल का दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता और चौथा सबसे बड़ा रिफाइनर है, जिसकी रिफाइनिंग क्षमता 260 से बढ़कर 320 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष हो चुकी है।

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