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AI में विश्व नेतृत्व का समय, भारत को गढ़ना होगा नया मॉडल

एआई प्रचारक और प्रबंध साझेदार अनुपम गोविल ने कहा कि भारत को एआई के क्षेत्र में केवल निवेश ही नहीं, बल्कि इसके उपयोग के तरीके को भी नए सिरे से गढ़ना होगा।

पीएम मोदी ने एआई स्टार्टअप से जुड़े सीईओ से बातचीत की। / IANS/PIB

कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) भारत के लिए भविष्य का अवसर नहीं, बल्कि वर्तमान की रणनीतिक परीक्षा है। यह बात वैश्विक प्रबंधन परामर्श कंपनी Avasant के चीफ टेक्नोलॉजी एवं एआई प्रचारक और प्रबंध साझेदार अनुपम गोविल ने कही।

अगले सप्ताह नई दिल्ली में होने जा रहे ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026’ से पहले दिए गए साक्षात्कार में गोविल ने कहा कि भारत को एआई के क्षेत्र में केवल निवेश ही नहीं, बल्कि इसके उपयोग के तरीके को भी नए सिरे से गढ़ना होगा।

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उन्होंने कहा कि पिछले तीन दशकों में भारत ने वैश्विक तकनीकी सेवाओं के क्षेत्र में नेतृत्व किया, लेकिन स्वचालन और एआई के उभार के साथ श्रम लागत आधारित मॉडल कमजोर हो रहा है। उन्होंने कहा, “एआई एक बड़ा संतुलनकर्ता है, जहां भौगोलिक स्थिति और श्रम लागत का महत्व पहले जैसा नहीं रहा।” 

गोविल के अनुसार, यह भारत के लिए निर्णायक क्षण है। “भारत दुनिया को यह संकेत दे रहा है कि वह एआई में निवेश कर रहा है और संभवतः यहीं एआई का वास्तविक सामाजिक-आर्थिक प्रभाव देखने को मिलेगा।”

उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में एआई की संभावनाओं पर जोर देते हुए कहा कि यह भारतीय व्यवसायों को नई गति दे सकता है और देश को कई चुनौतियों से आगे निकलने में मदद कर सकता है।

वैश्विक प्रतिस्पर्धा का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा, “यह आधुनिक दौर की हथियारों की होड़ है- यह एआई की दौड़ है।” कई देश एआई अवसंरचना विकसित करने के लिए सैकड़ों अरब डॉलर निवेश कर रहे हैं।

उन्होंने ‘सॉवरेन एआई’ और स्वदेशी बड़े भाषा मॉडल (एलएलएम) की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि इससे देश अपने हितों की रक्षा कर सकते हैं। हालांकि बुनियादी मॉडल विकास मुख्यतः उत्तरी अमेरिका में हुआ है, भारत को अवसंरचना, प्रतिभा और उपयोग मामलों को मजबूत करना होगा।

प्रतिभा के विषय में उन्होंने कहा कि भारत के पास तकनीकी कौशल की कमी नहीं रही, लेकिन एआई के युग में आवश्यक कौशल का स्वरूप बदल गया है। अब इंजीनियरों को केवल कोड लिखने की नहीं, बल्कि एआई द्वारा उत्पन्न समाधान की गुणवत्ता और उपयोगिता सुनिश्चित करने की आवश्यकता है।

अमेरिका के साथ सहयोग पर उन्होंने कहा कि OpenAI, Google, Anthropic और Microsoft जैसी कंपनियों के मॉडल भारत में अपनाए जा रहे हैं। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत अपने एआई भविष्य के लिए किसी एक देश पर निर्भर नहीं रहेगा।

गोविल ने भारतीय प्रवासी समुदाय की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया। उनके अनुसार, भारतीय मूल के उद्यमी और निवेशक भारत लौटकर अगली विकास लहर को गति दे रहे हैं।

उन्होंने निष्कर्ष में कहा कि भारत को एआई को ऊर्जा दक्ष, किफायती और व्यापक जनहितकारी बनाने की दिशा में काम करना होगा, ताकि इसका लाभ देश की विशाल आबादी तक पहुंचे।

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